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Phalodi Satta Bazaar: 'सॉल्ट सिटी' व फलों की मंडी से फलोदी सट्टा बाजार बनने की कहानी

Satta Bazaar Phalodi Rajasthan: देश में इन दिनों में राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 की चर्चा है। सबको 3 दिसंबर के नतीजों का इंतजार है। इस बीच राजस्‍थान का फलोदी सट्टा बाजार भी सुर्खियों में है। चुनावों में फलोदी सट्टा बाजार को सबसे सटीक अनुमानों के लिए माना जाता है।

जानिए फलोदी से जुड़ी कुछ खास बातें

राजस्‍थान में आबादी के लिहाज से दूसरे बड़े शहर जोधपुर से करीब 164 किलोमीटर की दूरी पर है फलौदी कस्‍बा, जो अब खुद जोधपुर से अलग होकर नया जिला बन चुका है।

माना जाता है कि फलौदी पहले फलों की मंड़ी के लिए जानी जाती थी, इसका नाम भी फलवृद्धिका था। लेकिन धीरे-धीरे इसका नाम फलौदी कर दिया गया। फलौदी अपने फलों की मंडी के साथ-साथ यहां उत्पादित होने वाले नमक के लिए भी प्रसिद्ध है। इसे सॉल्ट सिटी भी कहा जाता है।

Phalodi Satta Bazaar

फलों की मंडी में लगने लगा सट्टा

फलौदी के मुख्य बाज़ार में बने गांधी चौक में सुबह से लोग जमा होने शुरू होते हैं और देर रात तक मजमा लगा रहता है। इनमें सर्वाधिक संख्‍या सटोरियों व दलालों की रहती है। बताया जाता है कि यह वहीं चौक है, जहां किसी जमाने में व्यापारी फलों की मंडी लगाया करते थे। अब यहां सट्टे का बाज़ार चलाता है।

सट्टा ग़ैर क़ानूनी है। इसलिए यहां सब कुछ ज़ुबानी और एक दूसरे के भरोसे पर चलता है। 20-22 लोग सट्टे के कारोबारी हैं, जो सट्टे का आयोजन करते हैं। इस सट्टे के कारोबार में दलाल, लगाईवाल (सट्टा लगाने वाला) और खाईवाल (सट्टे पर पैसे लगाने वाला) तीन कड़ियां होती हैं। फलौदी में सट्टे के जानकार कहते हैं कि सट्टा बाज़ार का चुनावी आकलन क़रीब-क़रीब सही साबित होता है।

आज़ादी से पहले भी लगता था सट्टा

फलौदी में सट्टे का कारोबार कोई नया नहीं है। आज़ादी से पहले यहां रुई की तेज़ी या मंदी पर सट्टा लगता था। कहा यह भी जाता है कि यहां चुनावी सट्टा देश में पहले चुनावों के साथ ही शुरू हो गया था। मौसम मसलन बारिश, आंधी, ओले आदि पर तो यहां सट्टा सदियों से चला आ रहा है।

हर दूसरा सटोरिया मौसम वैज्ञानिक

फलोदी सट्टा बाजार की यह भी खासियत है कि यहां पर हर दूसरा सटोरियों किसी मौसम वैज्ञानिक से कम नहीं है। बादल देखकर ही बिरखा का अनुमान लगा देते हैं। गांधी चौक में एक छह की नाली को निर्धारित किया है, जो जिसमें पानी आने नहीं आने पर सौदा होता है। इसकी निगरानी के लिए उसे नाली के सामने सीसीटीवी कैमरा तक लगा हुआ है। फलोदी राजस्‍थान में सबसे गर्म व ठंडी जगहों में से एक है।

फलोदी में हमीर सिंह का किला भी फेमस

फलोदी में सट्टा व नमक के अलावा हमीर सिंह का किला भी फेमस है। 15वीं सदी में बना हमीर सिंह का क़िला अपने प्रभावी अतीत की गाथा बयान करता है। इसी क़िले में वीरानी ओढ़े बैठे एक महल के बारे में स्थानीय लोग कहते हैं कि कभी मुग़ल बादशाह हुमायूं ने संकट के समय इसमें पनाह ली थी। फलोदी में किले के अलावा कई मंदिर भी हैं।

मेहमान बनकर आते हैं कुरजां

फलोदी में नमक, सट्टा व मौसम के बाद चौथी फेमस बात है कुरजां। सात समंदर पार करके साईबेरिया से बड़ी संख्‍या में कुरजां पक्षी फलोदी के खीचन में आते हैं। यहां शीतकालीन प्रवास के लिए आने वाली कुरजां के लिए लोग पलक पांवड़े बिछाकर रखते हैं।

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