अब्दुल्ला आजम खान की विधानसभा सदस्यता हुई रद्द, MP-MLA कोर्ट ने सुनाई थी दो साल की सजा
Abdullah Azam Khan: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बेटे स्वारा सीट से विधायक अब्दुल्ला आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई है। सदस्यता रद्द होने से उनकी स्वार विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया है।

Abdullah Azam Khan: आजम खान (Azam Khan) और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान (Abdullah Azam Khan) की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। 15 साल पुराने छजलैट मामले (chhajlet case) में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें एक और झटका लगा है। जी हां...अब्दुला आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई है। अब्दुला आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द होने से उनकी स्वार विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया है, जिसपर फिर से चुनाव होना है।
विधानसभा सचिवालय के तरफ से अधिसूचना जारी कर बताया गया है कि स्वार टांडा सीट रिक्त कर दी गई है। अब चुनाव आयोग इस सीट पर दोबार चुनाव कराएगा। आपको बता दें कि रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अब्दुल्ला आजम को तीन साल में दो बार अपनी विधायकी से हाथ धोना पड़ा है। दरअसल, फर्जी प्रमाणपत्र वाले मामले में अब्दुला को दो साल से ज्यादा की सजा हुई थी। इसी वजह से उनकी विधायकी भी हाईकोर्ट ने रद्द कर दी थी।
तो वहीं, अब 15 साल पुराने छजलैट (Chhajlet) मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुला को मुरादाबाद (Moradabad) की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई है। इसी वजह से विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी है। अब्दुला की विधायकी खत्म होने के बाद स्वार सीट खाली हो गई है, इसलिए वहां चुनाव की तैयारी भी शुरू की जाएगी। ठीक इसी तरह हेट स्पीच मामले में अब्दुल्ला आजम के पिता आजम खान की रामपुर से विधानसभा सदस्यता गई थी।
क्या है छजलैट मामला?
छजलैट मामला 15 साल पुराना है। 20 जनवरी 2008 को छजलैट पुलिस ने आजम खान की गाड़ी चेकिंग के लिए रुकवाई थी। इस दौरान आजम खान के समर्थक भड़क गए थे और जमकर हंगामा किया था। इस मामले में आजम खान, अब्दुल्ला आजम समेत 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में हंगामा करने वाले सभी लोगों पर सरकारी काम में बाधा डालने और भीड़ को उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया था।
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आजम को अपना पक्ष रखने के लिए दी गई तारीख
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बार समन जारी होने के बाद भी आजम खान एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। इस मामले में आजम के खिलाफ 2020 में अदालत ने अवमानना का मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, वो इस मामले में 06 फरवरी को कोर्ट में पेश हुए और अपने बयान दर्ज कराए थे। इसे मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष लोक अभियोजक मोहन लाल विश्नोई ने बताया कि अदालत पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी करार दिया है। हालांकि, कोर्ट ने आजम खान को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 20 फरवरी की तारीख दी गई है।












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