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राजस्थान में 2 शानदार शर्तों पर हुई डॉक्टर दूल्हा-दुल्हन की शादी, सब कर रहे इनकी तारीफ

Sikar News, सीकर। बिना दहेज की शादियां कर लोग मिसाल पेश कर रहे हैं, वहीं शुक्रवार को सीकर में इससे भी बढक़र एक शादी हुई, जिसमें ना बैंड बाजा था ना ही घोड़ी। बस सात फेरे की सामान्य रस्म के साथ यह शादी सम्पन्न हो गई।

dowry in this wedding of sikar

जानकारी के अनुसार दांतारामगढ़ निवासी सेवानिवृत शिक्षक सांवरमल शर्मा व जिला शिक्षा अधिकारी संतोष शर्मा के बेटे डॉ. मयंक शादी शुक्रवार को सीकर निवासी राजकुमार शर्मा की बेटी डॉ. पूजा के साथ हुई है। दोनों के रिश्ते में पहली शर्त रखी गई थी कि दहेज में एक भी रुपया नहीं लेंगे। जुआरी तक किसी की नहीं होगी। दूसरी शर्त यह थी कि शादी में ना बाजा होगा ना ही घोड़ी होगी।

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दांतारामगढ़ से बारात सीकर पहुंची

दांतारामगढ़ से बारात सीकर पहुंची

शुक्रवार को सीकर के शोभासरिया विश्राम भवन में यह शादी सीकर के लिए यादगार बनी। दांतारामगढ़ से बारात सीकर पहुंची और दूल्हा ना घोड़ी पर बैठा और ना ही बारातियों ने बैंड बाजे पर ठुमके लगाए। दांतारामगढ़ में निकासी भी बिना घोड़ी व बाजा के हुई। इतना नहीं बल्कि करीब 35 साल पहले जब डॉ. मंयक के पिता शिक्षक सांवरमल शर्मा की शादी हुई तो उन्होंने उस समय भी बिना सेहरा के इसी प्रकार की बिना दहेज की शादी कर मिसाल पेश की थी।

तिलक की रस्म में सिर्फ एक किलो फल

तिलक की रस्म में सिर्फ एक किलो फल

डॉ. मंयक के ससुराल वालों ने तिलक देने की जिद की तो मात्र एक किलो फल लेकर आने पर राजी हुए। दो दिन पहले घर पर ही साधारण तौर पर डॉ. मंयक के तिलक किया गया। परिवार के मौजूद सदस्यों के अलावा किसी को नहीं बुलावा गया। हांलाकि शाम को सभी के लिए स्नेहभोज का आयोजन किया गया था।

बारात में भी पांच ही व्यक्ति लेकर आना चाहते थे

बारात में भी पांच ही व्यक्ति लेकर आना चाहते थे

डॉ. मंयक शर्मा बताते हैं कि वे तो बारात में भी पांच ही व्यक्ति लेकर आना चाहते थे, लेकिन परिवार खूब बड़ा होने के कारण इस अूनठी शादी व खुशी के मौके पर परिवार के साथ कुछ मित्र भी शादी में शामिल होना चाहते थे। डॉक्टर मयंक ने बताया सामाजिक परंपरा के दबाव में कुछ पूजा-पाठ बगैरह सामान्य रिवाजों को मानते हुए साफा शेरवानी भी पहनी पड़ी।

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