अजबाराम चौधरी : सरपंच ने कुर्सी पर बैठाया नाकोड़ा भैरव, खुद 5 साल तक बैठेंगे जमीन पर, जानिए वजह

सिरोही। राजस्थान पंचायती राज चुनाव 2020 के तीनों चरण शांतिपूर्ण सम्पन्न हो चुके हैं। प्रदेश की लगभग सभी पंचायतों के सरपंच चुने जा चुके हैं। सिर्फ उन ग्राम पंचायतों में चुनाव होने शेष हैं, जिनका मामला कोर्ट में पहुंचा हुआ है। 29 जनवरी 2020 को हुए तीसरे चरण के मतदान के बाद अब ग्राम पंचायतों में नव निवार्चित सरपंचों के कार्यभार ग्रहण करने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इस बीच मिलिए राजस्थान के एक ऐसे सरपंच से जिन्होंने अपनी कुर्सी पर खुद बैठने की बजाय नाकोड़ा भैरव को बैठाया है। पूरे पांच साल तक भैरव ही सरपंच की कुर्सी पर बैठे रहेंगे और खुद निर्वाचित सरपंच जमीन पर बैठकर कामकाज निपटाएंगे।

सिरोही में है रेवदर ग्राम पंचायत

सिरोही में है रेवदर ग्राम पंचायत

जानकारी के अनुसार राजस्थान के सिरोही जिले में रेवदर ग्राम पंचायत से चुनाव 2020 में अजबाराम चौधरी को सरपंच चुना गया है। रेवदर तहसील व पंचायत समिति भी है। यहां छह हजार से ज्यादा मतदाता हैं। नवनिर्वाचित सरपंच अजबाराम जब ग्राम पंचायत भवन में सरपंच का कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे तो अपने फैसले से सबको चौंका दिया।

 हर किसी ने की सराहना

हर किसी ने की सराहना

रेवदर सरपंच अजबाराम चौधरी ने सरपंच की कुर्सी पर खुद बैठने की बजाय अपने ईष्ट देव नाकोड़ा भैरव की तस्वीर रखकर उसके फूल माला चढ़ाई। सरपंच का यह अजीब फैसला एक बारगी तो ग्रामीणों के माजरा समझ नहीं आया। फिर उन्होंने सरपंच की कुर्सी पर भैरव को बैठाने की वजह बताई तब हर किसी ने उनकी सोच की सराहना की।

 888 मतों से जीते रेवदर सरंपच अजबाराम चौधरी

888 मतों से जीते रेवदर सरंपच अजबाराम चौधरी

राजस्थान सरपंच 2020 में 888 मतों से जीते हैं। इन्होंने आनंद जोशी को हराया। रेवदर सरपंच अजबाराम चौधरी ने बताया कि 888 आंकड़ा आस्था से जुड़ा है। सरपंच की कुर्सी पर नाकोड़ा भैरव को बैठाया गया है, जो पांच साल तक इस कुर्सी पर विराजेंगे। कुछ लोग इसे अंधविश्वास बता रहे हैं। जबकि यह अंधविश्वास नहीं बल्कि गांव के लोगों की मंशा के मुताबिक यह फैसला लिया गया है।

 सरपंच ग्रामीणों के साथ एक जाजम पर बैठेंगे

सरपंच ग्रामीणों के साथ एक जाजम पर बैठेंगे

अजबाराम चौधरी बताते हैं कि वे सरपंच के रूप में खुद कुर्सी पर बैठने की बजाय वार्ड पंचों और ग्रामीणों के साथ जमीन पर दरी बिछाकर उस पर बैठेंगे ताकि ग्रामीणों और सरपंच में समानता का भाव हो और खुलकर गांव के विकास पर चर्चा कर सकें। सरपंच ने पहले कार्य भार ग्रहण करने के साथ ही जमीन पर बैठना शुरू कर दिया है।

 वार्ड पंच था तभी तय कर लिया था

वार्ड पंच था तभी तय कर लिया था

चौधरी बताते हैं कि वे सरपंच चुने जाने से पहले वार्ड 13 से पंच थे। पंच रहते अक्सर ग्राम पंचायत रेवदर की बैठकों में जाना होता था। तब महसूस किया है कि सरपंच कुर्सी पर बैठा रहता है और गांव के बुजुर्ग लोग उनके सामने कुर्सी पर बैठने से कतराते हैं और वे खड़े खड़े ही अपनी समस्याओं से अवगत करवाते हैं। उसी समय तय कर लिया था अगर मैं सरपंच बना तो ऐसा नहीं होगा। ग्रामीण और सरपंच सब एक ही जाजम पर बैठेंगे।

भैरव की आरती सुनिश्चित करने के निर्देश

भैरव की आरती सुनिश्चित करने के निर्देश

सरपंच चौधरी ने बताया कि उनकी नाकोड़ा भैरव में गहरी आस्था है। उनकी कुर्सी पर उन्हें ही बैठाया गया है। रोजाना उनकी आरती भी की जाएगी। किसी कारण मैं ग्राम पंचायत कार्यालय नहीं आ पाया तो उस स्थिति ग्राम विकास अधिकारी को काल भैरव की सुबह-शाम आरती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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