Mob Lynching Alwar: रकबर को पीट-पीट कर मारने के मामले में दोषियों को हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत
अलवर में बहुचर्चित मॉब लिंचिंग केस में अधीनस्थ कोर्ट के सजा के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।
Mob Lynching Alwar Rajasthan: राजस्थान के अलवर में बहुचर्चित मॉब लिंचिंग केस में अधीनस्थ कोर्ट के सजा के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपील का निस्तरण होने तक सजा स्थगित करने के प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया है।
न्यायाधीश पंकज भंडारी और न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने नरेश कुमार व अन्य की ओर से दायर प्रार्थना पत्रों पर यह आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों मोबाइल लोकेशन के अनुसार दोषी ठहराए गए व्यक्ति अलवर मॉब लिंचिंग में शामिल थे।

मामले के अनुसार हरियाणा निवासी रकबर उर्फ अकबर और असलम 20 जुलाई, 2018 की रात को जंगल से पैदल गाय लेकर जा रहे थे, उसी दौरान लोगों ने गौ तस्करी का आरोप लगाते हुए बुरी तरह पिटाई की थी। असलम मौके से भाग गया, लेकिन रकबर घायल हो गया। बाद में अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
स्थानीय कोर्ट ने नरेश, परमजीत सिंह, धर्मेंद्र और विजय कुमार को सात साल की सजा सुनाई थी, जबकि नवल किशोर को बरी कर दिया गया था।
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता घनश्याम सिंह राठौड़ ने मामले में पैरवी करते हुए कहा कि गैर इरादतन हत्या के लिए सजा दी है। जबकि मामला हत्या का है। सजा बढ़ाने के लिए अपील लंगित है और साक्षयों से दोषी ठहराए गए व्यक्तियों के मॉब लिंचिंग में शामिल होने की पुष्टि होती है।












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