Shahdol में फिर अंधविश्वास की भेंट चढ़ा 45 दिन का मासूम, निमोनिया ठीक करने के नाम पर गर्म रॉड से दागा

Shahdol News: मध्य प्रदेश के शहडोल संभाग में एक बार फिर से दगना कुप्रथा का मामला सामने आया है। जहां बीमारी दूर करने के नाम पर गर्म चूड़ियों से नोनीहाल बच्चे के शरीर को दागा गया। जब बीमारी ठीक नहीं हुई बच्चा और गंभीर हो गया, तो फिर बच्चों को अस्पताल ले जाया गया।

लेकिन कई दिन जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ने के बाद मासूम ने अपना दम तोड़ दिया। इस तरह से एक बार फिर से एक मासूम दगना कुरीति का शिकार हो गया।

Shahdol News:

पूरा मामला उमरिया जिले के बकेली का है। जहां 45 दिन के एक मासूम बच्चे के साथ दगना जैसी क्रूरता की गई। जानकारी अनुसार बच्चे की तबीयत बिगड़ी, जिसमें उसकी सांसें चल रही थी, पेट में सूजन आ गया था। इस बीमारी को ठीक करने के नाम पर पेट को दागा गया।

जिसके बाद उसकी तबीयत और गंभीर हो गई। जब बच्चे की हालत बिगड़ने लगी, तो उसे शहडोल जिला अस्पताल में उपचार के लिए एडमिट कराया गया। कुछ दिन तक जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ने के बाद आखिर में 45 दिन के मासूम बच्चे की मौत हो गई।

जानकारी अनुसार मासूम बच्चे को गर्म दागा गया था। इसके पेट पर दागने के कई निशान थे। 21 दिसंबर को जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। तभी से यह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा था। 28 दिसंबर को इस मासूम बच्चे की मौत हो गई।

शहडोल जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर जीएस परिहार के मुताबिक यह 21 दिसंबर को दोपहर 1:00 बजे के आसपास अस्पताल में एडमिट हुआ था। यह पाली ब्लॉक जिला उमरिया के रहने वाले थे। लड़के की मां जो अपने मायके में थी। वह भी उमरिया जिले के पाली ब्लॉक में ही उसका गांव आता है। वहां उसका 45 दिन का बच्चा था। जब बच्चे की तबीयत बिगड़ी तो चार-पांच दिन तक तो वो उसका देसी इलाज करते रहे।

मासूम की तबीयत जब ज्यादा बिगड़ी तो उसकी नानी ने उसको दागा था। जिससे उसकी तबीयत और गंभीर हो गई। फिर उसे जिला अस्पताल शहडोल लेकर आए। 21 तारीख को दोपहर में यहां पर आते ही डॉक्टर जो एसएनसीयू में थे। उन्होंने उसे देखा, बच्चा सीरियस कंडीशन में था। परिजनों को बता दिया गया था, कि बच्चे की हालत खराब है, लेकिन प्रयास कर रहे हैं। बच्चे को तुरंत वेंटिलेटर पर ले जाया गया। तब से बच्चा सीरियस ही था, वेंटिलेटर पर ही था। 28 तारीख को बच्चे की मौत हुई सीवियर निमोनिया उसका कारण है।

बताते चलें कि शहडोल संभाग आदिवासी बाहुल्य संभाग है। यहां पर दगना कुप्रथा काफी ज्यादा हावी है। जिले से तो दगना कुप्रथा के कई मामले सामने आते ही रहते हैं। अब उमरिया जिले से भी सामने आ रहे हैं‌। जिस तरह से इन मासूम बच्चों को इस दगना कुप्रथा जैसी कुरीति का शिकार बनाया जा रहा है।

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