राजस्थान में बिजली विभाग का नया फरमान, आज से 7 घंटे बिजली कटौती का फरमान
Rajasthan News: राजस्थान में बिजली संकट गहराता जा रहा है क्योंकि उद्योगों को 7 घंटे की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और आर्थिक नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
बिजली कटौती के फरमान के बाद सरकार के इस फैसले की आलोचना बढ़ रही है। ऊर्जा विभाग ने आदेश जारी किया कि 25 जून की रात्रि से 7 घंटे बिजली कटौती शुरू कर दी गई है।

राजस्थान में बिजली संकट का असर अब व्यापक रूप में देखने को मिलने लगा है। मई और जून में भीषण गर्मी के दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली कटौती से प्रदेश की जनता परेशान थी।
सत्ता पक्ष के कई विधायकों और मंत्रियों ने भी अपने अपने क्षेत्र में बिजली कटौती होने पर उसे सुचारू करने की मांग सरकार से कर चुके हैं।
अब उद्योगों पर भी बिजली संकट का असर पड़ा है। राज्य सरकार ने मंगलवार 25 जून की रात्रि से 7 घंटे बिजली कटौती शुरू कर दी है।
इस संबंध में ऊर्जा विभाग ने आदेश भी जारी कर दिया है। प्रदेश के उद्योगपति सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
उद्योगपतियों का कहना है कि रोजाना 7 घंटे कटौती होने पर 30 फीसदी उत्पादन घटेगा, जिसका सीधा असर सरकार के राजस्व पर पड़ेगा।
ऊर्जा विभाग के आदेश के बाद जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र में 7 घंटे की नियमित कटौती करना शुरू कर दिया है।
रात 8 बजे से लेकर आधी रात के बाद तड़के 3 बजे तक बिजली सप्लाई नहीं होगी। कोल्ड स्टोरेज जैसे उद्योगों बिजली कटौती में 50 फीसदी की छूट दी गई है।
साथ ही एनसीआर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहेगी। ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त सचिव का कहना है कि प्रदेश में बिजली खपत 20 फीसदी बढ़ गई है।
ऐसे में एहतियात के तौर पर बिजली कटौती के कदम उठाए जा रहे हैं। पिछले साल जून में बिजली की मांग प्रति दिन 2200 लाख यूनिट थी जो इस बार बढ़कर 3500 लाख यूनिट हो गई है।
जयपुर के व्यापारिक संगठनों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र व्यापार मंडल के अध्यक्ष जगदीश सोमानी का कहना है कि प्रदेश में मानसून दस्तक दे चुका है।
ऐसे में बिजली कटौती का आदेश निकाला जाना समझ से परे है। सोमानी ने कहा कि बिजली कटौती से उद्योगों को भारी नुकसान होगा। 30 फीसदी तक उत्पादन घट जाएगा।
ऑर्डर पूरे करने में परेशानी होगी और तैयार माल की डिलिवरी नहीं कर पाने से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। वीकेआई और सीतापुरा क्षेत्र के 40 फीसदी उद्योगों में 8 से 10 घंटे, 40 फीसदी क्षेत्र में 16 से 20 घंटे और 20 फीसदी क्षेत्र में लगातार 24 घंटे उत्पादन होता है। बिजली कटौती से इन उद्योगों को भारी नुकसान पहुंचेगा।












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