धीरेंद्र शास्त्री का गजब स्वागत! महिला ने केले का गुच्छा, भक्तों ने नारियल दे मारे, सेवादारों ने बचाया
Bageshwardham: सनातन धर्म की ध्वजा उठाने वाले बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री (Bageshwardham Peethadhishwar Dhirendra Shastri) की दीवानगी कहिए उनके चाहने वालों ने नगर भ्रमण के दौरान स्वागत में फूल तो बरसाए ही, उनको केले का गुच्छा फेंक कर दे मारा, सैकड़ों लोगों ने रथ पर नारियल बरसा दिए! उनके सुरक्षागार्डो और सेवादारों को चोट से बचाने ने के काफी मशक्कत करना पड़ी।

सागर के खुरई में तीन दिवसीय श्रीहनुमंत कथा के आखिरी दिन यजमान व नगरीय विकास एवं आवास मंत्री के आग्रह पर धीरेंद्र शास्त्री खुले रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले थे। इस दौरान लाखों लोग सड़क पर उनके स्वागत व दर्शन में उमड़ आए। लोगों ने इतने फूल बरसाए कि सड़कें फूलों से पट गईं। एक महिला ने उनके स्वागत में दर्जन भर केले का गुच्छा नीचे से रथ के ऊपर फेंक दिया। इसके अलावा सैकड़ों लोगों ने उन्हें नारियल भेंट करने के लिए नीचे से रथ पर उछाल कर दिए। सुरक्षा गार्ड व सेवादार हाथ लगा-लगाकर उनको बचाते रहे। पुलिसकर्मी उनके भक्तों को इस तरह स्वागत न करने को लेकर समझाते रहे।
कथा स्थल में जाते वक्त खुरई नगर की जनता को पूज्य गुरुदेव के दर्शन | Bageshwar Dham Sarkar#bageshwardham #BageshwarDhamSarkar pic.twitter.com/S9yGogAOr6
— Bageshwar Dham Sarkar (Official) (@bageshwardham) September 8, 2023
चोट से बचने, परेशान होकर कुर्सी पर बैठ गए धीरेंद्र शास्त्री
खुरई की सड़कों पर उमड़े अपार जनसमूह और लोगों के स्नेह के बीच उन पर बरसते फूलों, केले और नारियल से कहीं चोट न लग जाए, इस कारण सुरक्षागार्डों ने उन्हें रथ पर कुर्सी लगाकर बैठा दिया। कुछ समय बाद पं. धीरेंद्र शास्त्री बीच-बीच खड़े हुए तो फिर वहीं आलम। सुरक्षा गार्ड व रथ पर सवार उनके शिष्य हाथों से फूल, नारियल रोकते रहे, उन्हें बचाते रहे। परेशान होकर पीठाधीश्वर रथ पर कुर्सी पर ही बैठ गए, फिर रास्ते भर वे कुर्सी पर ही बैठे अभिवादन स्वीकार करते रहे और आर्शीवाद देते रहे।
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केले-नारियल से स्वागत पर धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा पढ़िए...
बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि खुरई में आज मुझे इतने फूल घले, इतने फूल घले कि बता नहीं सकता। मैं खड़ा होकर यह अनुभव कर रहा था कि एक चौराहे पर एक बहिन ने केलों का गुच्छा दे मारा, पूरे एक दर्जन केले थे। सेवादार ने कहा यह क्या है? महाराज जी चोट लग जाएगी। मैंने कहा ये स्वागत है! आगे बढ़े तो जगह-जगह फूलों के साथ नारियल बरसने लगे। तब मुझे लगा कि ऐसे प्रेम में सिर न फूट जाए! तब मैं कुर्सी पर बैठा और फिर खड़ा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसा आनंदपूर्ण अनुभव हुआ है कि मैं पूरे जीवन भूल नहीं सकता। ऐसा आत्मीय भाव, ऐसा अभिनंदन, ऐसी चमक मेरे पागलों के चेहरों पर, ऐसा आस्था का महाकुंभ खुरई में देखने को मिला कि मन पर छाप छूट गई। ऐसा पहले कभी देखने नहीं मिला।












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