Jat Andolan Rajasthan: CM भजन लाल शर्मा के 'घर' भरतपुर में जाट आंदोलन की असली वजह क्या है?
Jat Andolan Rajasthan Reason: केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण के लिए राजस्थान के जाटों ने भरतपुर जिले की उच्चैन तहसील के जयचौली रेलवे स्टेशन के पास 17 जनवरी 2024 से आंदोलन शुरू कर दिया है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा खुद भरतपुर से हैं। राजस्थान व केंद्र में भाजपा की ही सरकार है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भजन लाल शर्मा के 'घर' भरतपुर में जाटों का जमावड़ा क्यों हो रहा? जाटों ने रेलवे ट्रैक के पास तंबू क्यों गाड़ दिए हैं?

राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर के जाट रेल व सड़क जाम करने पर आमादा हैं। सिर्फ इन दो ही जिलों के जाटों के लिए आरक्षण की क्या समस्या है? यहां के जाटों ने आरक्षण के लिए क्या कदम उठाए? केंद्र व राज्य सरकार ने क्या-क्या किया? पूरी कहानी राजस्थान जाट आरक्षण आंदोलन संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार ने बताई है।
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में नेम सिंह फौजदार ने बताया कि राजस्थान जाट आंदोलन में सिर्फ भरतपुर व धौलपुर के ही जाट हिस्सा ले रहे हैं। इन्हीं दो जिलों के जाटों को केंद्र सरकार की नौकरियों में ओबीसी का आरक्षण नहीं है। जबकि शेष राजस्थान के जाटों को आरक्षण है।
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जाट आरक्षण आंदोलन के संयोजक नेम सिंह फौजदार कहते हैं कि भरतपुर-धौलपुर के जाटों के आरक्षण का मुद्दा साल 1998 से चला आ रहा है। अब 2024 में फिर आरक्षण मांगना पड़ रहा। इन 26 साल में कभी आरक्षण मिला। कभी छिन गया। जानिए कब-क्या हुआ?

साल 1998 में राजस्थान में जाटों को आरक्षण मिला
नेम सिंह फौजदार के अनुसार राजस्थान के जाट पहले वैश्य, ब्राह्मण व राजपूतों की तरह सामान्य श्रेणी में हुआ करते थे। साल 1998 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने राजस्थान में भरतपुर-धौलपुर जिले के जाटों को छोड़कर शेष सभी को आरक्षण दिया। तब ये सामान्य से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आ गए।
भरतपुर-धौलपुर के जाटों के आरक्षण क्यों नहीं मिला?
साल 1998 में राजस्थान के भरतपुर-धौलपुर जिले के जाटों को यह कहकर ओबीसी का आरक्षण नहीं दिया गया कि इन दोनों जिले के जाट पूर्व में महाराजा थे। इस पर जाटों ने तर्क दिया जाट महाराजा तो सिर्फ सूरजमल थे। बाकी जाट तो प्रजा है। राजस्थान के अन्य जाटों की तरह ही इन्हें भी आरक्षण मिलना चाहिए।

साल 2000 में जाटों को स्टेट में आरक्षण मिला
भरतपुर-धौलपुर के जाटों ने 1998 से ही आरक्षण के लिए आवाज उठाना शुरू कर दिया था। जाटों ने आंदोलन भी किया। नतीजा यह रहा कि महज 2 साल बाद ही साल 2000 में भरतपुर-धौलपुर के जाटों को भी राज्य में ओबीसी का आरक्षण मिल गया, मगर केंद्र में फिर नहीं मिला।
साल 2013 में जाटों को केंद्र में भी मिला आरक्षण
राज्य में ओबीसी का आरक्षण मिलने के बाद भरतपुर-धौलपुर के जाट केंद्र में आरक्षण के लिए आंदोलन की राह पर रहे। करीब 13 साल बाद केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार ने नौ राज्यों में जाटों को आरक्षण दिया था। उनमें भरतपुर-धौलपुर के जाट भी शामिल थे। मतलब अब जाटों की मांग पूरी हो गई थी।

2015 में भरतपुर-धौलुपर के जाटों का आरक्षण खत्म हुआ
धौलपुर-भरतपुर के जाटों को आरक्षण प्राप्त हुए सालभर ही बीता था कि साल 2014 में केंद्र में भाजपा की मोदी सरकार बन गई। भाजपा सरकार ने 10 अगस्त 2015 में नौ राज्यों में जाटों का आरक्षण खत्म किया और धौलपुर-भरतपुर के जाटों से केंद्र के साथ-साथ राज्य आरक्षण भी छीन लिया। ऐसे में यहां के जाटों ने फिर आंदोलन की राह पकड़ ली।
साल 2017 में वसुंधरा सरकार ने दिया आरक्षण
जाटों के आंदोलन को देखते ओबीसी कमीशन ने सर्वे किया और सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान में तत्कालीन वसुंधरा राजे सिंधिया सरकार ने 23 अगस्त 2017 को जाटों को राज्य में आरक्षण दिया। उसके बाद ये केंद्र में आरक्षण के लिए लड़ते रहे।
साल 2020 को फिर हुआ जाट आरक्षण आंदोलन
साल 2020 में राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार थी। जाटों ने 20 दिसंबर 2020 को केंद्र में आरक्षण के लिए आंदोलन किया। महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस 25 दिसंबर पर हाईवे जाम का अल्टीमेटम दिया तब 29 दिसंबर 2020 को राजस्थान सरकार ने केंद्र को पत्र भेजा कि भरतपुर-धौलपुर के जाटों को राज्य की तरह केंद्र में भी आरक्षण दिया जाए।

साल 2022 में राजस्थान आया ओबीसी आयोग
जाटों की केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की मांग पर दिल्ली से ओबीसी आयोग की टीम साल 2022 भरतपुर आई। नेम सिंह फौजदार कहते हैं कि हम सारी कानूनी प्रकिया पूरी कर चुके हैं। सिर्फ एक लाइन लिख देने भर से हमें आरक्षण मिल जाएगा और किसी का कोटा कम-ज्यादा भी नहीं होगा। भरतपुर में साढ़े छह लाख और धौलपुर में 10 हजार जाट हैं।
साल 2024 में डीग जनूथर में महापंचायत
भरतपुर-धौलपुर के जाट आरक्षण की मांग उठाते रहे और चुनावी साल 2023 आ गया। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में 115 सीटें लेकर भाजपा की सरकार बन गई तो 7 जनवरी 2024 को जाटों ने भरतपुर से अलग होकर नया जिला बने डीग के जनूथर में भूतेश्वर मंदिर परिसर में जाट महापंचायत हुई, जिसमें जाटों ने सरकार को 10 दिन यानी 17 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया।
17 जनवरी से गांव जयचौली में महापड़ाव
अब जाटों ने 17 जनवरी 2024 को भरतपुर जिले की उच्चैन तहसील के गांव जयचौली में दिल्ली-मुम्बई रेलवे लाइन से 500 मीटर दूर महापड़ाव शुरू कर दिया। जाट नेता कह रहे हैं कि 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह होना है। उसके लिए इस मार्ग से खूब राम भक्त अयोध्या जा रहे हैं। उनको कोई तकलीफ ना हो। इसलिए 22 जनवरी तक शांतिपूर्ण तरीके से महापड़ाव रहेगा। फिर जरूरत पड़ी तो सड़क व रेल मार्ग करेंगे।
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