Sagar News: चर्च के फादर ने दी जान, अंतिम इच्छा लिखी, मेरा हिन्दू रीति-रिवाज से दाह-संस्कार किया जाए
मप्र में धर्मांतरण ईसाई बने एक फादर ने जान दे दी है। उसने अपनी जेब में एक पत्र लिखकर छोड़ा है, जिसमें लिखा है कि उसे दफनाया न जाए, बल्कि हिन्दू-रीति रिवाज से उसका दाह संस्कार कराया जाए। बता दें कि चर्च का फादर गढ़कोटा से सागर विशप मीटिंग के लिए आया था।

सागर कि कैन्ट इलाके में स्थित बिशप हाऊस में मासिक प्रार्थना के लिए गढ़ाकोटा से आए एक फादर (ईसाई धर्म गुरु) ने अज्ञात कारणों के चलते फंदे पर झूलकर जान दे दी। फादर का नाम अनिल फ्रांसिस बताया जा रहा है। वह सीआई विलेज तोपखाना ग्यागंज रोड पर पेड़ से लटका मिला। घटना की जानकारी लगते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। मृतक के पास से एक पत्र भी मिला है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि मेरा शव मेरे पिता के सुपुर्द कर दिया जाए। मुझे दफनाया न जाए बल्कि मेरा हिंदु-रीति रिवाज के अनुसार दाह-संस्कार किया जाए।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार अनिल ने किशोर अवस्था में ही ईसाई धर्म अपना लिया था। जिसके बाद उन्हें बाकायदा धार्मिक शिक्षा-दीक्षा देकर फादर की पदवी दी गई। वे करीब डेढ़ साल पहले रायसेन के उदयपुरा में धार्मिक पद पर थे। बाद में उनका ट्रांसफर गढ़ाकोटा कर दिया गया।
मणिपुर संबंधी पोस्ट करने पर FIR दर्ज हुई थी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मृतक चर्च फादर अनिल फ्रांसिस के खिलाफ पिछले महीने एक एफआईआर उनके पूर्व कार्यस्थल उदयपुरा में हुई थी। अनिल ने मणिपुर में चल रहे आगजनी, दंगा-फसाद के संबंध में वायरल एक फोटो को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर किया था। जिससे नाराज होकर स्थानीय व्यक्तियों ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इस एफआईआर के बाद अनिल, परेशान रहने लगे थे। वहीं हाल ही में उनका गढ़ाकोटा के स्कूल में कार्यरत एक महिला शिक्षक से विवाद हुआ था। माना जा रहा है कि इन्हीं कुछ समस्याओं के चलते उन्होंने फांसी लगा ली। चर्चाओं के अनिल फ्रांसिस के परिवार के बाकी लोगों ने क्रिश्चियन धर्म नहीं अपनाया था। उसके पिता उमेश अहिरवार समेत अन्य परिवार के लोग रतौना के पास एक गांव में रहते हैं।












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