Sagar: आयोग से झूठ बोली थीं प्रिंसिपल, FSL जांच में असली निकला लैब में रखा भ्रूण
सागर जिले के बीना की निर्मल ज्योति स्कूल विवादों में फंस गई है। एक छात्र को मारपीट के बाद स्कूल से निष्कासित कर प्रताड़ित करने के मामले में बाल संरक्षण अधिकार आयोग की टीम ने निरीक्षण कर टीआई को एफआईआर के निर्देश दिए थे।

मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना में स्थित निर्मल ज्योति मिशनरी स्कूल एक बार फिर विवादों में घिर गई है। दरअसल 10वीं के एक छात्र को परीक्षा के पहले पन्द्रह दिनों के लिए निलंबित करनेए स्कूल में धार्मिक शिक्षा देने तथा जीव विज्ञान की प्रयोगशाला में भ्रूण रखने के मामले में मिशनरी स्कूल चौतरफा घिर गया है। गुरूवार को मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष ने स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध एफआईआर लिखने के लिए एसपी को निर्देशित किया। वहीं जांच के लिए एफएसएल भेजा गया भ्रूण भी असली पाया गया। इधर बीआरसी ने भी स्कूल में मिली अनियमितताओं के लिए स्कूल प्रबधंन को नोटिस जारी किया है।
मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष द्रविंद्र मोरे ने पुलिस अधीक्षक को एक पत्र लिखा है। पत्र में छात्र रोहित कुशवाहा के साथ हुई मारपीट का हवाला देते हुए लिखा गया कि स्कूल प्रबंधन ने मारपीट करने वाले छात्रों के विरुद्ध कार्रवाई न करते हुए पीड़ित छात्र को ही पन्द्रह दिनों के लिए निलंबित कर दिया। जबकि छात्र की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही थीं। स्कूल प्रबंधन की इस कार्रवाई से छात्र अवसाद में चला गया। दसवीं की बोर्ड परीक्षा के पहले इस तरह की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए आयोग अध्यक्ष ने एसपी को बताया कि प्रकरण बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 13-1 के अंतर्गत संज्ञान में लिया। साथ ही प्रकरण के संबंध में आयोग के सदस्य ओंकार सिंह तथा डा निवेदिता शर्मा ने 06 अप्रैल को स्कूल का निरीक्षण करने के दौरान बीना टीआइ को एफआईआर करने के लिए निर्देशित किया था। आयोग अध्यक्ष ने प्रकरण के संबंध में की गई जांच व आवश्यक कार्रवाई से सात दिन के भीतर अवगत कराने के लिए भी कहा गया है।
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बीआरसी ने दिया स्कूल को नोटिस
मामले में बीआरसी महेंद्र सिंह जाट ने निर्मल ज्योति कान्वेंट स्कूल प्रबंधन को एक नोटिस भी जारी किया है। जिसमें मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों के निरीक्षण में मिली अनियमितताओं पर दो दिन के भीतर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है।
प्रयोगशाला में मिला मानव भ्रूण है असली
मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों के निरीक्षण के दौरान 6 अप्रैल को जो मानव भ्रूण स्कूल की प्रयोगशाला में मिला था, वह असली है। एफएसएल ने इसकी पुष्टि कर दी है। साथ ही स्कूल प्रबंधन ने भी पुलिस को दिये बयानों में यह स्वीकार किया है कि मानव भ्रूण असली है। उन्होंने स्कूल में आए भ्रूण के बारे में तथ्यों से भी पुलिस को अवगत कराया। अब मामला पूरी तरह से पुलिस के पाले में है।
मामले में कब-कब क्या हुआ
- 30 जनवरी को स्कूल परिसर में रोहित कुशवाहा के साथ मारपीट हुई।
- शिकायत करने पर स्कूल प्रबंधन ने रोहित को 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया।
- 03 फरवरी को छात्र के पिता ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग से शिकायत की।
- 03 फरवरी को ही आयोग ने कलेक्टर को मामले में संज्ञान लेने की जानकारी दी।
- 06 अप्रैल को आयोग के सदस्य निरीक्षण हेतु स्कूल आए।
- 06 अप्रैल को ही स्कूल की प्रयोगशाला में मानव भ्रूण मिला।
- 06 अप्रैल को ही शिक्षा अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदन पुलिस को भेजा।
- 08 अप्रैल को डीईओ द्वारा गठित टीम ने स्कूल की जांच की।
- 10 अप्रैल को पुलिस ने यह भ्रूण जांच के लिए भेजा।
- 10 अप्रैल को अभाविप ने स्कूल के सामने प्रदर्शन किया।
- 12 अप्रैल को बीआरसी ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया।
- 12 अप्रैल को ही मानव भ्रूण संबंधी रिपोर्ट एफएसएल से आई।
- 13 अप्रैल को आयोग अध्यक्ष ने एसपी को पत्र लिखा।












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