कोरोना से दुनियाभर में मच गया कोहराम, लेकिन गुजरात के इस गांव से एक भी मरीज नहीं मिला, देखिए VIDEO

राजकोट। देश-दुनिया में कोरोना महामारी से कोहराम मच गया। मगर, अभी भी ऐसे बहुत से गांव-कस्बे हैं, जहां कोरोना वायरस के संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया। एक भी मरीज न मिलने के बावजूद वहां के लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग व लॉकडाउन, अनलॉक के नियमों का पालन किया। आज हम आपको ऐसे ही एक गांव के बारे में बता रहे हैं, जहां अनलॉक के बावजूद लोग अब भी लॉकडाउन-सा जीवन जी रहे हैं।

वीडियो में देखें कैसा है यह गांव

वीडियो में देखें कैसा है यह गांव

1500 की आबादी वाला यह गांव है राजकोट के पास स्थित कणकोट गांव। यहां लोगों में अनुशासन कायम है और यही वजह है कि अब तक कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया। संवाददाता ने इस गांव का वीडियो रिकॉर्ड करके हमें भेजा, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि लोग घरों से बेवजह बाहर नहीं निकल रहे।

लोग लॉकडाउन जैसा ही जीवन जी रहे

लोग लॉकडाउन जैसा ही जीवन जी रहे

कणकोट के सरपंच शैलेषभाई नंदाणिया का कहना है कि, गांव के बड़े-बुजुर्गों ने फैसला लिया है कि वे गांव में कोरोना जैसी महामारी को अंदर नहीं आने देंगे। भले ही सरकार ने अनलॉक का फैसला लिया है, लेकिन अब तक बीमारी गई नहीं है, बल्कि अब तो और बढ़ रही है। इसी के चलते यहां लोग लॉकडाउन जैसा ही जीवन जी रहे हैं।

अपने रिश्तेदारों के यहां जाना भी बंद कर दिया

अपने रिश्तेदारों के यहां जाना भी बंद कर दिया

गांववालों ने खुद ही अपने रिश्तेदारों को यहां आने के लिए मना किया है और न ही गांव के लोग कहीं जाते हैं। एक अन्य बुजुर्ग ने कहा कि, कई देशों की सरकारों के हजारों प्रयासों के बावजूद कोरोना पर काबू नहीं पाया जा सका। ऐसे में हमारे देश में अनलॉक होने के बावजूद हम लोग सख्त लॉकडाउन का पालन करते हैं और इसी वजह से आज तक कोरोना यहां से दूर है।

दो-तीन लोग ही शहर से सामान लाते हैं

दो-तीन लोग ही शहर से सामान लाते हैं

खास बात यह है कि, गांव वालों पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है और न ही कोई नियम थोपा गया है। यहां के लोग खुद ही नियमों का अमल कर रहे हैं। जरूरी काम हो तो गांव के ही दो-तीन लोग शहर भेजे जाते हैं और वे सभी का काम करते हैं। वे गांव से जाते और आते समय पूरी सेफ्टी का ध्यान रखते हैं।

15 लोग ही अंत्येष्टि में शामिल होते हैं

गांव में किसी का निधन होता है तो श्मशान में भी सिर्फ 15 लोगों के ही जाने की अनुमति है। यहां भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि, गांववालों ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है कि बच्चे पूरी सुरक्षा के साथ पढ़ाई भी कर सकें।

बच्चे भी स्कूल नहीं जा रहे

बच्चे भी स्कूल नहीं जा रहे

स्कूल में बच्चों के आने पर प्रतिबंध है, लेकिन जिन बच्चों के पास मोबाइल की व्यवस्था नहीं, उनके लिए स्कूल में ही समयानुसार मोबाइल की व्यवस्था कर दी जाती है और जितना हो सके पढ़ाई में कोई विक्षेप न पड़े इसका खास ध्यान रखा जा रहा है।

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