Rewa MP News: CSP पर हमला करने दौड़े पूर्व बीजेपी विधायक, CSP ऋतु उपाध्याय को कहा- असंवेदनशील औरत
MP News: भाजपा के पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी ने रविवार को रीवा में महिला सीएसपी ऋतु उपाध्याय के साथ जो व्यवहार किया, उसने प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला सुरक्षा और सम्मान पर मंच से भाषण देने वाली पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने खुलेआम एक महिला पुलिस अधिकारी को "असंवेदनशील औरत" कहकर अपमानित किया, दबाव बनाने की कोशिश की और उनकी ओर आक्रोश में दौड़ पड़े।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। सवाल पूछा जा रहा है कि जब सत्ता से जुड़े लोग ही महिला अधिकारियों के साथ ऐसी अभद्रता करेंगे, तो आम महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?

क्या हुआ था घटनास्थल पर?
घटना रीवा के मनगवां थाने के पास की है। पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी एक मामले में अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे थे। मौके पर क्षेत्र की सीएसपी ऋतु उपाध्याय कानून व्यवस्था का जायजा ले रही थीं। तभी पूर्व विधायक आपा खो बैठे और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें "असंवेदनशील औरत" कहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही CSP ने मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की बात कही, त्रिपाठी भड़क उठे। उन्होंने न केवल CSP पर दबाव बनाने की कोशिश की, बल्कि गुस्से में उनकी ओर दौड़ते हुए हमला करने की मुद्रा में आ गए। साथ में मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी तरह स्थिति को संभाला, लेकिन इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश में राजनीतिक भूचाल आ गया है।
CSP ऋतु उपाध्याय बोलीं - "कानून सबके लिए बराबर है"
घटना के बाद CSP ऋतु उपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं डरी नहीं हूं, लेकिन ये जो रवैया है, वह गलत है। किसी भी जनप्रतिनिधि को यह अधिकार नहीं कि वह कानून के रखवालों पर इस तरह से दबाव बनाए या उन्हें धमकाए। मैं सिर्फ अपना काम कर रही थी।"
उनका यह बयान न केवल साहसिक है, बल्कि उस सिस्टम की जमीनी हकीकत भी उजागर करता है, जहां महिला अधिकारी भी राजनीतिक दबाव से अछूती नहीं हैं।
सत्ता का दुरुपयोग या पार्टी अनुशासन का पतन?
पूर्व विधायक के इस रवैये को लेकर भाजपा के अंदर भी असहजता देखी जा रही है। पार्टी अनुशासन, महिला सुरक्षा और "बेटी बचाओ" जैसे नारे देने वाली भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का इस तरह की हरकत करना पार्टी की साख पर बड़ा धब्बा है।
कांग्रेस प्रवक्ता अजय सिंह ने कहा - "ये वही पार्टी है, जो मंच पर महिला सुरक्षा की बातें करती है और जमीन पर उनके नेता महिला अधिकारियों को खुलेआम धमकाते हैं। ये दोहरा चरित्र है। क्या अब महिला अफसर भी सुरक्षित नहीं हैं?"
पुलिस की चुप्पी पर भी उठे सवाल
जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त वहां मौजूद पुलिसकर्मी सिर्फ तमाशबीन बने रहे। किसी ने विधायक को रोका नहीं, न ही तत्काल कोई कानूनी कार्रवाई की गई। यह दर्शाता है कि राजनीतिक दबाव के सामने पुलिस तंत्र किस कदर पंगु हो चुका है।
भाजपा की चुप्पी या अंदरूनी हलचल?
अब तक भाजपा की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक पार्टी के अंदर इसे लेकर असहजता है, और रीवा जिले के संगठन स्तर पर रिपोर्ट मांगी गई है। यह भी मुमकिन है कि पार्टी त्रिपाठी से स्पष्टीकरण मांगे या अनुशासनात्मक कार्रवाई करे।












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