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Profile: नहीं रहे किरोड़ी सिंह बैंसला, जानिए 'इंडियन रेम्बो' से 'गुर्जरों के मसीहा' बनने तक का सफर

जयपुर, 31 मार्च। गुरुवार सुबह गुर्जर आरक्षण के पुरोधा किरोड़ी सिंह बैंसला ने दुनिया को अलविदा कह दिया। वो लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे। बैंसला गुर्जर आरक्षण का बड़ा चेहरा थे।उनके नेतृत्व में 2007 में राजस्थान में गुर्जरों ने बड़ा आंदोलन किया था। वो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष थे।

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    Colonel Kirori Singh Bainsla Death: किरोड़ी सिंह बैंसला का निधन, लंबे समय से थे बीमार| वनइंडिया हिंदी
    आइए एक नजर डालते हैं उनके अब तक के सफर पर

    आइए एक नजर डालते हैं उनके अब तक के सफर पर

    12 सितंबर 1940 को राजस्थान के करौली जिले के गांव मु​ड़िया में बच्चू सिंह के घर जन्मे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला सेना में कर्नल थे। वो बचपन से ही काफी बुद्दिमान, वीर और होशियार थे। वो करोड़ों लोगों से काफी अलग थे इसलिए उनके माता-पिता ने उनका नाम किरोड़ी रखा था। अपने शुरुआती दिनों में वो शिक्षक के तौर पर काम किया करते थे लेकिन इसके बाद वो फौज में शामिल हो गए थे।

    'जिब्राल्टर की चट्टान' और 'इंडियन रेम्बो'

    'जिब्राल्टर की चट्टान' और 'इंडियन रेम्बो'

    बैंसला भारतीय सेना की राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए थे। स्पष्ट वक्ता और वीरता के साक्षात उदाहरण बैंसला ने सिपाही से कर्नल तक का सफर अपनी ईमानदारी और अदम्य साहस के बल पर हासिल किया था। वो सेना में 'जिब्राल्टर की चट्टान' और 'इंडियन रेम्बो' के नाम से जाने जाते थे।

    वो 1965 के युद्ध में पाकिस्तान युद्धबंदी भी रहे थे

    वो 1965 के युद्ध में पाकिस्तान युद्धबंदी भी रहे थे

    बैंसला ने 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध और 1965 में भारत-पाक युद्द में दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे, वो 1965 के युद्ध में पाकिस्तान युद्धबंदी भी रहे थे। दुश्मन को सामने देखकर भी वो कभी डरे नहीं इसलिए उनके सीनियर्स उन्हें 'जिब्राल्टर का चट्टान' कहते थे और साथी कमांडो 'इंडियन रेम्बो' कहते थे।

    गुर्जर आरक्षण के पुरोधा थे बैंसला

    गुर्जर आरक्षण के पुरोधा थे बैंसला

    देशसेवा के बाद बैंसला ने गुर्जर समुदाय के हक के लिए लंबी लड़ाई लड़ी थी और वो राजस्थान के गुर्जरों के लिए अलग से एमबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत गुर्जरों को सरकारी नौकरियों में 5 फीसदी आरक्षण दिलाने में कामयाब भी रहे थे। वो गुर्जर आरक्षण के पुरोधा कहलाते थे।

    2019 को भाजपा में शामिल हुए थे बैंसला

    इसके बाद बैंसला ने राजनीति में प्रवेश किया। साल 2019 में वो और उनके बेटे 2019 को भाजपा में शामिल हुए थे। बैंसला भाजपा के टिकट पर टोंक- सवाई माधोपुर लोकसभा से सीट से चुनाव लड़े लेकिन वो कांग्रेस के नमोनारायण मीणा से चुनाव हार गए थे। बैंसला के चार बच्चे हैं। उनकी बेटी रेवेन्यु सर्विस और दो बेटे सेना में हैं और एक बेटा निजी कंपनी में। उनकी पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था।

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