Sachin Pilot: पर्सनल लाइफ हो या राजनीतिक करियर, सचिन पायलट के लिए कुछ भी आसान नहीं रहा
Sachin Pilot:सचिन पायलट ने राजस्थान चुनव से पहले आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने अशोक गहलोत के खिलाफ सड़कों पर उतरकर 'संघर्ष पदयात्रा' करने का ऐलान किया है।

राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में पिछले तीन साल से चल रही अंदरुनी कलह अब खुलकर सामने आ चुकी है। अब राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोग गहलोत के साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने आर-पार की लड़ाई करने का ऐलान कर दिया है। यानी राजस्थान में चुनाव से ठीक पहले सचिन पायलट ने शह मात के खेल शुरू कर दिया है। सचिन पायलट ने सड़क पर उतरकर अपनी लड़ाई 'संघर्ष पदयात्रा' के जरिए खुलकर करने का ऐलान कर दिया है।

सचिन पायलट ने जुलाई 2020 में ऐसे ही बगावती तेवर दिखाते हुए अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोला था लेकिन कांग्रेस पार्टी खातिर वो पीछे हट गए थे लेकिन मंगलवार को सचिन पायलट ने खुद कहा कि अब 'मैं ना उम्मीद हो चुका हूं, कई बार शिकायत और संघर्ष के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई'। इसके साथ ही उन्होंने कहा अब 'मैं नाउम्मीद हूं। जनता ही भगवान है'।
सचिन पायलट को कुछ भी आसानी से नहीं मिला
सचिन पायलट जो कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं जो अपनी पायलट बनना चाहते थे लेकिन महज 25 साल की उम्र में पिता का साया छिन जाने के बाद उनकी राजनीतिक गद्दी संभालने के लिए राजनीति में कदम रखा उनकी पर्सनल लाइफ हो या राजनीति से जुड़ा करियर हो उन्हें कुछ भी आसानी से नहीं मिला उन्होंने उसके लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा। आइए एक नजर डालते हैं सचिन पायलट के पिछले जीवन पर...
पिता की मौत के बाद राजनीति में की एंट्री
सचिन के पिता राजेश पायलट का परिवार राजस्थान के बड़े लोगों में शुमार था। दूध बेचने के बाद वो पायलट बने और फिर इंदिरा गांधी की बदौलत राजनीति में एंट्री की थी और कैबिनेट मंत्री तक बने थे। सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट का असली नाम राजेश्वर बिधूड़ी था। जब सचिन पायलट महज 22 साल के थे तभी उनके पिता राजेश पायलट की जयपुर में एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई। जिसके बाद सचिन पायलट ने रानजीति में प्रवेश किया।
अपने पिता की तरह एयरफोर्स पायलट बनने की इच्छा रखने वाले सचिन पायलट ने राजनीति में आने से पहले एक अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स भी काम किया था। इसके अलावा दिल्ली के एक मीडिया हाउस में इंटर्न भी काम किया था।
सचिन पायलट की पढ़ाई
सचिन पायलट ने शुरूआती पढ़ाई दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल में की। दिल्ली विवि के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद सचिन अमेरिका चले गए थे और वहां की पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सटी के व्हॉर्टन स्कूल से एमबीए किया था।
सचिन पायलट को शादी के समय भी सहनी पड़ी तल्खी
सचिन पायलट जब अमेरिका के पेंसिलवानिया विवि में पढ़ रहे थे वहीं उनकी मुलाकात जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अबदुल्ला की बहन और फारुक अब्दुल्ला की बेटी सारा से हुई। कुछ ही समय में ये दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे लेकिन सचिन पायलट का परिवार तो राजी हो गया था लेकिन सारा के परिवार वाले नहीं मान रहे थे। जिसके बाद अब्दुल्ला परिवार की रजामंदी के बिना दोनों जनवरी 2004 में शादी कर ली।
महज 26 साल उम्र में सचिन पायलट बने सबसे कम उम्र के संसद
महज 26 साल की उम्र में सचिन पायलट ने दौसा से अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़े और सबसे कम उम्र का सांसद बनने का रिकार्ड बनाया। इसके बाद अब्दुल्ला परिवार ने नाराजगी छोड़कर उन्हें अपना दामाद मान लिया।
राजनेता बनकर बनाया ये रिकार्ड
2012 मे जब सचिन पायलट सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री थे तब उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में कमीशन भी मिला था । सचिन ऐसे राजनेता थे जो सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रादेशिक सेना में शामिल हुए थे। महज 9 महीने में ही पायलट का कैप्टन पोस्ट पर प्रमोशन मिला था।
सचिन पायलट का राजनीतिक करियर
- 10 फरवरी 2002 में सचिन पायलट अपने पिता के जन्मदिन पर कांग्रेस में शामिल हुए थे
- 2006 में नागरिक उड्यन मंत्रालय में सलाहकार समिति के सदस्य बनाए गए।
- 2004 में 26 साल की उम्र में सांसद बने और लोकसभा की स्थायी समिति के सदस्य नियुक्त किए गए।
- 2012 में कांग्रेस सरकार में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया।
- 2014 में लोकसभा चुनाव में हारने का स्वाद चखने के बाद सचिन का तेवर और आक्रामक हो गया।
- 2014 में कांग्रेस पार्टी के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए।
- 2018 में राजस्थान में 5 लाख किमी की यात्रा कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम किया।
2018 में सचिन पायलट को सीएम के बजाय बनाया गया डिप्टी सीएम
2018 के चुनाव में सचिन पायलट ही सीएम का चेहरा थे माने जा रहे थे लेकिन कांग्रेस को 200 में 100 सीटें मिली उसमें सचिन पायलट के करीबियों को जीत नहीं मिली तो पासा पलट गया। चूंकि अशोक गहलोत ने 13 निर्दलीय और राष्ट्रीय लोकदल के विधायक को अपने साथ मिलाने में कामयाब हो गए तब सरकार बनी तो पायलट की जगह अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर और सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाकर बनाया गया।
डिप्टी सीएम बनकर भी गहलोत सरकार में साइड लाइन रहे पायलट
उपमुख्यमंत्री बनने के बाद से ही सचिन पायलट के साथ सीएम अशोक गहलोत का रवैय्या तल्ख रहा है। यहां तक की डिप्टी सीएम बनने के बाद पहले ही दिन विधानसभा को रोक दिया। इसके बाद से लगातार गहलोत पायलट के राह में रोड़े अटकाते रहे। इसके बाद कोटा में हुई बच्चों की मौत पर पायलट ने गहलोत सरकार को घेरा था।
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बगावत करने के बाद डिप्टी सीएम की छीन ली गई कुर्सी
ये टकराव इतना बढ़ गया कि जुलाई 2020 में सचिन पायलट ने बगावत कर दी और विधायकों को लेकर हरियाणा के मानेसर में चले गए उस समय गहलोत अपनी सरकार और कुर्सी बचाने में कामयाब हो गए लेकिन सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा दिया गया। डिप्टी सीएम की कुर्सी जाने के बाद से बतौर विधायक सचिन पायलट को साइन लाइन होकर काम करना पड़ रहा। वहीं अब जब कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं तो इससे पहले उन्होंने अपनी गहलोत के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर कांग्रेस के अंदर जंग ए ऐलान कर दिया है।












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