उमंग-7’ से बाल तस्करी पर प्रहार, 1 जून से राजस्थान पुलिस बाल श्रम और तस्करी के खिलाफ शुरू कर रही महाअभियान
राजस्थान पुलिस द्वारा 1 जून से बाल श्रम, बंधुआ बाल श्रम और मानव तस्करी के खिलाफ एक महीने का विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर यह पहल 'उमंग-7' नाम से 30 जून तक पूरे राज्य में चलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य बाल श्रम और तस्करी पर प्रभावी रोक लगाना और प्रभावित बच्चों के पुनर्वास को सुनिश्चित करना है।
इस अभियान का फोकस राज्य में बाल श्रम और मानव तस्करी की घटनाओं को जड़ से खत्म करना है। साथ ही, बचाए गए बच्चों को सुरक्षित वातावरण, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक होने पर मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराना भी इसका अहम हिस्सा है।

प्रशासनिक निगरानी की जाएगी
अतिरिक्त महानिदेशक नागरिक अधिकार हवा सिंह घुमारिया ने सभी पुलिस अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक जिले में एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पूरे अभियान की निगरानी करेंगे। जिला स्तर पर सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बचाव और निरीक्षण दल गठित किए गए
हर थाना स्तर पर विशेष बचाव दल गठित किए जाएंगे, जिनमें एक उप-निरीक्षक या सहायक उप-निरीक्षक सहित चार पुलिसकर्मी शामिल होंगे। ये दल होटलों, ढाबों, ईंट भट्टों, कारखानों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, धार्मिक स्थलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर निरीक्षण करेंगे।
दस्तावेजीकरण और कानूनी कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान मिले बच्चों का पूरा विवरण, आवश्यक होने पर फोटो और वीडियो सहित, रिकॉर्ड किया जाएगा। लापता या तस्करी के शिकार बच्चों की पहचान होने पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाल कल्याण और पुनर्वास
अभियान के तहत बचाए गए बच्चों का चिकित्सा परीक्षण और आवश्यकतानुसार मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जाएगा। यह पहल बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।












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