गुजरात में दलित युवक को घर से बाहर खींचा और परिजनों के सामने ही कुल्हाड़ी से काट डाला

राजकोट। गुजरात में सुरेन्द्रनगर स्थित थानगढ़ क्षेत्र में 12 जून की देर रात एक दलित युवक की परिजनों के सामने ही हत्या कर दी गई। तीन लोगों ने उसे उसके घर से बाहर खींचा और फिर पीटते हुए कुल्हा​ड़ी मारीं। फिर, उसे अधमरा छोड़ गए। हॉस्पिटल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने अब दो लोगों को अरेस्ट किया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब वे अपने घर में थे, तभी बाहर से तीन लोग आए और गाली-गलौज करने लगे। फिर उन्होंने युवक को कुल्हाड़ी मारी और फायरिंग कर भाग निकले।

घर में बैठा था, तभी अचानक 3 लोग वहां आए और काट डाला

घर में बैठा था, तभी अचानक 3 लोग वहां आए और काट डाला

संवादाता के अुनसार, मृतक दलित युवक की पहचान प्रकाश कांतिभाई के तौर पर हुई है। जबकि, बाकी जख्मी दो लोगों का इलाज चल रहा है। मृतक के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मृतक के चाचा बाबूभाई परमार ने शिकायत दर्ज कराई कि प्रकाश अपने परिवार के साथ घर में बैठा था। तभी अचानक 3 लोग वहां आए और गंदी गालियां देनी शुरू कर दीं। बाद में मेरे भतीजे के बारे में पूछने लगे। उन्होंने सभी को घर से बाहर खींच कर लिया। फिर, मेरे घर का पता पूछने लगे और मेरे घर का पता नहीं देने के कारण उन्होंने प्रकाश को कुल्हाड़ी मार दी। फिर, फायरिंग कर फरार हो गए। उन्होंने कहा कि, आमतौर पर वह प्रकाश के घर जाकर बैठते हैं, लेकिन उस दिन बाहर से आकर थका होने की वजह से वहां नहीं गया था।

एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया

एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया

इस मामले में पुलिस का कहना है कि मृतक प्रकाश थानगढ़ में सिरामिक फैक्टरी में मज़दूरी करता था। उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। प्रकाश की मौत के बाद दलित समुदाय ने पुलिस स्टेशन के सामने धरना प्रदर्शन कर शव लेने से इनकार कर दिया था। लेकिन बाद में उच्च अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद लाश को स्वीकार किया गया। पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और तीसरे को ढूंढने की कार्रवाई चल रही है। साथ ही पुलिस बल तैनात कर पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई गई है।

थानगढ़ में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है दलित समुदाय

थानगढ़ में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है दलित समुदाय

बता दे कि, पहले भी थानगढ़ में कथित पुलिस फ़ायरिंग में 2012 में तीन दलित लड़कों की मौत हुई थी। ताज़ा घटना के बाद दलित समाज ने प्रकाश के शव को लेने से मना कर दिया था जिससे इलाके में और तनाव बढ़ गया। उन्होंने धरना प्रदर्शन कर आरोपियों को पकड़ने की मांग की। हालांकि क़रीब पांच छह घंटे तक पुलिस के साथ चली बातचीत के बाद ही परिजन पीड़ित के शव लेने को तैयार हुए। बाबूभाई का कहना है कि वो लोग बार बार परेशान करते हैं। जिसके चलते सरकार द्वारा सुरक्षित जगह पर रहने की व्यवस्था करने की मांग उन्होंने की है।

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