शेर की तिकड़ी आती थी गांवों में दुधारू पशुओं को खाने, महीनेभर बाद लोगों को यूं मिली तसल्ली
राजकोट। गुजरात में राजकोट जिले के गांवों में बीते करीब 1 महीने से दहशत का कारण बने कुछ शेर अब कोटडासांगाणी क्षेत्र में पहुंच गए हैं। जहां उन्होंने अरडोई गांव की सीमा में बुधवार तड़के एक डेढ़ साल के बछड़े का शिकार किया। वहां के निवासी बहादुरभाई ने बताया कि, शेरों की तिकड़ी मेरे खेत में दिखी। उन्होंने बछड़े को अपना निवाला बनाया। तब बहादुरभाई अरडोई स्थित पेपर मिल के पास कपास की रखवाली के लिए अपने खेत में सोए हुए थे। बछड़े की आह सुनकर वह उसी दिशा में दौड़े थे, फिर उन्हें शेरों के चले आने का पता चला।
Recommended Video

बता दिया जाए कि, शेरों को कोटडासांगाणी के राजपरा एवं अन्य गांवों में लंबे समय से पशुओं का शिकार करते देखा जा रहा था। इन्हें सड़कों पर वाहन चालकों ने भी देखा। लोगों का कहना है कि, अरडोई पुल के ऊपर तीन शेर तड़के पांच बजे मौजूद थे। ऐसे में इसी क्षेत्र की ओर जाने वाले वाहन चालकों को सचेत किया गया है। साथ ही किसानों व पशुपालकों में शेरों की मौजूदगी से भय व्याप्त है। गुजरात में अरडोई से एक किलोमीटर के दायरे में भी तीनों शेरों के घूमने की जानकारी मिली है। लोगों द्वारा यहां वन विभाग से शेरों को दूसरी जगह पहुंचाने का अनुरोध किया गया है।

बताया गया है कि, वन विभाग की टीम काफी समय से ऐसे शेरों के झुंड खोज भी रही है, जो कि दुधारू पशुओं का शिकार कर चुके हैं। संवाददाता ने बताया कि, जैतपुर तहसील के अरब टिम्बडी गांव में 10 से ज्यादा शेर देखे जा चुके हैं जिन्होंने वहां के गौशालाओं की 8 गायों को अपना शिकार बनाया।

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने कहा कि, लोगों को जागृत किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को शेर-तेंदुए के हमलों से बचने एवं उनसे सामना होने की स्थिति में क्या क्या जाए, ऐसी बातें बताई जा रही हैं। इसके लिए हम लोग रात्रि सभा कर रहे हैं। साथ ही एक पत्रिका भी लोगों को दे रहे है, "शेर से अपना बचाव कैसे करें और शेर को परेशान कर रहे लोगों पर क्या कार्यवाही होगी" ऐसी जानकारी उसमें हैं।
अधिकारी ने कहा- ''अभी हमें शेरों की तिकड़ी के बारे में गांववालों से पता चला, कि तीन शेर कई पशुओं को मारकर खा चुके हैं। शेरों की तिकड़ी को अब खोजा जा रहा है।"












Click it and Unblock the Notifications