Rajasthan: दूल्हा-दुल्हन ने देवी-देवताओं की तरह शहीदों को भी किया नमन, सोशल मीडिया में फोटो वायरल
राजस्थान का शेखावाटी अंचल देश में सबसे अधिक फौजी देने वाले इलाकों में से एक है। दूल्हा दूल्हन द्वारा शहीद प्रतिमा को नमन करने का मामला झुंझुनूं जिले के गांव इंद्रपुरा स्थित राइफलमैन कालूराम ओलखा शहीद स्थल का है।

जहां तुम्हे मिल जाएं चौक-चबूतरे बलिदान के।
उन्हें पूजना ये हैं सारे सच्चे तीरथ हिंदुस्थान के।।
शहीदों के सम्मान में लिखी गईं कवि मदनमोहन समर की ये पंक्तियां राजस्थान के झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी इलाके के गांव इंद्रपुरा में चरितार्थ होती दिखी हैं। यहां पर शहीदों को पूजे जाने की बात कोई नई नहीं, मगर इस बार एक नवदंपती ने देवी-देविताओं की तरह शहीदों को नमन किया तो तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो गई।
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दिलीप ओलखा की शादी स्वाति ओला से
दरअसल, गांव इंद्रपुरा निवासी सांवरमल ओलखा के बेटे दिलीप की मंगलवार को ओला की ढाणी गोठड़ा निवासी सांवरमल ओल की बेटी स्वाति से शादी हुई थी। बारात रवानगी से पहले भी दूल्हा दिलीप ने शहीद राइफलमैन कालूराम ओलखा और शहीद देवीसिंह शेखावत के स्मारक पर शीश नवाया था।

दूल्हा दुल्हन सबसे पहले शहीद स्मारक पहुंचे
सात फेरों के बाद दिलीप ओलखा बुधवार सुबह दूल्हन लेकर पहुंचा। गांव में प्रवेश करते ही दूल्हा दुल्हन सबसे पहले शहीद स्मारक पर ही गए। वहां शहीद राइफलमैन कालूराम ओलखा के प्रतिमा के धोक लगाकर खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना की।

झुंझुनूं से शहीद, सैनिक व पूर्व सैनिक कितने हैं?
देशसेवा के मामले में झुंझुनूं जिला देशभर में अव्वल है। यहां घर-घर में फौजी व गांव-गांव में शहीद प्रतिमाएं इस बात का सबूत हैं। मौटे अनुमान के हिसाब से इस समय झुंझुनूं के 45 हजार फौजी देश में विभिन्न जगहों पर तैनात हैं। 62 हजार पूर्व सैनिक हैं। 423 जवान अब तक शहीद हो चुके हैं। करगिल जंग में भी यहां के अनेक बेटों ने प्राणों की आहुति दी थी। झुंझुनूं जिले में सैनिक स्कूल भी खुल चुका है।

शहीद प्रतिमाओं का राखी बांधती हैं बहनें
शहीदों के परिवार हर त्योहार भी उनके साथ मनाते हैं। यही वजह है दीपावली पर घरों की तरह शहीद स्मारक भी रोशनी से जगमगाते हैं। यहीं नहीं बल्कि रक्षाबंधन पर शहीद प्रतिमाओं के लिपटी बहनें और उनकी कलाई पर राखी बांधती बहनों की तस्वीरें खूब देखने को मिलती हैं।

शहीद वीरांगनाएं रखती हैं करवा चौथ का उपवास
झुंझुनूं में शहीदों को अजर अमर माना जाता है। इस बात का साक्षी करवा चौथ का व्रत है। सुहाग की निशानी करवा चौथ का व्रत शहीदों की वीरांगनाएं भी रखती हैं। अन्य सुहागिन महिलाओं की तरह दिनभर भूखी प्यासी रहकर पति की लंबी उम्र की कामना करती है। शाम को शहीद प्रतिमा या तस्वीर देखकर उपवास तोड़वती हैं।












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