राजस्‍थान उपचुनाव के नतीजे: क्‍या चंद्रग्रहण के अगले दिन वसुंधरा देख पाएंगी जीत का चांद

नई दिल्‍ली। राजस्‍थान की दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव का परिणाम गुरुवार यानी 1 फरवरी को आना है। राजस्‍थान की सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया की प्रतिष्‍ठा दांव पर लगी है। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रही वर्चस्‍व की लड़ाई पर भी राजनीतिक विश्‍लेषकों की नजर लगी है। उपचुनाव के नतीजों से ठीक एक दिन पहले लगे चंद्रग्रहण पड़ा। अब देखना रोचक होगा कि चंद्रग्रहण के अगले दिन आखिर जीत का चांद कौन देखेगा? वसुंधरा राजे या सचिन पायलट।

 इन 3 सीटों पर होंगे उपचुनाव, सबसे ज्‍यादा चर्चा में अजमेर

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बीजेपी नेता सांवरलाल जाट के निधन के बाद पिछले साल अगस्‍त में खाली हुई अजमेर सीट पर कांग्रेस के उम्‍मीदवार रघु शर्मा और बीजेपी के रामस्‍वरूप लांबा के बीच मुकाबला है। लांबा, सांवरलाल जाट के बेटे हैं और बीजेपी को उम्‍मीद है कि उन्‍हें पिता के निधन के बाद जनता की भरपूर सहानुभूति मिलेगी। इस सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। बीते 8 लोकसभा चुनावों में यहां पर 6 बार बीजेपी ने ही जीत दर्ज की है।

कांग्रेस में किसके भविष्‍य पर लगेगा ग्रहण

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अजमेर सीट पर उपचुनाव के ऐलान के बाद कांग्रेस में जब इस बात पर मंथन चल रहा था कि यहां से किसे टिकट दिया जाए, तब सबसे पहले सचिन पायलट के नाम की चर्चा हुई, जो इस समय कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष भी हैं। राजस्‍थान में होने वाले अगले विधानसभा चुनावों में वह मुख्‍यमंत्री पद के प्रत्‍याशी की रेस में अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट का भी नाम है। ऐसे में पायलट खेमा नहीं चाहता था कि वह इस समय कोई चुनाव लड़े, क्‍योंकि अगर वह हार गए तो विधानसभा चुनाव में सीएम कैंडिडेट के तौर पर प्रोजेक्‍ट किए जाने की उनकी संभावना कम हो जाती। ऐसे में उनके लिए सबसे सेफ गेम था कि अपने किसी भरोसेमंद को चुनाव लड़ाया जाए। उन्‍होंने रघु शर्मा को टिकट दिलाकर ऐसा ही किया। इसी बीच अशोक गहलोत और पायलट के बीच खुलेआम बयानबाजी की भी खूब चर्चा है।

 अलवर में कांग्रेस का पलड़ा मजबूत अजमेर

अलवर में कांग्रेस का पलड़ा मजबूत अजमेर

लोकसभा सीट जहां बीजेपी के दबदबे वाली रही है तो हीं, अलवर में कांग्रेस का पलड़ा मजबूत रहा है। अलवर जिले में 16 लाख से अधिक मतदाता हैं। इस लोकसभा सीट के तहत आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस लोकसभा सीट पर यादवों का दबदबा रहा है। यादवों के अलावा अलवर में मेव समाज के 2 लाख 60 हजार, एससी के करीब 3 लाख 30 हजार, जाट एक लाख 20 हजार, मीणा 1 लाख 15 हजार, ब्राह्मण 1 लाख, वैश्य 1 लाख, 85 हजार पुरुषार्थी, गुर्जर 70 हजार, राजपूत 45 हजार और 65 हजार माली वोटर हैं।

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