पीड़ित छात्रा बोलीं- SIT जांच पर नहीं है भरोसा, चिन्मयानंद बना रहे हैं बीमारी का बहाना

शाहजहांपुर। पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और बीजेपी नेता स्वामी चिन्मयानंद पर आरोप लगाने वाली लॉ की छात्रा ने अब एसआईटी जांच पर सवाल खड़े कर दिए है। पीड़ित छात्रा का कहना है कि 164 के बयान दर्ज होने के 24 घंटे बाद भी स्वामी चिन्मयानंद खुलेआम घूम रहे है। पीड़िता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि स्वामी चिन्मयानंद जेल जाने से बचने के लिए बीमारी का बहाना बना रहे है।

लटकी हुई है गिरफ्तारी की तलवार

लटकी हुई है गिरफ्तारी की तलवार

दरअसल, 17 सितंबर को बीजेपी नेता स्वामी चिन्मयानंद पर रेप और यौन शोषण का आरोप लगाने वाली लॉ की छात्रा ने मैजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए थे। छात्रा के बयान दर्ज होने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि स्वामी चिन्मयानंद पर रेप की धारा बढ़ाकर कभी भी गिरफ्तारी की जा सकती है। लेकिन सोमवार देर रात ही स्वामी चिन्मयानंद ने स्वास्थ्य संबंधित शिकायत की। जिसके बाद डॉक्टरों के एक दल ने चिन्मयानंद की मेडिकल जांच की। फिलहाल उन्हें उनके घर पर ही चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

SIT जांच पर नहीं है भरोसा

SIT जांच पर नहीं है भरोसा

यौन शोषण का आरोप लगाने वाली लॉ की छात्रा ने एसआईटी की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए है। पीड़ित छात्रा का कहना है कि अब उसे एसआईटी की जांच पर भरोसा नहीं रहा है, क्योंकि 164 के बयान दर्ज कराने के 24 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक स्वामी चिन्मयानंद की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ित का कहना है कि एसआईटी की टीम कल से उन्हें कुछ बता नहीं रही है साथ ही फोन भी नहीं उठा रही है।

क्या है पूरा मामला?

क्या है पूरा मामला?

23 अगस्त को शाहजहांपुर से लॉ की छात्रा लापता हो गई थी। इसके एक दिन बाद लड़की ने सोशल मीडिया में वीडियो पोस्ट कर बताया था कि संत समुदाय का एक प्रभावशाली नेता उसे परेशान कर रहा है और मारने की धमकी दे रहा है। छात्रा के पिता ने बाद में चिन्मयानंद पर उनकी बेटी और अन्य छात्राओं के शोषण का आरोप लगाया था। 27 अगस्त को लड़की के पिता की शिकायत के आधार पर चिन्मयानंद के खिलाफ आईपीसी की धारा 364(अपहरण या हत्या के लिए अपहरण) और धारा 506(आपराधिक धमकी) के तहत केस दर्ज किया था। 30 अगस्त को राजस्थान में लॉ स्टूडेंट का पता चला और बाद में उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी शिकायतों के आधार पर यूपी सरकार को एसाआईटी का गठन करने का आदेश दिया।

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