Rewa News: रीवा-सेमरिया मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, ओवरटेक के दौरान बस पलटी, बाइक सवार तीन युवकों की मौत
Rewa News: रविवार की शाम रीवा-सेमरिया मार्ग पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों को मातम में डुबो दिया। यात्रियों से भरी एक बस तेज रफ्तार में ओवरटेक करने के दौरान एक बाइक को टक्कर मारकर अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे पलट गई।
हादसा इतना भीषण था कि बाइक सवार तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बस में सवार पांच यात्री घायल हो गए।

Rewa News: हादसा हरदुआ के पास हुआ, मौके पर मचा कोहराम
यह हादसा रविवार शाम करीब 4 बजे हरदुआ गांव के पास हुआ। रीवा से सेमरिया जा रही MP17P0622 नंबर की राजू ट्रेवल्स की बस जैसे ही हरदुआ गांव के पास पहुंची, तेज रफ्तार में एक बाइक को ओवरटेक करने की कोशिश में उससे टकरा गई। टक्कर लगते ही बाइक सवार सड़क पर गिर पड़े और बस सड़क किनारे पलट गई। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई।
घटना की सूचना मिलते ही सेमरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। बस में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और घायलों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
मौके पर ही हुई तीन युवकों की मौत, एसडीओपी उमेश प्रजापति के मुताबिक, मरने वाले तीनों युवक एक ही गांव के रहने वाले थे। उनकी पहचान इस प्रकार हुई है:
- लखन कोल (30 वर्ष)
- लवकुश कोल (24 वर्ष)
- अमन कोल (27 वर्ष)
- तीनों युवक एक ही बाइक पर सवार थे और कहीं बाहर से अपने गांव लौट रहे थे।
ड्राइवर-कंडक्टर फरार, बस मालिक से पूछताछ
हादसे के बाद बस का ड्राइवर और कंडक्टर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने बस को कब्जे में ले लिया है और बस मालिक को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया है। दोनों फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप, तेज रफ्तार और लापरवाही बनी हादसे की वजह
नरेंद्र प्रताप सिंह, जो कि पास के गांव से हैं, उन्होंने बताया कि हादसा पूरी तरह से बस चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार का नतीजा था। उनके अनुसार, चालक ने न सिर्फ ओवरटेक करने की जल्दबाजी की, बल्कि टक्कर के बाद वाहन पर नियंत्रण भी नहीं रख पाया।
Rewa News: "अगर अस्पताल में व्यवस्था होती, तो बच सकती थीं जानें"
नरेंद्र सिंह ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद घायल युवक तड़प रहे थे, लेकिन सेमरिया के अस्पताल में प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा, "अगर वक्त पर प्राथमिक इलाज मिल जाता, तो शायद दो घायल युवकों की जान बचाई जा सकती थी।"
उन्होंने यह भी बताया कि एंबुलेंस को बार-बार कॉल करने के बावजूद 45 मिनट तक कोई मदद नहीं पहुंची। आखिरकार उन्होंने खुद ही घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
सिस्टम की लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना ने ना सिर्फ एक परिवार को उजाड़ा, बल्कि सिस्टम की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया। ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन होता, अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं होतीं और आपात सेवाएं समय पर पहुंचतीं, तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।
सड़क हादसा या सिस्टम का साइड इफेक्ट?
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सिर्फ चालक की लापरवाही ही नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता भी हादसों को और जानलेवा बना देती है। यह सिर्फ तीन युवाओं की मौत नहीं थी, यह सवाल है उस व्यवस्था पर, जो वक्त पर न तो मदद पहुंचा पाई, और न ही जान बचा पाई।
- क्या अब प्रशासन जागेगा? क्या अब सिस्टम में कोई सुधार होगा?
- या फिर यह भी एक आंकड़ा बनकर, अगली खबर का हिस्सा बन जाएगा...












Click it and Unblock the Notifications