SIKAR : भीख मांगने वाले बच्चों के लिए भगवान से कम नहीं शैतान सिंह कविया, पेंशन के पैसों से पढ़ा रहे

शैतान सिंह कविया: भीख मांगने वाले बच्चों को बना रहे काबिल, रिटायरमेंट के बाद पेंशन इन्हीं पर कर रहे खर्च

नई दिल्ली। जो बच्चे दिन उगने के साथ ही भीख मांगने के लिए कटोरा उठा लेते थे। दिनभर मैले कुचले कपड़ों में रहते थे। शाम तक खूब कचरा भी एकत्रित कर लेते थे। वर्तमान में खुद का भविष्य खराब कर रहे थे। वो बच्चे अब काबिल बन रहे हैं। कटोरे की जगह कलम उठा रहे हैं। हाथ में कचरे के बोरे की बजाय किताबे हैं। बच्चे राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय के हैं और इनकी जिंदगी में 66 साल के शैतान सिंह कविया किसी भगवान से कम नहीं हैं।

15 बच्चों से शुरू हुआ करणी उच्च प्राथमिक विद्यालय

15 बच्चों से शुरू हुआ करणी उच्च प्राथमिक विद्यालय

वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत में सीकर के शैतान सिंह कविया ने बताया कि सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद कैसे ये झुग्गी झोपड़ी वाले गरीब बच्चों की जिंदगी संवार रहे हैं। महज 15 बच्चों से शुरू हुआ करणी उच्च प्राथमिक विद्यालय सीकर में बच्चों की संख्या कैसे 80 तक पहुंच गई।

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    शैतान सिंह कविया: भीख मांगने वाले बच्चों को बना रहे काबिल, पेंशन इन्हीं पर कर रहे खर्च
     कौन हैं शैतान सिंह कविया

    कौन हैं शैतान सिंह कविया

    शैतान सिंह कविया मूलरूप से सीकर जिला मुख्यालय नजदीक के गांव काशी का बास के रहने वाले हैं। वर्तमान में सीकर के शास्त्रीनगर में रहे हैं। कविया आरटीओ, शिक्षा विभाग, एसपी कार्यालय में सहायक लेखा अधिकारी के पद कार्यरत रहे हैं। 30 जून 2014 को ​आरटीओ कार्यालय से रिटायर हुए। पेंशन के रूप 35 हजार रुपए मिलते हैं। उसमें से हर माह 15 हजार रुपए खर्च कच्ची बस्ती के बच्चों को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाने में खर्च कर रहे हैं।

    रिटायरमेंट के अगले ही दिन नेक काम की शुरुआत

    रिटायरमेंट के अगले ही दिन नेक काम की शुरुआत

    शैतान सिंह कविया रिटायर होने के अगले ही दिन यानि 1 जुलाई 2014 को सीकर के हाउसिंग बोर्ड, शास्त्रीनगर और बीड़ आदि से लगती कच्ची बस्ती के बच्चों को पढ़ाने की ठानी। कच्ची बस्तियों में गए और बच्चों से मिले। उनके माता-पिता को इस बात के लिए राजी किया कि वे अपने बच्चों से भीख मंगवाने, कचरा एकत्रित करवाने की बजाय उन्हें शिक्षा से जोड़ें। इसके लिए कविया ने उन्हीं झुग्गी झोपड़ियों में जाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया।

    बच्चों को पढ़ाने में गृहणियां भी आईं आगे

    बच्चों को पढ़ाने में गृहणियां भी आईं आगे

    कविया ने झुग्गी-झोपड़ियों में तीन अलग-अलग जगह बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। देखते ही देखते 30 से 40 बच्चे कलम उठाने को तैयार हो गए। तीन जगह अकेले कविया द्वारा पढ़ा पाना मुश्किल हो रहा था तो आस-पास की पढ़ी-लिखी गृहणियों की मदद लेनी शुरू की। सीकर की सुलोचना कुमावत, सीमा शर्मा और पूजा गिवारिया बच्चों को पढ़ाने को तैयार हुईं।

    हर माह तीन हजार रुपए की पगार

    हर माह तीन हजार रुपए की पगार

    इनको शैतान सिंह कविया अपनी पेंशन में से हर माह तीन हजार रुपए बतौर पारिश्रमिक दे रहे हैं। इन महिलाओं के अलावा खुद कविया के बेटे की बहू मंजू कविया ने झुग्गी-झोपड़ियों वाले विद्यार्थियों में से छात्राओं को निशुल्क सिलाई देना शुरू किया।

    क्या है करणी उच्च प्राथमिक विद्यालय सीकर

    क्या है करणी उच्च प्राथमिक विद्यालय सीकर

    झुग्गी-झोपड़ी में वाली तीन जगह संचालित अस्थायी पाठशाला में बच्चों की संख्या दिनोंदिन बढ़ने पर पास ही स्थित जलदाय विभाग के मैदान में टीन शेड डलवा कर अस्थायी स्कूल खोल दिया। स्कूल का नाम ​कविया ने अपनी कुलदेवी देशनोक की करणी माता के नाम पर करणी उच्च प्राथमिक विद्यालय रखा, जो आठवीं तक संचालित हो रहा है।

    सीकर के एसके स्कूल में नामांकन

    सीकर के एसके स्कूल में नामांकन

    यहां कक्षा 8 में 17, कक्षा 6 में 12, कक्षा 5 में 8 और शेष बच्चे कक्षा एक से चार में अध्ययनरत हैं। खास बात यह है कि पांचवीं के बाद से इन बच्चों का नामांकन सीकर के एसके स्कूल में करवाया गया है। करण उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ पढ़ाई करवाई जाती है। टेस्ट, प्री बोर्ड और वार्षिक परीक्षाएं दिलवाने के लिए इन्हें एसके स्कूल में ले जाया जाता है।

    यहां से पढ़कर नर्सिंग तक पहुंची छात्रा

    यहां से पढ़कर नर्सिंग तक पहुंची छात्रा

    कविया को इस बात की खुशी है कि उनके प्रयास रंग ला रहे हैं। बकौल कविया, 'नीतू माली ने 12वीं पास कर ली। वर्तमान में कम्प्यूटर साइंस में आइटीआइ कर रही है। यहां का विक्रम भी आइटीआइ में दाखिला ले चुका है। एक अन्य छात्रा नर्सिंग कर चुकी है। वहीं, एक विद्यार्थी पुलिस की तैयारी कर रहा है।

    सीए एसोसिएशन कर रहा मदद

    सीए एसोसिएशन कर रहा मदद

    सीकर जिला मुख्यालय पर संचालित करणी उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाने और उनका शिक्षा के प्रति​ जुड़ाव बनाए रखने के लिए सीकर सीए एसोसिएशन भी आगे आया। सीए एसोसिएशन द्वारा पिछले चार साल से इन बच्चों के लिए पोशाक, किताबें व अन्य शिक्षण सामग्री की व्यवस्था की जा रही है। इनके अलावा शहर के अन्य लोग भी मददगार बन रहे हैं। मनसुख रणवां स्मृति संस्थान व जेएमबी सेंटर सरीखे संस्थानों की ओर से भी यहां की छात्राओं को सिलाई का निशुल्क शिक्षण दिया जाता है।

    पीएम मोदी की मन की बात में जिक्र

    सीकर के रिटायर्ड एएओ शैतान सिंह के प्रयासों का नतीजा यह रहा कि करणी उच्च प्राथमिक विद्यालय के जरिए सिलाई सीख रही छात्राओं का जिक्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में भी किया। मन की बात में सीकर की इन बेटियों की प्रशंसा में पीएम मोदी ने 27 मई 2018 को ट्वीट करके लिखा भी कि मैं टीवी पर एक कहानी देख रहा था। राजस्थान के सीकर की कच्ची बस्तियों की हमारी ग़रीब बेटियों की। हमारी ये बेटियाँ, जो कभी कचरा बीनने से लेकर घर-घर माँगने को मजबूर थीं। आज वे सिलाई का काम सीख कर ग़रीबों का तन ढकने के लिए कपड़े सिल रही हैं।

    शैतान सिंह कविया का परिवार

    शैतान सिंह कविया का परिवार

    सीकर के शैतान सिंह कविया के दो बेटे और तीन बेटी हैं। बड़ा बेटा करणी सिंह कविया एम्स दिल्ली में कपांडर है। वर्तमान में अवकाश लेकर एमएससी कर रहा है। छोटा बेटा किशन सिंह पंचायत समिति मौलासर में लिपिक है। बेटी पुष्पा कविया गांव गौरिया और दूसरी बेटी धीजपुरा के सरकारी स्कूल में शिक्षिका है। बड़ी बेटी ललिता सर्विस में नहीं हैं। शैतान सिंह की पत्नी सुप्यार कंवर गृहणी हैं। कच्ची बस्ती की बेटियों को सिलाई का प्रशिक्षण किशन सिंह की पत्नी मंजू दे रही हैं।

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