उदयपुर राजपरिवार के सदस्य महेंद्र सिंह मेवाड़ का निधन, बेटा विधायक तो बहू सांसद, जानिए राजनीतिक विरासत
Rajasthan News: उदयपुर के प्रतिष्ठित राजघराने से जुड़े महेंद्र सिंह मेवाड़ का रविवार को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उदयपुर के अनंता अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। जहां वे पिछले दस दिनों से उपचाराधीन थे। मेवाड़ परिवार के करीबी सहयोगी कमलेंद्र सिंह पंवार ने उनके निधन की पुष्टि की है। महेंद्र सिंह मेवाड़ अपने पीछे एक समृद्ध राजनीतिक और शाही विरासत छोड़ गए हैं। वे अपने करियर में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों में सक्रिय रहे और संसद सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
महेंद्र सिंह मेवाड़ का राजनीतिक सफर
महेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर विविधतापूर्ण रहा। उन्होंने 1989 में भाजपा के टिकट पर चित्तौड़गढ़ से लोकसभा चुनाव जीता था। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की निर्मला कुमार को 3,97,056 वोटों के साथ हराया। हालांकि 1991 में एक आश्चर्यजनक कदम में उन्होंने कांग्रेस का समर्थन करते हुए पुनः उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा। लेकिन इस बार भाजपा के जसवंत सिंह जसोल से हार गए। 1996 में वे भीलवाड़ा से कांग्रेस के उम्मीदवार बने। लेकिन भाजपा के सुभाष चंद बहेड़िया के खिलाफ पराजित हुए। उनकी राजनीतिक यात्रा में लगातार जीत और हार का सिलसिला रहा। जिसने उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्ति बनाया।

बेटा नाथद्वारा से विधायक, बहू राजसमंद से सांसद
महेंद्र सिंह मेवाड़ की मृत्यु का प्रभाव उनके परिवार और स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य दोनों पर पड़ा है। उनके पुत्र विश्वराज सिंह और बहू महिमा कुमारी उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। विश्वराज सिंह भाजपा के नाथद्वारा से विधायक हैं। जबकि महिमा कुमारी राजसमंद से सांसद हैं। मेवाड़ के निधन के समय पूरा परिवार अस्पताल में उपस्थित था। जिससे मेवाड़ क्षेत्र में गम का माहौल बन गया।
मेवाड़ क्षेत्र में शोक की लहर
उनके निधन ने शाही परिवार और स्थानीय समुदाय दोनों के लिए एक युग का अंत कर दिया है। महेंद्र सिंह मेवाड़ का निधन न केवल एक शाही परिवार के सदस्य की हानि है। बल्कि भारतीय राजनीति के एक अनुभवी नेता का भी अंत है। जिनका योगदान राजस्थान और भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है।












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