Rajasthan Opinion Poll: PM मोदी या CM गहलोत? किसके चेहरे पर जनता देगी वोट? सर्वे में आया चौंकाने वाला जवाब
Rajasthan Assembly Election Opinion Poll: अपनी कलाकृतियों के लिए मशहूर राजस्थान राज्य में 25 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने है, जिसके नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे। क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य में इस वक्त कांग्रेस की सरकार है और सीएम अशोक गहलोत ने दावा किया है कि उनकी वापसी इस बार भी निश्चित है और इस बार उन्हें सौ से ज्यादा सीटें मिलेंगी।

तो वहीं बिना सीएम फेस के और पीएम मोदी की लहर के सहारे चुनावी दंगल में उतरी भाजपा ने कहा है कि एक बार फिर से यहां इतिहास दोहराया जाएगा और यहां पर कमल खिलेगा। लेकिन क्या सच में ऐसा ही राज्य की जनता भी सोचती है?
पीएम मोदी या सीएम गहलोत? जनता किसे चुनेगी?
इस बात को जानने के लिए NDTV ने CSDS और लोकनीति के साथ मिलकर एक ओपिनियन पोल किया, जिसमें यह जानने की कोशिश की गई कि पीएम मोदी या सीएम गहलोत? आखिर उसके दिल में क्या है? मालूम हो कि जनता से दो प्रश्न किया गया था।
पहला प्रश्न था- केंद्र और राज्य सरकार के काम से लोग कितने संतुष्ट?
- जिसके जवाब में जनता ने हैरान करने वाला जवाब दिया। सर्वे के मुताबिक राजस्थान की 55 प्रतिशत जनता केंद्र सरकार के कामों से पूरी तरह से संतुष्ट है, जबकि 24 प्रतिशत लोग काफी हद तक संतुष्ट और 8 फीसदी लोग कुछ हद तक असंतुष्ट और 7 फीसदी लोग पूरी तरह से अंसतुष्ट थे।
- तो वहीं राज्य सरकार की बात करें तो राजस्थान की 43% जनता गहलोत सरकार से पूरी तरह संतुष्ट हैं और 14% जनता पूरी तरह असंतुष्ट है।
दूसरा प्रश्न था- मोदी या गहलोत? किसका चेहरा देखकर करेंगे मतदान?
- जिसके जवाब में 37 प्रतिशत जनता ने कहा कि वो पीएम मोदी के चेहरे को देखकर वोट करेंगे तो वहीं 32 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने कहा कि वो सीएम अशोक गहलोत के फेस को देखकर वोट करेंगे। जबकि 20 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वो इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं कह सकते हैं।
कौन किसके साथ?
- राजपूत - भाजपा के साथ 55 प्रतिशत- कांग्रेस के साथ 33 प्रतिशत
- जाट- भाजपा के साथ 34 प्रतिशत-कांग्रेस के साथ 42 प्रतिशत
- पिछड़ा- भाजपा के साथ 45 प्रतिशत-कांग्रेस के साथ 35 प्रतिशत
- दलित- भाजपा के साथ 46 प्रतिशत-कांग्रेस के साथ 44 प्रतिशत
कुल मिलाकर हर आंकड़ें में फिलहाल भाजपा ही कांग्रेस पर भारी दिख रही है, देखते हैं कि ये सर्वे के आंकड़े चुनावी नतीजों में तब्दील होते या नहीं। बताते चलें ये सर्वे अक्टूबर महीने का है, जो कि जनता से साक्षात्कार पर आधारित है।












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