ग्राउंड रिपोर्ट : मंत्री रामखेलावन पटेल के क्षेत्र में आदिवासी नाले का पानी पीने को मजबूर, नल जल योजना नदारद

सतना जिले के अमरपाटन क्षेत्र के लोग पानी के लिए सिर्फ एक छोटे से झरने से निकलने वाली जलधारा पर निर्भर हैं. घर से करीब 500 मीटर की दूरी तय करने के बाद यहां की महिलाएं पहाड़ से निकलने वाले झरने से पानी भरने जाती हैं।

Drinking water from drain in Satna

सतना ज़िले के अमरपाटन विधानसभा में विकास के नाम पर सालों-साल करोड़ों रुपये ख़र्च किए गए, जिनमें से सबसे अधिक पैसा पानी के संकट को दूर करने में खपाया गया। यहां पैसा तो पानी की तरह बहा, लेकिन आदिवासियों की प्यास नहीं बुझ पाई। बूंद-बूंद पानी के लिए अब भी लोग जूझ रहे हैं। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में पीने का पानी जुटाना लोगों के लिए रोज़ का संघर्ष है। अमरपाटन विधानसभा के डोमा नौसा, और भड़रा के लोग इस आस में हैं कि आख़िर कब दूर होगा यह संकट और कब ख़त्म होगी पीने के पानी के लिए उनकी जंग?

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    मंत्री रामखेलावन पटेल के क्षेत्र में आदिवासी नाले का पानी पीने को मजबूर, नल जल योजना नदारद
    पहाड़ से निकलने वाले झरने पर निर्भर

    पहाड़ से निकलने वाले झरने पर निर्भर

    पहाड़ से निकलने वाले एक छोटे से झरना या फिर नाला पर ही पानी के लिए निर्भर हैं। यहां अब तक न तो नल-जल योजना पहुंची है और न ही हैंडपंप की ही सुविधा है। आदिवासी लोगों का कहना है पहले पुरानी बस्ती में थे वहां पानी की सुविधा थी यह नई बस्ती है 20 वर्षों से यहीं से पानी भरते आ रहे हैं। पेयजल के लिए पहाड़ से निकलने वाले पानी पर ही निर्भर हैं।

    गांव में एक हैंडपंप है वह भी खराब

    गांव में एक हैंडपंप है वह भी खराब

    ग्रामीणों ने बताया कि कई वर्ष पहले यह पर हैंडपंप लगवाया गया था मगर वह खराब पड़ा हुआ है कही से पानी न मिलने ये लोग गंदे नाले का पानी पीने को मजबूर हैं।

    झरने में सुबह शाम रहती है भीड

    झरने में सुबह शाम रहती है भीड

    इस झरने के पास सुबह, दोपहर और शाम को महिलाओं एवं बच्चों और बुजुर्गों की भीड़ रहती है। पहाड़ से निकलने वाले पानी को बर्तन में भरकर अपने माथे पर लेकर तकरीबन 500 मीटर की दूरी तय कर अपने घर पहुंचती हैं। डोमा गांव राम विश्वास कोल का कहना है कि उनके बाप के समय भी यहीं से घर पर पानी जाता था। आज के दिन हमलोग भी यहीं से पानी ले जा रहे हैं।


    घंटो लगता है समय

    इसी गांव की महिला बड़की गीताबाई का कहना है कि 20 साल पहले उनकी शादी इस गांव में हुई थी। वह तब से हर दिन पहाड़ के नीचे आकर पानी भर रही हैं। लक्ष्मी की मानें तो यहां एक बार पानी भरने में आधे एक घंटे तक का समय गुजर जाता है. मतलब हर दिन लगभग तीन से चार घंटा पहाड़ के नीचे आकर पानी भरने में बीत जाता है।

    राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल का क्षेत्र

    राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल का क्षेत्र

    कहने को तो ये मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल के गृह विधानसभा क्षेत्र का ग्राम पंचायत डोमा हैं इसके बावजूद भी ऐसी तस्वीरों का सामने आना कही न कही सरकार के मनसूबे पर सवाल खड़े होते हैं।

    गंदे पानी पीने से कई बीमारियों का खतरा

    गंदे पानी पीने से कई बीमारियों का खतरा

    इस तरह के गंदे नाले का दूषित पानी से कई बीमारियां भी इनको घेरती इन सभी बातों को जानते हुए भी मजबूरन ग्रामीणों को इस तरह का पानी पीना पड़ता है।

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