Maha Shivratri 2023: एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ रीवा का महाप्रसाद, 5100 किग्रा बनी खिचड़ी
रीवा से महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर रीवा के पचमट्ठा आश्रम में 51 सौ किलो खिचड़ी का भोग प्रसाद तैयार किया गया है। जिसके लिए कई दिनों से समिति द्वारा तैयारियां जोरों से चल रही थी।

एमपी के रीवा जिले में महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर शिव भक्तों ने बड़े पैमाने पर खिचड़ी का महाप्रसाद बनाकर एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है। आयोजन समिति ने 1100 किलो के कड़ाहे में 5100 किलो खिचड़ी बनाकर यह उपलब्धि अपने नाम किया है।
इसकी तैयारी पिछले महीने से चल रही थी। इंदौर से एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम भी शनिवार को रीवा पहुंची थी। जिनके सामने यह महाप्रसाद तैयार किया गया। इसके बाद टीम ने शिव भक्तों को प्रमाण पत्र भी सौंपा।
रीवा जिले में महाशिवरात्रि के अवसर पर खिचड़ी बनाने की परंपरा पिछले कई सालों से चली आ रही है। लेकिन इस महाशिवरात्रि के आयोजन पर समिति ने विशाल भंडारे का आयोजन किया था। इसकी तैयारी पिछले महीनों से चल रही थी। यह महा प्रसाद एक ही कड़ाही में 5100 किलो खिचड़ी तैयार कर श्रद्धालुओं के लिए रिकॉर्ड बनाया है। इसके लिए एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम को रीवा बुलाया गया था।
इसके बाद उनकी टीम के सामने यह महाप्रसाद बनाया गया। पचमठ मंदिर परिसर में पंडाल लगाया गया। उसके बीच में स्टेज बनाया गया था, एक तरफ प्रसाद बनाया जा रहा था, दूसरी तरफ भंडारे का आयोजन किया गया था।
इस महाशिवरात्रि पर्व पर शिव बारात आयोजन समिति द्वारा भगवान भोलेनाथ के लिए महाप्रसाद बनाने की तैयारी की गई थी। इसके लिए 1100 किलो लोहे की कड़ाही बनवाई गई थी। कड़ाही में 5100 किलो का महाप्रसाद तैयार किया गया। 1100 किलो के इस कड़ाही में 5100 किलो खिचड़ी तैयार की गई। इसे बनाने में 14-14 फीट की तीन करछूले का इस्तेमाल किया गया था। लगभग दो दर्जन शिव भक्तों ने मिलकर इस महाप्रसाद को बनाया।
इतनी बड़ी संख्या में बना महाप्रसाद एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। टीम ने आयोजन समिति को प्रमाण पत्र भी सौंपा है। यूपी के कानपुर और आगरा के कारीगरों ने 15 दिनों में 1100 किलो की कड़ाही बनाई थी। इसे बनाने में 51 इंजीनियरों को लगाया गया था।
कड़ाहे को जेसीबी मशीन से उठाकर कानुपर से रीवा के पचमाता आश्रम तक एक ट्रक में लोड किया गया। कड़ाहे की चौड़ाई 11 फीट और ऊंचाई 5.50 फीट है। इस कड़ाहे को रखने के लिए एक बहुत बड़ी भट्टी बनाई गई थी।












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