Sumitra Singh: राजस्‍थान में 9 बार MLA बनीं किसान की बेटी सुमित्रा सिंह महिला आरक्षण बिल पर क्‍या बोलीं?

Sumitra Singh on Women's Reservation Bill: राजस्‍थान के झुंझुनूं जिले के गांव किसारी की रहने वाली सुमित्रा सिंह ने नौ बार साल 1957, 1962, 1967, 1972, 1977, 1985, 1990, 1998 और 2003 में विधानसभा चुनाव जीता था।

Sumitra Singh 9 Time MLA of Rajasthan: देश में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल) की सुर्खियों के बीच जानिए राजस्‍थान के किसान की उस बेटी के बारे में जो नौ बार विधायक चुनी गई। साल 2004 में राजस्‍थान की पहली महिला विधानसभा अध्‍यक्ष बनने का गौरव भी इन्‍हें मिला। नाम है सुमित्रा सिंह।

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में दिग्‍गज जाट नेता सुमित्रा सिंह ने राजस्‍थान के झुंझुनूं जिले के गांव किसारी में किसान व स्‍वतंत्रता सेनानी के घर जन्‍म व पड़ोस के गांव पातुसरी की बहू बनने से लेकर पिलानी और झुंझुनूं से नौ बार चुनकर राजस्‍थान विधानसभा में पहुंचने की पूरी कहानी बयां की। महिला आरक्षण बल पर भी अपनी बात रखी।

Sumitra Singh 9 time MLA in Rajasthan

गांव किसारी में जन्‍मीं सुमित्रा सिंह

गांव किसारी में 3 मई 1930 का जन्‍मीं सुमित्रा सिंह कहती हैं कि मेरे पिता स्वतंत्रता सेनानी चौधरी लादूराम ने अंग्रेजों के जमाने में भी पढ़ने-लिखने का भरपूर अवसर दिया। महज 6 साल की उम्र में मुझे पढ़ने के लिए झुंझूनूं से वनस्‍थली विद्यापीठ निवाई भेज दिया। वहां 14 साल तक पढ़ाई की। फिर महाराजा कॉलेज जयपुर से एमए की डिग्री पाई। साल 1952 में नाहर सिंह से शादी हुई। नाहर सिंह सरकारी नौकरी में थे। ससुर चौधरी हरदेव सिंह भी स्‍वतंत्रता सेनानी थे।

पहला चुनाव पिता-ससुर की वजह से जीती

सुमित्रा सिंह किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं हैं। इन्‍हें यह स्‍वीकार करने में कोई गुरेज नहीं है कि पहला चुनाव पिता-ससुर की वजह से जीती। सुमित्रा कहती हैं कि मैंने राजस्‍थान विधानसभा चुनाव 1957 से राजनीति में कदम रखा। पहली बार कांग्रेस की टिकट पर पिलानी विधानसभा सीट से भाग्‍य आजमाया। जीत मिली। यह जीत मुझे स्‍वतंत्रता सेनानी की बेटी व स्‍वतंत्रता सेनानी के बेटे की बहू होने की वजह से मिली थी।

1957 के बाद 2013 तक पीछे मुड़कर नहीं देखा

सुमित्रा सिंह ने साल 1957 में पहली बार और साल 2013 में आखिरी बार चुनाव लड़ा। लगभग छह दशक के अपने सियासी सफर में कुल तेरह बार चुनाव लड़े। नौ बार साल 1957, 1962, 1967, 1972, 1977, 1985, 1990, 1998, 2003 में चुनाव जीता। चार बार साल 1980, 1993, 2008 व 2013 में हार का सामना करना पड़ा। जबकि राजस्‍थान में अब तक हुए 15 विधानसभा चुनावों में से साल 1952 व 2018 का चुनाव सुमित्रा सिंह ने नहीं लड़ा।

आरक्षण की जरूरत महसूस नहीं हुई-सुमित्रा सिंह

सुमित्रा सिंह कहती हैं कि लोकसभा व विधानसभाओं में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्‍या बढ़ाने में महिला आरक्षण बिल कारगर साबित होगा। यह तो बहुत पहले ही लागू हो जाना चाहिए। हालांकि मुझे आरक्षण की जरूरत महसूस नहीं हुई थी, क्‍योंकि मैंने पहले चुनाव को छोड़कर बाकी चुनाव विकास कार्यों और जनता की समस्‍याओं के समाधान के दम पर जीते। विधायक रहते हुए मैं साल में एक बार पूरी विधानसभा क्षेत्र का दौरा करके जनता के हाल जरूर पूछा करती थी। फिर समस्‍या का समाधान भी करती।

राजस्‍थान में सबसे ज्‍यादा बार एलएलए बनने का रिकॉर्ड

सुमित्रा सिंह कहती हैं कि भले ही वो नौ बार विधायक चुनी गई हैं, मगर राजस्‍थान में सर्वाधिक बार विधायक बनने का रिकॉर्ड पूर्व सीएम भैंरोंसिंह शेखावत व हरदेव जोशी के नाम है। दोनों दस-दस बार विधायक बने थे। सुमित्रा सिंह नौ बार विधायक बनने वाली राजस्‍थान की पहली महिला जरूर हैं। परसराम मदेरणा भी नौ बार विधायक चुने गए थे।

सुमित्रा सिंह ने कब-कहां से जीता चुनाव

  • 1957 में पिलानी से कांग्रेस की टिकट पर
  • 1962 में झुंझुनूं से कांग्रेस की टिकट पर
  • 1967 में झुंझुनूं से कांग्रेस की टिकट पर
  • 1972 में झुंझुनूं से कांग्रेस की टिकट पर
  • 1977 में झुंझुनूं से कांग्रेस की टिकट पर
  • 1985 में पिलानी से लोक दल की टिकट पर
  • 1990 में पिलानी से लोक दल की टिकट पर
  • 1998 में झुंझुनूं से निर्दलीय के रूप में
  • 2003 में झुंझुनूं से भाजपा की टिकट पर

सुमित्रा सिंह ने कब-कहां से चुनाव हारा

  • 1980 झुंझुनूं से कांग्रेस की टिकट पर
  • 1993 झुंझुनूं से कांग्रेस की टिकट पर
  • 2008 मंडावा से भाजपा की टिकट पर
  • 2013 झुंझुनूं से निर्दलीय

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