गुलेल से किसी पर निशाना नहीं साध रहीं, ये महिलाएं तो लगा रही हैं पौधे, देखें तस्वीरें

राजसमंद। हाथ में गुलेल...। लक्ष्य पर नजर...। यह किसी परिंदे या जानवर का शिकार नहीं हो रहा। ना ही कोई निशानेबाजी की प्रतियोगिता है। पहाड़ी पर चढ़कर हाथ में गुलेल थामे इन महिलाओं का मकसद है पौधोरापण। वो भी गुलेल से। चौंकिएगा नहीं। राजस्थान के राजसमंद इलाके में पर्यावरण संरक्षण की इस अनूठी मुहिम के तहत ऐसे ही कार्य हो रहा है।

करियर महिला मंडल का कमाल

करियर महिला मंडल का कमाल

दरअसल, राजसमंद जिले में एक जगह है देवगढ़। यहां की करीब सौ महिलाओं ने मिलकर 'करियर महिला मंडल' के नाम से एनजीओ बना रखा है। यह एनजीओ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करता है। इस साल इन्होंने अनूठे तरीके से पौधारोपण करने का काम हाथ ​में लिया है।

इस बार गुलेल से बीजारोपण

इस बार गुलेल से बीजारोपण

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में 'करियर महिला मंडल' की सरंक्षक भावना पालीवाल बताती हैं कि देवगढ़ पहाड़ी इलाका है। यहां अरावली पर्वतमाला की ऊंची दुर्गम पहाड़ियां हैं, जिनकी तलहटी तक पहुंचकर पौधारोपण करना संभव नहीं है। ऐसे में मानसून से पहले मंडल की बैठक में हम महिलाओं ने पहली बार तय किया कि इस बार गुलेल से पौधारोपण (बीजारोपण) करेंगी।

 महिलाओं ने बनाई सीड्स बॉल और गुलेल

महिलाओं ने बनाई सीड्स बॉल और गुलेल

इसके बाद सभी महिला सदस्यों ने अपने-अपने गांव-ढाणी से नीम, बड़, पीपल, जामुन, शीशम आदि के बीज एकत्रित किए। फिर मिट्टी और गोबर से गोल-गोल गेंद सी बना ली, जिन्हें सीड्स बॉल कहा जाता है। गेंद में एक-एक बीज डाल दिया। साथ ही महिलाओं ने गुलेल भी बनाई।

सेंड माता मंदिर से छोड़ी सीड्स बॉल

सेंड माता मंदिर से छोड़ी सीड्स बॉल

सीड्स बॉल सूखकर तैयार होने के बाद छह अगस्त को भावना पालीवाल और उनके मंडल की नीलम पंवार, अवंतिका शर्मा, संगीता रेगर, भावना सुखवाल, पूजा मेहता आदि गुलेल और सीड्स बॉल लेकर देवगढ़ में मदारिया व लसानी गांव के पास सेंड माता शिखर पर पहुंची। मंदिर तक पहुंचने के लिए 800 सीढ़ियों को पार करना पड़ता है। शिखर पर इसलए आईं ताकि यहां से छोड़ी गई सीड्स बॉल काफी दूर तक जा सकें।

ऐसे कैसे होगा पौधारोपण

ऐसे कैसे होगा पौधारोपण

दरअसल, गुलेल से छोड़ा गई सीड्स बॉल मिट्टी और गोबर की बनी हैं, जो कुछ समय तक एक ही जगह पड़ी रहेंगी। बारिश होने पर इसमें से बीज अंकुरित होने लग जाएगा और देखते ही देखते वह पौधे का रूप ले लेगा। दुर्गम पहाड़ियां होने पर वहां तक मवेशी भी नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में पौध उगने के बाद अगर अच्छी बारिश हुई तो उसे पेड़ बनने में देरी नहीं लगी।

दो हजार पौधे लगाने का लक्ष्य

दो हजार पौधे लगाने का लक्ष्य

भावना पालीवाल बताती हैं कि हमने दो हजार सीड्स बॉल तैयार की है। इस तरह से बीजारोपण करने से 80 फीसदी पौधे पनप पाते हैं। ऐसे में बारिश ने अगर साथ दिया तो हम इस सीजन में देवगढ़ के आस-पास 1600 पौधे लगाने में सफल होंगी। पहले दिन 500 सीड्स बॉल गुलेल से छोड़ी हैं।

 जानिए कौन हैं भावना पालीवाल

जानिए कौन हैं भावना पालीवाल

भावना पालीवाल मूलरूप राजसमंद के देवगढ़ के माणक चौक की रहने वाली हैं। इनका पीहर आमेट में हैं। नाथद्वारा के कॉलेज से भावना ने हिंदी साहित्य से पीजी कर रखी है। भावना ने बताया कि पौधारोपण की उनकी इस अनूठी मुहिम को राजसमंद सांसद दीया कुमारी ने भी सराहा है।

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