Sadabahar Mango: राजस्थान के किसान ने 'सदाबहार आमों' से कमाए 5 करोड़ रुपए, पाक से भी आई डिमांड
Sadabahar Mango Rajasthan: लीक से हटकर काम करने वाले किसानों के अक्सर कमाई छप्परफाड़ होती है। इस बात का एक उदाहरण राजस्थान के कोटा जिले के गांव गिरधरपुरा निवासी किसान श्रीकिशन सुमन हैं।
कोटा के प्रगतिशील किसानों की सूची में शामिल किसान श्रीकिशन सुमन ने आम की ऐसी नई किस्म तैयार की, जो 12 महीने फल देती है। आमों की इस नई किस्म का नाम 'सदाबहार आम' है। पाकिस्तान से इसकी खूब डिमांड आ रही है।

मीडिया से बातचीत में श्रीकिशन सुमन कहते हैं कि वे 11वीं तक पढ़े-लिखे हैं, मगर खेती और बागवानी पर अच्छी पकड़ रखते हैं। पढ़ाई छोड़ने के बाद साल 1993 में अपनी 1 बीघा जमीन में खेती शुरू की। शुरुआत में परम्परागत खेती करते थे। सब्जियों और फूलों में भी हाथ आजमाते, मगर खराब मौसम और सीजन के अलावा भाव नहीं मिलने के कारण होने वाले नुकसान से परेशान थे।
साल 1998 में आम की नई किस्म तैयार करने की दिशाम में काम शुरू किया। एक बीघा जमीन पर परम्परागत खेती छोड़कर अलग-अलग किस्मों के आम के पौधे लगाए। ग्राइंडिंग की। मतलब एक पौधे के अलग-अलग हिस्से किए। इस दौरान एक पौधे में सात रंग के फूल आ गए। 8 साल तक वे आम के पौधों पर विशषे काम करते रहे ताकि एक नई किस्म तैयार की जा सके।
साल 2005 में आम की नई किस्म का पौधा तैयार हुआ, जिसे सदाबहार आम नाम दिया गया। नई किस्म का पौधा तैयार करने के बाद बतौर टेस्ट के लिए उदयपुर और लखनऊ भेजे। साल 2010 में लखनऊ रिसर्च सेंटर से कृषि वैज्ञानिक कोटा आए। यहां रिसर्च में पता चला कि सामान्य आम के पौधे पर 2 साल में एक बार फल लगता है लेकिन, इस नई किस्म के पौधे के साल में 3 बार फल लगते हैं। इसलिए इसका नाम 'सदाबहार आम' रखा।
बता दें कि साल 2017 में राष्ट्रपति भवन में आमों की प्रदर्शनी लगी थी, जिसमें सदाबहार आम की किस्म देखकर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी काफी प्रभावित हुए थे। फिर सदाबहार आम के चार पौधे राष्ट्रपति भवन परिसर के बगीचे में लगाए गए। बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किसान श्रीकिशन को आम की नई किस्म तैयार करने के लिए सम्मानित भी किया।
श्रीकिशन सुमन कहतेू हैं कि साल 2017 में 3 बीघा जमीन खरीदी और मदर प्लांट लगाकर सदाबहार आम के पौधे तैयार किए। पिछले पांच साल में सदाबहार आम बेचकर पांच करोड़ रुपए कमाए हैं। देशभर ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड थाईलैंड, अफ्रीका में इनकी डिमांड आ रही है। इन देशों में सदाबहार आम के पौधे भी भेजे गए हैं।












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