Rajasthan News: पिस्टल के खोल ने पलट दिया राजस्थान पुलिस का खेल, आनंदपाल एनकाउंटर के जांबाज बने हत्या के आरोपी
Rajasthan News: राजस्थान में गैंगस्टर आनंदपाल सिंह एनकाउंटर मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सीबीआई कोर्ट ने एनकाउंटर में शामिल एसपी सहित पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए है। साथ ही मामले की जांच के भी आदेश दिए है।
इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी। सीबीआई ने कोर्ट में इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट भी दे दी थी। आनंदपाल के एनकाउंटर के 7 साल बाद ऐसा क्या हुआ। जिससे पूरा मामला ही बदल गया। जिन पुलिसकर्मियों की आनंदपाल एनकाउंटर के बाद पीठ थप-थपाई जा रही थी। कोर्ट ने उन्हीं जांबाज पुलिस वालों पर हत्या का मुकदमा चलाने के आदेश दे दिए। आखिर कैसे राजस्थान पुलिस के हाथ आई बाजी पलट गई। आईए जानते हैं इस पूरे मामले को।

आनंदपाल की पत्नी और भाई ने की थी अपील
सीबीआई द्वारा दी गई क्लोजर रिपोर्ट और केस डायरी में दर्द बयानों में बताया गया कि पुलिस आनंदपाल को सरेंडर कराने के लिए मालासर पहुंची। पुलिस को यहां श्रवण सिंह के मकान में आनंदपाल के छुपे होने की जानकारी मिली। पुलिस ने श्रवण सिंह के मकान को चारों तरफ से घेर लिया। इस दौरान पुलिस ने जोर-जोर से आनंदपाल को सरेंडर करने के लिए आवाज लगाई।
रिपोर्ट में बताया गया सामने की ओर से गोलीबारी होने लगी। जैसे-तैसे पुलिस अधीक्षक राहुल बाहरठ और पुलिसकर्मी घर के नजदीक पहुंचे। आनंदपाल छत पर छिपा हुआ था। पुलिस ने सीढ़ियों में दीवार की आड़ ले रखी थी। इस दौरान पुलिस और आनंदपाल के बीच मुठभेड़ हुई। गोलीबारी के दौरान आनंदपाल को गोली लग गई। आनंदपाल सीढ़ियों में गिर गया। कुचामन सिटी के सीओ विद्याप्रकाश ने मृतक की पहचान की।
पिस्टल के खोल ने बदला खेल
सीबीआई ने इस पूरे घटनाक्रम को एनकाउंटर करार देते हुए सभी पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट दे दी। लेकिन इस पूरे मामले में पेंच तब फंस गया। जब कुचामन सीओ विद्याप्रकाश की पिस्टल 9 एमएम ग्लोक की गोली का खाली खोखा केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री की रिपोर्ट के मुताबिक छत पर पाया गया।
पिस्तौल से किए गए फायर के बाद गोली का खाली खोखा फायर करने वाले व्यक्ति के पास ही गिरता है। ऐसे में फोरेंसिक विज्ञान द्वारा शूटर की लोकेशन का पता लगाया जाता है। जबकि सीबीआई द्वारा लिए गए कांस्टेबल सोहन सिंह और धर्मवीर के बयानों में विद्याप्रकाश की मौजूदगी सीढ़ियों पर दिखाई गई।
लेकिन एक अन्य पुलिसकर्मी के बयानों से इस बात की तस्दीक नहीं हो सकी कि विद्याप्रकाश सीढ़ियों में ही मौजूद थे। इस बात पर सवाल उठ गया कि जब विद्या प्रकाश सीढ़ियों में थे ही नहीं। आनंदपाल की मृत्यु होने तक छत पर गए ही नहीं। उसके बावजूद उनकी पिस्तौल का खाली खोखा छत पर कैसे पाया गया।
केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री और जप्त किए गए खाली खोखे की रिपोर्ट के मुताबिक छत पर तत्कालीन सीओ विद्या प्रकाश, पुलिस निरीक्षक सूर्यवीर सिंह और हेड कांस्टेबल कैलाश की पिस्तौल और राइफल के खाली खोखे पाए गए।
पुलिस ने सीढ़ियों पर पोजीशन ली तो छत पर कौन था ?
केस डायरी में दर्ज गवाहों के मुताबिक हेड कांस्टेबल कैलाश द्वारा कांस्टेबल धर्मपाल सहित सीढ़ियों के ऊपर बाई तरफ के कमरे में पोजीशन ली गई थी। सीढ़ियों में छत की तरफ सबसे आगे कांस्टेबल सोहन सिंह और उसके पीछे एसपी राहुल बाहरठ, सूर्यवीर सिंह और कांस्टेबल धर्मवीर थे।
लेकिन विद्याप्रकाश, सूर्यवीर सिंह सहित किसी भी गवाह ने आनंदपाल के गिरने तक विद्याप्रकाश एवं सूर्यवीर सिंह या किसी अन्य पुलिसकर्मी के छत पर पहुंचने की बात नहीं कही गई। क्लोजर रिपोर्ट के मुताबिक पुलिसकर्मी सीढियों में ही मौजूद थे। आनंदपाल के पास एक-47 राइफल थी। मृत्यु के वक्त वह सीढ़ियों के ठीक सामने गिरा था। ऐसी स्थिति में आनंदपाल की मृत्यु के पहले किसी भी पुलिसकर्मी का छत पर पहुंचना संभव नहीं था।
ऐसे संदेहास्पद हुआ मामला
ऐसे में केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री की रिपोर्ट के मुताबिक छत पर तत्कालीन सीओ विद्याप्रकाश, पुलिस निरीक्षक सूर्यवीर सिंह और हेड कांस्टेबल कैलाश की पिस्तौल और राइफल के खाली खोखे पाए जाने पर मामला संदेहास्पद बन गया। केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री की फायर आर्मी परीक्षण रिपोर्ट ने राजस्थान पुलिस का पूरा खेल पलट कर रख दिया।
इसी को आधार बनाकर आनंदपाल की पत्नी राज कंवर और भाई रूपेंद्र पाल सिंह ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायालय ने उनके तर्कों से सहमत होते हुए इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं।
अब करना पड़ेगा हत्या का मुकदमा फेस
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में साफ कहा गया कि आनंदपाल ऊपर से पुलिस पर फायरिंग कर रहा था। पुलिस सीढ़ियों से फायरिंग कर रही थी। इस बात से न्यायालय सहमत नहीं हुआ। न्यायालय ने क्लोजर रिपोर्ट पर अपनी असहमति दर्ज करते हुए यह आदेश सुनाया है।
न्यायालय के इस आदेश ने राजस्थान पुलिस के उन जांबाज सिपाहियों को हत्या का आरोपी बना दिया। जिनकी बहादुरी के किस्से सुनाए जाते थे। इन जांबाज सिपाहियों का सीना गर्व से चौड़ा रहता था। अब इन्हें हत्या के मामले में मुकदमें का सामना करना पड़ेगा।









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