BMC की रिपोर्ट है या मजाक, बच्चे का हीमोग्लोबिन 50, दूसरे को मलेरिया 'ए' पॉजीटिव!
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में सेंट्रल लैब की लापरवाही मरीज पर भारी पड़ सकती हैं। बीते रोज यहां एक बालक को 13.5 की जगह 50 हीमोग्लोबिन की रिपोर्ट दे दी गई। पूर्व में मलेरिया ए पॉजिटिव बताया गया था।

Sagar बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिसमें 11 साल के बालक में हीमोग्लोबिन का स्तर 50 ग्राम प्रति डेसीलीटर बताया गया। रिपोर्ट देखते ही डॉक्टर के होश उड़ गए, उन्होंने मरीज के परिजनों को दोबारा पैथोलॉजी भेजकर सही रिपोर्ट देने की बात कही। जिसके बाद आनन-फानन में रिपोर्ट को सुधार कर 13.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर किया गया। हैरानी की बात तो यह है कि मरीज को रिपोर्ट देने से पहले पैथोलॉजी विशेषज्ञों द्वारा रिपोर्ट को वेरीफाई करने की व्यवस्था है, लेकिन इसके बावजूद भी लैब में लगातार रिपोर्ट्स में गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं।

जानकारी अनुसार 8 फरवरी को 11 साल के बालक अंश गुरनानी को उनके परिजन बीएमसी के शिशु रोग विभाग में उपचार के लिए ले गए थे। जहां डॉक्टर ने अंश की खून की जांच सीबीसी कराने को कहा। जिसके बाद परिजन जांच के लिए बीएमसी की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब पहुंचे। बच्चे का सैंपल लिया गया और अगले दिन जब परिजनों को रिपोर्ट मिली तो उसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 50 ग्राम प्रति डेसीलीटर लिखी थी, जिसे देखकर परिजन घबड़ा गए और आनन-फानन में रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे। जहां डॉक्टर ने रिपोर्ट देखकर उन्हें तत्काल पैथोलॉजी विभाग के कंफर्म कराने को कहा। जैसे ही परिजन रिपोर्ट लेकर पैथोलॉजी गए तो सामने आया कि कम्प्यूटर ऑपरेटर की गलती के कारण प्रिंटिंग मिस्टेक हुई है। बालक का हीमोग्लोबिन 13.5 है। जिसके बाद कम्प्यूटर में इस रिपोर्ट को सुधारा गया औऱ् नई रिपोर्ट जारी की गई, लेकिन सवाल यह उठता है कि मरीज को रिपोर्ट देने से पहले जिस डॉक्टर ने इसे वेरीफाइ किया उसने इस गलती को क्यों नहीं पकड़ा।

शरीर में हीमोग्लोबिन की सामान्य मात्रा 13.5 से 17.5 होती है
विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार पुरुषों में 13.5-17.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर का स्तर हीमोग्लोबिन का सामन्य स्तर होता है। जबकि महिलाओं में 12.0 - 15.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य मानी जाती है। इससे कम होने से एनीमिया, थकान, सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हो सकती है।
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मलेरिया की रिपोर्ट भी ए पॉजिटिव दे दी
बीएमसी की सेंट्रल पैथोलॉजी में सिर्फ हीमोग्लोबिन ही नहीं बल्कि अन्य रिपोर्ट्स में भी गड़बड़ियां सामने आ रही है। एक और मामला मलेरिया की जांच से जुड़ा है। जिसमें शिशु रोग विभाग में भर्ती 1 साल की लक्ष्मी को मलेरिया की ए पॉजिटिव रिपोर्ट थमा दी गई। लक्ष्मी को वायरल फीवर की शिकायत के बाद बीएमसी में उपचार कराने गए थे। जहां डॉक्टर ने मलेरिया की जांच कराने को कहा था। जिसके बाद मरीज का सेंट्रल पैथोलॉजी में सैंपल हुआ और जब रिपोर्ट दी गई तो उसमें मलेरिया पैरासाइट ए पॉजिटिव बताया गया। रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने जांच को फिर से कंफर्म करने की बात लिखी। क्योंकि ए पॉजिटिव तो ब्लड ग्रुप होता है। मलेरिया पैरासाइट नहीं। मामला सामने आने के बाद रिपोर्ट को सुधारा गया।
वेरीफिकेशन के बाद ऐसी रिपोर्ट दी है तो जांच कराएंगे
सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में कई बार कम्प्यूटर ऑपरेटर से गलती हो जाती है, लेकिन यदि डॉक्टर के वेरीफिकेशन के बाद मरीज को ऐसी रिपोर्ट मिली है तो इसकी जांच की जाएगी।
-डॉ. आरएस वर्मा, डीन बीएमसी, सागर मप्र












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