Ground Report: उद्घाटन के 9 साल बाद भी मंडी के पेमेंट काउंटर पर ताला, सतना की कृषि उपज मंडी में किसान परेशान
Satna News: मध्य प्रदेश में शासन-प्रशासन किसानों के हितैशी बनने का दावा करती आई है। लेकिन हकीकत में किसान आज भी व्यापारियों के हाथ की कठपुतली है। रविवार को कुछ ऐसा ही नजारा वन इंडिया हिंदी की टीम को सतना की कृषि उपज मण्डी में देखने को मिला है।
सतना की कृषि उपज मंडी में किसानों की सुविधा के लिए 18 लाख की लागत से बनाया गया भुगतान काउटर बीते 9 सालों से धूल फांकता जर्जर हो रहा है तो उधर किसान अपनी उपज बेचने के बाद अनाज का दाम पाने के लिए एक गोदाम से दूसरे गोदाम में परेशान देखे गए हैं।

मंडी प्रशासन की माने तो उद्धाघन के बाद से ही भुगतान काउटर का संचालन नहीं हो पाया। जिसकी मुख्य वजह किराए दरो का निर्धारण न हो पाना है। हालांकि एक बार इसे संचालित करने का प्रयास किया गया था लेकिन उसके बाद मंडी प्रशासन ने भी दोबारा दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

व्यापारी नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
भुगतान काउंटर बनने के बाद मंडी प्रशासन ने विज्ञप्ति निकालकर उसकी नीलामी कराई चाही थी। लेकिन किसी व्यापारी ने इस प्रक्रिया में भाग लेने में रूचि नहीं दिखाई। लिहाजा निर्मित भवन आज बिना उपयोग के ही जर्जर होता जा रहा है तो दूसरी ओर मंडी के राजस्व को 18 लाख भी बर्बाद होने के कगार में है।

संचालन से किसानों को सुविधा
मंडी में मौजूद किसान महेंद्र सिंह सोलंकी ने वन इंडिया हिंदी को बताया की 18 लाख के भुगतान काउटर का संचालन होने से मंडी में आने वाले किसानों को सुविधा में इजाफा होगा। उन्हें अपने भुगतान के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। अभी हालात यह है कि किसान एक से अधिक उपज लेकर मंडी पहुंचता तो अनाज का दाम पाने के लिए अलग अलग व्यापारियों की गोदामों में जाना पड़ता है।

गल्ला कारोबारियों की गोदामें प्रांगण में काफी दूर-दूर तक बनी है तो किसान को भुगतान पाने के लिए गोदाम-गोदाम भटकना पड़ता है। कुछ ऐसे भी व्यापारी है जिनके पास किसी भी गोदाम का आवंटन नहीं होने से दूसरे व्यापारियों की गोदामों में अपना भुगतान करने के लिए बैठते है। भुगतान काउंटर के संचालन से ऐसे व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा और किसानों को भी एक ही जगह अपना भुगतान पा सकेगा।

2016 में हुआ था उद्घाटन
किसानों की सुविधा के लिए 18 लाख की लागत से बने भुगतान काउंटर का उद्घाटन वर्ष 2016 में तत्कालीन मंत्री एवं वर्तमान डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के द्वारा कराया गया था। उद्घाटन तो करा दिया गया परन्तु उसका संचालन आज तक नहीं कराया जा सका। जिसके चलते लाखों रूपए खर्च करने के बाद मंडी प्रशासन किसानों के हित में बनाए भवन का लाभ उन्हें दे पा रही है।
इकना कहना है
मंडी सचिव करुणेश तिवारी के मुताबिक भुगताना काउंटन के संचालन को लेकर मंडी प्रशासन प्रयासरत है। नवीन दरों का निर्धारण कर जल्द ही विज्ञापन के माध्यम से नीलामी प्रक्रिया कराई जाएगी।












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