राजेश कुमार सुथार : मिलिए राजस्थान के उस दूधिए से जो बन गया 'पैडमैन', घर-घर जाकर बांटे 12 हजार सेनेटरी पैड
हनुमानगढ़, 26 अप्रैल। 'पैडमैन' शब्द नाम सुनते ही जेहन में फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार का नाम आता होगा। उन्होंने रील लाइफ में पैडमैन की भूमिका निभाई, मगर आज मिलिए राजस्थान के रियल लाइफ पैडमैन से। नाम है राजेश कुमार सुथार। ये एक दूधिया होने के साथ-साथ पैडमैन भी हैं, जो घर-घर जाकर महिलाओं व युवतियों को फ्री में सेनेटरी पैड मुहैया करवाते हैं।

कौन हैं राजेश कुमार सुथार?
बता दें कि राजेश कुमार सुथार राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की संगरिया तहसील के गांव नाथवाना के रहने वाले हैं। यहां के लालचंद सुथार के घर 15 फरवरी 1989 को जन्मे राजेश कुमार 'पैडमैन' के रूप में पहचाने जाते हैं। राजेश इस समय कोरोना महामारी के दौर में इन दिनों मरीजों को बेड, ऑक्सीजन, आईसीयू, वेन्टीलेटर वाला बेड, दवाई, इजेक्शन, प्लाज़्मा व एंबुलेंस तक उपलब्ध करवाने की कोशिश कर रहे हैं।

दूधिया कैसे बना पैडमैन?
राजेश कुमार सुथार बताते हैं कि पिछले साल कोरोना के कारण देश में लॉकडाउन लगने से पहले एक बार वह अपने गांव से दूध इकट्ठा करके उसको बेचने के लिए निकले थे। रास्ते में एक स्कूल के गेट के पास दो बच्चियां बैठी हुई थी। उनमें से एक बच्ची अपने पेट को पकड़ कर रो रही थी। यह देखकर वो वहां पर उनसे उनकी समस्या पूछने के लिए रुक गए तो दूसरी बच्ची उनसे बोली घर तक छोड़ दो भैया।

बाइक पर दूध के साथ सेनेटरी पैड
इसके हालत बहुत खराब हैं फिर मैं दूसरी लड़की के बोलने पर और पहली बच्ची के खून से लथपथ कपड़े देखकर समझ गया कि इसकी समस्या का कारण मासिक धर्म है। मैने समस्या समझने के बाद उनकी हर संभव मदद की, इस घटना ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था। उस घटना ने दूधिए राजेश को पैडमैन बना दिया। अब राजेश की बाइक पर दूध के ड्रम के साथ साथ सेनेटरी पैड के पैकेट भी नजर आते हैं।

ऐसे जुटाया आर्थिक सहयोग
राजेश सुथार कहते हैं कि स्कूल की बच्चियों की उस घटना के बाद उन्होंने अपने रोजमर्रा के खर्चों में कटौती शुरू कर दी ताकि बचत के रुपयों से सेनेटरी पैड खरीदकर बांट सकें। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म व्हाट्सएप व फेसबुक के जरिए भी लोगों से अपील कर आर्थिक सहयोग जुटाया और सेनेटरी पैड खरीदकर बांटने शुरू किए। देखते ही देखते ही मुहिम से कई लोग जुड़ गए।

दोस्त ने उपलब्ध करवाए 7 हजार पैड
राजेश कुमार के अनुसार वे अब तक घर-घर जाकर 11 हजार 788 सेनेटरी पैड बांट चुके हैं। राजेश को 7 हजार सेनेटरी पैड के पैकेट उनके एक मित्र ने सहयोग के रूप में फ्री में उपलब्ध करवाए थे, क्योंकि उस दोस्त के सेनेटरी पैड की फैक्ट्री है। बाकी पैड जन सहयोग से जुटाए रुपयों से खरीदे। राजेश बताते हैं कि अब उनकी मुहिम से अमेरिका, कनाड़ा व दुबई में रह रहे प्रवासी भारतीय भी जुड़ने लगे हैं।












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