Rajasthan News: श्रम आयुक्त ने नहीं की मंत्री के निर्देशों की पालना, इस कंपनी के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप
Rajasthan News: राजस्थान में श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाते हुए राजस्थान मजदूर कर्मचारी संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री श्रवण राम चौधरी ने श्रम आयुक्त राजस्थान करण सिंह को एक परिवाद पेश किया है। इसमें जयपुर स्थित सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में बॉश लिमिटेड कंपनी पर श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों के सुनियोजित दमन और शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में श्रम कानूनों के अंतर्गत समुचित कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। जिसे राजस्थान सरकार के राज्य मंत्री, राजस्व एवं सैनिक कल्याण विभाग विजय सिंह चौधरी ने अपनी अर्ध-शासकीय टिप्पणी के साथ श्रम आयुक्त को निर्देशित किया था।
भ्रष्टाचार में लिप्त श्रम विभाग के अधिकारी
हालांकि श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए मंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए निष्पक्ष और योग्य अधिकारी सहायक श्रम आयुक्त प्रवीण कुमार वर्मा के नेतृत्व में जांच कराने के बजाए श्रम आयुक्त ने मामले को संभागीय संयुक्त श्रम आयुक्त जयपुर रीजन आसिफ शेख को सौंप दिया। यह आरोप लगाया जा रहा है कि आसिफ शेख भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और इस मामले में निष्पक्षता की उम्मीद कम है।

मजदूर कर्मचारी संगठन और श्रमिकों में गहरा असंतोष
इस घटनाक्रम से राजस्थान मजदूर कर्मचारी संगठन और श्रमिकों में गहरा असंतोष है। संगठन का आरोप है कि श्रम आयुक्त और संभागीय संयुक्त श्रम आयुक्त के बीच बॉश लिमिटेड के साथ मिलकर श्रमिकों के अधिकारों के हनन की साजिश रची जा रही है। आरएमकेएस के अनुसार यह एक दमनकारी नीति का हिस्सा है। जो श्रमिकों और कर्मचारियों के वैधानिक हकों के खिलाफ है।
राज्य मंत्री के निर्देशों की अनदेखी का सवाल
इस मामले ने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है। क्या राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी के निर्देशों की अनदेखी करना और मामले को एक विवादास्पद अधिकारी के हाथों में सौंपना यह साबित करता है कि राजस्थान सरकार पर अधीनस्थ अधिकारीगण का अधिक प्रभाव है।
राज्य मंत्री के निर्देशों के बावजूद मामले को जिस तरह से संभाला गया है। उससे राजस्थान सरकार की प्रशासनिक क्षमता और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
श्रमिक संगठनों का आक्रोश और आगे की राह
आरएमकेएस के प्रदेश संगठन मंत्री श्रवण राम चौधरी ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि श्रम विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा श्रमिकों के वैधानिक हकों की अनदेखी अस्वीकार्य है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए और श्रम विभाग के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
इस प्रकरण ने राजस्थान में श्रमिक संगठनों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है और श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार के प्रति उनके संकल्प को मजबूत किया है। आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। जिससे यह तय हो सके कि श्रमिकों के वैधानिक हकों की रक्षा में सरकार की नीतियां कितनी प्रभावी हैं।












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