सुरेश भींचर है राजस्थान का 'प्रदीप मेहरा', सेना भर्ती के लिए सीकर से दिल्ली तक 50 घंटे में दौड़ा 300 KM
सीकर, 7 अप्रैल। मिलिए राजस्थान के 'प्रदीप मेहरा' से। फौजी बनने के लिए उत्तराखंड का प्रदीप मेहरा तो नोएडा की सड़कों पर दौड़ लगाता दिखा था और राजस्थान के इस 'प्रदीप मेहरा' यानी सुरेश भींचर ने सीकर से दिल्ली तक दौड़ लगा दी। 300 किलोमीटर का सफर महज 50 घंटे में पूरा कर लिया।

Suresh Bhichar नागौर जिले के गांव नालोता का रहने वाला
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में सुरेश भींचर ने भीषण गर्मी में सीकर से दिल्ली तक दौड़ लगाने की वजह शेयर की। साथ ही रास्ते में आने वाली दिक्कतों और रोचक वाक्यो के बारे में भी बताया। 23 वर्षीय सुरेश भींचर मूलरूप से राजस्थान के नागौर जिले के गांव नालोता का रहने वाला है। सीकर में रहकर फौज की तैयारी कर रहा है। 29 मार्च की शाम को सीकर जिला खेल स्टेडियम के पास से दिल्ली के लिए दौड़ शुरू की।

सेना भर्ती रैली जल्द निकालने और अधिकतम उम्र में छूट की मांग
सुरेश भींचर कहता है कि लंबे समय से सेना भर्ती रैली नहीं हो रही। इसकी वजह से फौजी बन सकने वाले युवा ओवरऐज हो रहे हैं। सेना भर्ती रैली जल्द निकालने और अधिकतम उम्र में छूट की मांग को लेकर सीकर से दिल्ली तक की दौड़ लगाई।

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल से सरकारी आवास पर मुलाकात
हाथ में तिरंगा और मन में गजब का उत्साह लेकर सुरेश भींचर सीकर से पलसाना, खंडेला, कोटपूतली, बहरोड, गुरुग्राम होते हुए दिल्ली पहुंचा। दिल्ली में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर अपनी मांग से अवगत करवाया। सांसद बेनीवाल ने सुरेश को यह मामला लोकसभा में उठाने का आश्वासन दिया।

1600 मीटर की दौड़ चार मिनट 40 सैकंड में पूरी
सुरेश भींचर ने बताया कि साल 2018 में हुई सेना भर्ती रैली में वह एक्सीलेंट रहा था। 1600 मीटर की दौड़ चार मिनट 40 सैकंड में पूरी कर दी थी, मगर मेडिकल में निकाल दिया गया। आठ भाई-बहनों में सुरेश सातवें नंबर का है। पिता की मौत हो चुकी है।

रोजाना करीब 60 किलोमीटर का सफर
सुरेश भींचर के साथ कार में दो साथी रामनिवास और सुरेंद्र भी चल रहे थे। वे उसकी आराम व स्वास्थ्य का ख्याल रख रहे थे। वहीं, रास्ते में आने वाले शहर कस्बे में सेना भर्ती की तैयारी करने वाले युवा सुरेश के स्वागत में खड़े नजर आए और खाने-पानी की भी व्यवस्था की।सुरेश ने बताया कि वह रोजाना करीब 60 किलोमीटर का सफर तय करता था। एक घंटे में पांच-छह किलोमीटर दौड़ लेता था। भीषण गर्मी की वजह से दौड़ते दौड़ते हालत खराब हो जाती थी, मगर बुलंद हौसलों के दम पर सफर पूरा किया।












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