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राजस्थान में स्लीप डिस्क और सर्वाइकल पैन का चुटकी भर मल्हम में इलाज,जानिए कैसे ?

Rajasthan Ground Report: राजस्थान में पिछले कुछ सालों में स्लीप डिस्क और स्पाइन कम्प्रेस के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिला है। हर कोई आदमी, महिला और युवा कमर दर्द , हाथ पैरों की झनझनाहट, सुन्नपन्न जैसी समस्याओं की पीड़ा से मायूस नजर आता है।

न्यूरो फिजिशियन, सर्जन डॉक्टर्स और फीजियो थैरेपी सेंटरों ऐसे मरीजों की भीड़ का हुजुम अक्सर देखा जाता है। हमारे आस-पास, घर में, परिवार में, पड़ोस में एक मरीज जरूर ऐसा होता है जो इस बीमारी के असहनीय दर्द से कराह रहा होता है।

डॉक्टर्स अक्सर इस गम्भीर बिमारी का एक ही ईलाज बताते है और वो है सिर्फ स्पाइन का ऑपरेशन, लेकिन क्या आप जानते है राजस्थान में एक युवा ऐसा है जो अपने बुजुर्ग चाचा के देशी जुगाड़ की दवा और व्यायाम मात्र भर से चंद पलों में इस गम्भीर बिमारी से मरीजों को राहत देता है।

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चलिए आज आपकों इस युवा से मिलाते है। आप भी हमारे साथ इस गम्भीर बिमारी के चुटकी भर मलहम के इलाज के सफर में शामिल हो जाइए।

दरअसल वन इंडिया की टीम जयपुर से करीब 30 किमी दूर जमवारामगढ़ के पास सायपुरा बस स्टैंड पर स्थित एक धर्मकांटे के पास चड़क भवन पहुंचे ।

पहले इस चड़क भवन के बारे में जान लिजिए। यह चड़क भवन इसलिए है कि यहां चोट, मोच, चणक, धरण, सायटिका, स्लिप डिस्क, गर्दन, हाथ, पैर, घुटने और नस का इलाज किया जाता है।

हमें यहां पर राकेश सैन मिले इनकी उम्र करीब 42 साल है और यह करीब 8 सालों से देश, प्रदेश और पड़ोसी राज्यों से आने वाले रोगियों का उपचार कर रहे है। जब राकेश सैन से हमारी टीम ने बातचीत तो उन्होने बताया कि उनके चाचा गोवर्धन सैन जिनकी उम्र अभी करीब 70 साल हो चुकी है वो पहले यह इलाज किया करते थे।

उनके साथ रहकर उन्होने भी यह देशी इलाज करना सीखा है। गोवर्धन सैन अब बुजुर्ग हो गए है तो वो घर पर ही रहते है यह यहां चड़क भवन बैठते है और आने वाले मरीजों का यहीं इलाज करते है।

हमारी टीम के जयपुर संवाददाता ने भी इस इलाज की पूरी प्रोसेस को फॉलो करने की कोशिश की और राकेश के साथ मिलकर अपने कमर दर्द की शिकायत का समाधान करवाया।

राकेश ने बड़े ही आसान तरीकों से व्यायाम करवा कर पहले कमर की चणक दूर की, फिर गर्दन और उसके बाद कंधों के दर्द का पलक झपकने के साथ की खत्म कर दिया।

इस दौरान हमारे संवाददाता ने चड़क भवन में मौजूद मरीजों और स्थानीय व्यक्तियों से भी बातचीत की तो टोंक जिले से इलाज करवाने पहुंची प्रियंका शर्मा ने बताया कि कुछ महीनों पहले उनकी सासु मां की भी गिरने से कमर में दर्द हो गया था। कई डॉक्टरों का दिखवाया लेकिन सबने ऑपररेशन ही बताया था।

लेकिन जब यहां लेकर पहुंचे तो उनका एक बार में ही उपचार हो गया और आज वो खुद अपने सारे काम कर रही है। अब पिछले 6 महीनों से वह खुद भी स्लीप डिस्क, स्पाइन कम्प्रेस और सरवायकल पैन से जूझ रही है। जिसका डॉक्टरों से ऑपरेशन ही बताया है। अंत में अब चड़क भवन पहुंचे है और यहीं से इलाज की उम्मीद है।

वहीं स्थानीय लोगों ने भी बताया कि यहां मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों से मरीज आते है। राजस्थान के भी दूर दराज से कई जिलों से मरीज आते है और उनकों बिमारी से आराम भी मिलता है।

वहीं राकेश से जब हमने पूछा कि इस बिमारी के इलाज के लिए रोगी को कितना खर्चा वहन करना पड़ता है तो उन्होने बताया कि मात्र 50 रूपए उनकी फीस और एक मल्हम है इसके साथ ही एक कपड़े की कमर बैल्ट भी है जिसकों मिलाकर पूरा खर्चा 500 रूपए से भी कम आता है।

मल्हम में दो प्रकार की दवाएं है जिन्हे बराबर मात्रा में मिलाकर दर्द वाली जगह पर हल्के हाथ से लगाना होता है फिर एक गीला कपड़ा लेकर उस जगह पर डाल देना होता है। थोड़ी देर में ही उस असहनीय दर्द में राहत में मिल जाती है।

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