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कौन हैं ये पूर्व सरपंच मां जो बेटे से मिलने के लिए दो माह तक मुम्बई की सड़कों पर भटकती रहीं

पाली, 9 जुलाई। राजस्थान की एक पूर्व सरपंच महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह मां अपने बेटे से मिलने के लिए मुम्बई की सड़कों पर दो माह तक भटकती रहीं। हुआ यूं कि लॉकडाउन के दौरान राजस्थान के पाली जिले के गांव वोपारी की पूर्व सरपंच महिला बेटे की याद में इतनी डिप्रेशन में आ गई कि बिना बताए घर से बेटे से मिलने के लिए ट्रेन में बैठकर मुम्बई पहुंच गई।

Saraswati Devi, former sarpanch

मानसिक हालत खराब होने से यह भूल गई कि बेटा मुम्बई में कहां रहता है। उसके पास मोबाइल भी नहीं था। ऐसे में करीब वह दो माह तक मुम्बई में जुहू इलाके में घूमती रही। जो मिलता खा लेती। एक युवक ने महिला का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिसमें उन्होंने खुद का नाम व पाली जिले के वोपारी गांव का एड्रेस बताया।

वायरल वीडियो उनके बेटे तक पहुंचा तो वे तुरंत मां को पहचान गए और उनको लेने के लिए मुम्बई के जुहू इलाके पहुंचे। वहां से लावारिस घूमती मां को अपने साथ घर ले गए। पूरा मामला यह है कि पाली जिले में मारवाड़ जंक्शन के पास वोपारी गांव में 60 वर्षीय सरस्वती देवी अपने पति सज्जनसिंह राजपुरोहित के साथ रहती हैं। इनका एक बेटा विजय सिंह कामकाज के सिलसिले में मुम्बई के अंधेरी इलाके में रहता है दूसरा बेटा भूपेन्द्र सिंह एयरफोर्स में है

कांग्रेस नेता जब्बर सिंह राजपुरोहित ने बताया कि सरस्वती देवी राजपुरोहित वर्ष 1996-97 में वोपारी की सरपंच रह चुकी हैं। कांग्रेस पार्टी में भी काफी सक्रिय रही हैं। गांव में उनका अच्छा खासा दबदबा हैं। किस्मत का पहिया ऐसा पलटा की तर्ज तरार्ट सरस्वती देवी लॉकडाउन में बेटों की याद में डिप्रेशन का शिकार हो गई। उनकी मानसिक हालत बिगड़ गई। बेटे की याद में वे करीब दो माह पहले अपने बूढ़े पति को बिना बताए मारवाड़ जंक्शन से ट्रेन में बैठकर मुम्बई उतर गई। लेकिन बेटा मुम्बई में कहां रहता है। उसका नाम, मोबाइल नम्बर कुछ याद नहीं रहने के कारण मुम्बई के जुहू क्षेत्र में करीब दो माह तक बेसहारा की तरह भटकती रही।

इधर विजयसिंह के मां के यूं गायब होने की जानकारी मिली तो उन्होंने अपने स्तर पर मुम्बई में उन्हें खूब ढूंढा। पुलिस थाने में रिपोर्ट भी दी लेकिन मां के बारे में कुछ पता नहीं चला। दो माह तक करीब एक ही ड्रेस में पूर्व सरपंच सरस्वती देवी जुहू में बेसहारा की तरह भटकती रही। जो कुछ खाने को मिलता उससे गुजरा कर लेती। रात सड़क किनारे जहां जगह मिली वही सो लेती। जुहू में नाश्ते- मिठाई की दुकान चलाने वाली रानी के नेमाराम चौधरी उन्हें अपनी दुकान से रोज निशुल्क खाना देते थे।

मारवाड़ी ड्रेस पहनी देख उन्होंने एक दिन उनका वीडियो बना लिया। जिसमें सरस्वती देवी ने बताया कि वह रडावास की है। गांव वोपारी में रहती हैं। जब नेमाराम ने कहा कि भूख लगे तो दोपहर को भी नाश्ता लेने आ जाना तो उन्होंने कहा कि आपका धंधा हैं रोज आऊ अच्छा छोड़े लगता हैं। यह वीडियो नेमाराम ने एक ऑडियो मैसेज के साथ सोशल मीडिया पर वायरल किया। जिसमें कहा गया कि यह महिला वोपारी गांव की है, जो भी इनको जानते हैं प्लीज इनके घरवालों को जानकारी दे जिससे यह अपने परिवार से फिर से मिल सके।

उनका यह वीडियो अंधेरी में रह रहे सरस्वती देवी के बेटे विजयसिंह के पास भी पहुंचा तो वे तुरंत अपनी मां को लेने जुहू गए। उनकी हालत देख उनकी आंखों में आंसू आ गए। मां को गले लगाया तथा दिल से नेमाराम का धन्यवाद देकर मां को हंसी-खुशी घर ले गए। घर जाते हैं पहले उन्हें डॉक्टर को दिखाया।

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