राजस्थान में गाय की दुर्दशा, 50 से ज्यादा मृत गायों के शव फैंके गए हाईवे पर,जिम्मेदार कौन ?
Rajasthan News: राजस्थान में गौमाता को लेकर अक्सर सरकारें और विपक्षी नेता सियासी रोटियां सेंकते रहे है। लेकिन आज इनकी दुर्दशा की ओर किसी का ध्यान तक नहीं जाता है।
मेवात से लेकर मारवाड़ तक गायों की जो तस्वीरें सामने आती है कभी तो बेहद विभत्स,डरावनी होती है और कभी साम्प्रदायिक झगड़ों तक में मामले तब्दील हो जाते है।
आज जो तस्वीरें आपकों दिखाने जा रहे है वो तस्वीरें आई है राजधानी जयपुर से महत 70 किमी दूर टोंक जिले के निवाई कस्बे की। जहां पर हाईवे किनारे 50 से ज्यादा गौवंशों के मृत शव पड़े हुए है।

मृत गौवंशों की तस्वीरें सामने आने के बाद ना तो सरकार से मोटी अनुदान ले रही गौशालाएं जिम्मेदारी ले रही है। ना ही गौभक्त अब अपना मूहं खोल रहे है।
वन इंडिया की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर पहुंच हालात देखे तो गौवंशों की तस्वीरे बेहद विभित्स थी। मृत गौवंशों के शव मलबे तक में तब्दील हो गए लेकिन मजाल किसी ने उनकी सुध तक नहीं ली है।
स्थानीय निवासी रामेश्वर चौधरी ने बताया कि यह हाईवे कोटा-जयपुर को जोड़ने वाला है । यहां से सरकार के कई मंत्री,विधायक हर रोज गुजरते है। लेकिन कभी किसा ने सुध नहीं ली है। अक्सर यहीं पर सड़क हादसों, बिमारियों से मरने वाली गायों के शवों को यहीं डाल दिया जाता है।
जब हमारी टीम ने पशुपालन विभाग के अधिकारी डॉक्टर शिवराज शर्मा से बात की तो उन्होने भी यह कह कर पल्ला झाड़ लिया की यह तो नगर पालिका और गौ सेवक करते है।
लेकिन जब सवाल यह पूछा गया कि क्या गौवंशों की अंतिम क्रिया की कोई वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं है तो इस सवाल पर वो बंगले झांकने लगे। जब दूसरा सवाल पूछा गया कि क्या पशुपालन विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
वहीं हाईवे किनारे ही स्थित एक गौशाला में जब हमने पहुंच मृत गौवंशों को लेकर सवाल किया तो गौशाला के संचालक अनिल भाई ने बताया कि हमारी गौशाला में जब भी गौ माता की मौत होती है तो उसका वैज्ञानिक तरीके अंतिम क्रिया की जाती है।
जानिए क्या है गौमाता की मृत देह की अंतिम क्रिया
करीब 6 फीट चौड़ा, 8 फीट लम्बा और तीन फीट गहर गड्डा खोदा जाता है। फिर तीन इंच गोबर का लेप किया जाता है। इसके साथ ही फिसा हुआ नमक डाल कर फिर उस पर मिट्टी डाल दी जाती है। यहीं अंतिम क्रिया है।
लेकिन गांव से लेकर शहर तक यह वैज्ञानिक ना तो कोई पशुपालक अपनाता है ना ही ग्राम पंचायत से लेकर नगर पालिकाएं, नगर निकाय इसकी पालना करती है।राजस्थान सहित देशभर में कमोबेश गाय को गौमाता तो हर कोई कह कर पुकारते है।
गांव की चौपाल से लेकर शहर के गलियारों और विधानसभा के साथ देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा तक कई बार सियासी पारा गाय को लेकर गर्म होता रहा है।












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