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भारत समेत दुनिया में 4 करोड़ बच्चों को नहीं मिला खसरे का टीका

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खसरे का टीका

भारत में महाराष्ट्र विशेष रूप से इस समय खसरे के प्रकोप से जूझ रहा है. मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि मुंबई और उसके आस पास के इलाकों में तो पिछले एक महीने में 13 बच्चों की खसरे से मौत हो चुकी है.

महाराष्ट्र के अलावा बिहार, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और केरल में भी मामलों की संख्या के बढ़ने की खबरें आई हैं. राज्य सरकारें और केंद्र सरकार चिंतित हैं और रोकथाम के कदम तुरंत शुरू करने की तैयारी की जा रही है.

लेकिन अब सामने आया है कि यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में खसरे के मामलों में बढ़ोतरी की समस्या मुंह बाए खड़ी है. एक नई रिपोर्ट ने दावा किया है कि 2021 में पूरी दुनिया में करीब चार करोड़ बच्चों को खसरे के खिलाफ दिए जाने वाले टीके की खुराक नहीं मिली.

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिका की सीडीसी द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 2.5 करोड़ बच्चों को पहली खुराक नहीं मिली और करीब 1.47 करोड़ बच्चों को दूसरी खुराक नहीं मिली.

कोविड का असर

रिपोर्ट दिखा रही है कि प्रभावपूर्ण ढंग से कोविड-19 महामारी की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था में जो उथल पुथल हुई उसके असर के रूप में टीकाकरण का स्तर अभी भी पहले जैसे नहीं हो पाया है.

रिपोर्ट के मुताबिक यह गिरावट खसरे को दुनिया से जड़ से मिटाने के प्रयासों के लिए एक बड़ा धक्का है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख तेद्रोस अधनोम घेब्रेयेसुस ने कहा कि यह कैसी विडंबना है कि जहां कोविड के खिलाफ तो टीके रिकॉर्ड समय में बना लिए गए और दे भी दिए गए, वहीं आम टीकाकरण कार्यक्रमों पर बुरा असर पड़ा और करोड़ों लोगों के लिए जोखिम खड़ा हो गया.

जिम्बाब्वे में इस साल खसरे से करीब 700 लोगों की मौत हो चुकी है

भारत में इस समस्या का काफी व्यापक असर हुआ है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अकेले मुंबई में पिछले दो महीनों में 200 से भी ज्यादा मामले सामने आए हैं. यह पिछले कुछ सालों में सामने आने वाले मामलों के मुकाबले एक बड़ी उछाल है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में 2021 में 10 मामले आए थे और एक पीड़ित की मृत्यु हो गई थी, 2020 में मामले तो 29 आए थे लेकिन मौत एक भी नहीं हुई थी और 2019 में 37 मामले और तीन पीड़ितों की मौत हो गई थी.

भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत खसरे का टीका हर बच्चे को दो खुराकों में देना होता है. पहली खुराक नौ महीनों की उम्र में और दूसरी 15 महीनों की उम्र में दी जानी चाहिए. अधिकारियों ने माना है कि कोविड की वजह से टीकाकरण पर असर पड़ा है. अकेले मुंबई में करीब 20,000 बच्चों को खसरे का टीका नहीं दिया जा सका.

बड़े संकट का खतरा

अगर टीका सही समय पर दे दिया जाए तो खसरे को लगभग पूरी तरह से होने से रोका जा सकता है. लेकिन चूंकि यह इतना संक्रामक है, इसे पूरी तरह से नष्ट करने और नष्ट रहने के लिए हर्ड इम्युनिटी आवश्यक है. हर्ड इम्युनिटी तभी हासिल हो सकती है जब अनुमानित रूप से 95 प्रतिशत आबादी को टीके की दो या दो से ज्यादा खुराक दी जाए.

2021 में दुनिया भर में सिर्फ 81 प्रतिशत बच्चों को पहली खुराक और 71 प्रतिशत बच्चों को दूसरी खुराक मिल पाई थी. यह 2008 के बाद पहली खुराक का सबसे कम वैश्विक औसत था. भारत उन पांच देशों में शामिल था जहां सबसे ज्यादा बच्चों को पहली खुराक नहीं मिली. नाइजीरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया और इंडोनेशिया भी इस सूची में शामिल हैं.

यह स्थिति दुनिया भर की सरकारों के लिए चिंता का विषय बन सकती है क्योंकि दुनिया का कोई भी इलाका कभी भी खसरे को पूरी तरह से मिटाने और मिटाए रखने में सफल नहीं हुआ है और इसका वायरस काफी जल्दी सीमाओं के पार फैल सकता है.

2016 के बाद से खसरे को खत्म कर चुके 10 देशों में इसका ताजा प्रकोप और पुनर्स्थापित प्रसार देखा गया है. भारत में मौजूदा स्थिति को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विशेषज्ञों की टीमें बनाई हैं और उन्हें ताजा प्रकोप की जांच करने और रोकथाम के उपाय सुझाने के लिए भेजा है.

(एएफपी से जानकारी के साथ)

Source: DW

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English summary
record number of children miss measles vaccine global report
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