Mangi Choudhary : राजस्थान कबड्डी टीम की 'कैप्टन' रही मांगी चौधरी खेतों में काम करने को मजबूर, VIDEO
बाड़मेर। ये हैं मांगी चौधरी। बॉर्डर इलाके की वो बेटी जो कभी कबड्डी में राजस्थान की टीम का नेतृत्व किया करती थी। वर्तमान में बदहाल जिंदगी जी रही है। आर्थिक तंगी से जूझ रही है। कबड्डी में इंटरनेशनल लेवल पर दांव-पेंच लगाकर हिंदुस्तान के लिए मेडल लेकर आने का ख्वाब देखने वाली राष्ट्रीय खिलाड़ी मांगी इन दिनों खेल मैदान की बजाय खेतों में काम करने को मजबूर है।

कौन है मांगी चौधरी?
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में मांगी चौधरी बताती हैं कि वे राजस्थान के बाड़मेर जिले के सोडीयार की रहने वाली हैं। इनका गांव भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास ही है। गांव सोडीयार के सोनाराम व सज्जियो देवी के घर 13 अगस्त 1991 को जन्मी मांगी चौधरी कबड्डी के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक है।

6 कक्षा से खेलने लगी थी कबड्डी
मांगी चौधरी को बचपन से ही कबड्डी को शौक था। शायद वजह है कि गांव सोडीयार के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छह की पढ़ाई के दौरान ही मांगी ने कबड्डी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। इसके बाद मांगी ने पड़ोस के गांव लीलसर के सरकारी स्कूल से नौवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। यहां पढ़ते हुए मांगी चौधरी नेशनल लेवल तक पहुंच गई थी।
2008 व 2010 में थी राजस्थान की कप्तान
मांगी चौधरी कबड्डी की दस से ज्यादा राज्य व राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है। वर्ष 2008 में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला और यूपी के वाराणसी में कबड्डी प्रतियोगिता में मांगी राजस्थान टीम की कप्तान थी। वर्ष 2012 में मांगी खेल छूट गया। 2014 में ओपन खेला, मगर आगे नहीं बढ़ पाई।

दो माह कोमा में रहे पिता
मांगी बताती है कि जब वे कबड्डी में आगे बढ़ रही थी। उस दौरान पिता सोनाराम को पैरालिसिस अटैक आया। वे दो माह कोमा में रहे। अहमदाबाद के अस्पताल में इलाज चला। मांगी पिता के साथ ही रही। उसी दौरान टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में ले जाया गया था, मगर मांगी नहीं जा पाई। इसके बाद धीरे-धीरे हमेशा कबड्डी दूर हो गई।

कोच बनना चाहती है मांगी
मांगी कहती है कि वर्तमान में वे खेतों में काम करने को मजबूर है। वे कबड्डी में भारत नाम रोशन करने के साथ-साथ कोच बनना चाहती थी, मगर ख्वाब टूट गया। मांगी ने स्पोर्ट्स टीचर का कोर्स भी कर रखा है। राजस्थान के खेल मंत्री अशोक चांदना तक भी अपनी समस्या पहुंचा चुकी है, मगर अभी तक कोई मदद नहीं मिली।












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