Mewar Rajvansh Family Tree: गोद लेने से लेकर पोते की जंग तक, जानें क्यों और कैसे बंटा मेवाड़ राजवंश?
Mewar Rajvansh Family Tree:राजस्थान का प्रसिद्ध उदयपुर का मेवाड़ राजवंश, जो महाराणा प्रताप का वंशज है, आजकल राजगद्दी और संपत्ति विवाद को लेकर चर्चा में है। राजगद्दी की लड़ाई ने अपनों को ही अपनो का दुश्मन बना दिया। विवाद तब बढ़ा, जब चित्तौड़गढ़ किले में हुए राजतिलक के बाद महाराणा प्रताप के वंशज विश्वराज सिंह को राजगद्दी पर बैठाया गया। लेकिन उनके चचेरे भाई लक्ष्यराज सिंह और उनके पिता अरविंद सिंह ने इसका विरोध किया।
अरविंद सिंह का दावा है कि ट्रस्ट और संपत्तियों का संचालन उनके पिता महाराणा भगवत सिंह ने उन्हें सौंपा था। उनका मानना है कि गद्दी का हकदार उनका बेटा लक्ष्यराज सिंह है। वहीं, विश्वराज सिंह को उनके पिता महेंद्र सिंह के वंशानुक्रम के आधार पर राजगद्दी दी गई। आइए, इस पूरे घटनाक्रम और मेवाड़ राजवंश के इतिहास को उनके फैमिली ट्री की मदद से समझते हैं....

मेवाड़ राजघराने को सिसोदिया राजवंश भी कहा जाता है। इस वंश की जड़ें भगवान राम के पुत्र लव तक जाती हैं। लव के वंशज राजा कनकसेन ने वलभी नगर को अपनी राजधानी बनाया। इनके चार बेटों में से चंद्रसेन से गुहिल वंश की स्थापना हुई।
566 ईसवी में राजा गुहादित्य ने गुहिल वंश की शुरुआत की। महाराणा प्रताप इसी वंश के 48वें राजा थे। उनके बाद कई राजा बने, जिनमें महाराणा अमर सिंह, महाराणा कर्ण सिंह और महाराणा फतह सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
महाराणा भगवत सिंह का राज्याभिषेक
महाराणा भगवत सिंह का जन्म 20 जून 1921 को हुआ। उनके पिता शिवरती के महाराज प्रतापसिंह थे। जब महाराणा भूपाल सिंह के कोई संतान नहीं हुई, तो भगवत सिंह को मेवाड़ की गद्दी पर बैठाया गया। उन्होंने 1955 में राज्याभिषेक किया और मेवाड़ राजवंश के इतिहास में नए अध्याय जोड़े।
व्यक्तित्व और शौक
- महाराणा भगवत सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
- वे ओजस्वी वक्ता और शास्त्रीय संगीत के जानकार थे।
- घुड़सवारी और क्रिकेट का शौक रखते थे।
- वे न केवल एक शासक, बल्कि एक सुलझे हुए खेल प्रेमी भी थे। उन्होंने राजस्थान क्रिकेट टीम और राजपूताना क्रिकेट टीम के लिए 31 मैच खेले।
विवाद की जड़: संपत्ति का बंटवारा
1955 में महाराणा भगवत सिंह ने गद्दी संभाली। महाराणा भगवत सिंह का विवाह बीकानेर की राजकुमारी सुशीला कंवर से हुआ। उनके तीन संतानें महाराणा महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह , कुमारी योगेश्वरी हुईं। 1963 से 1983 के बीच उन्होंने मेवाड़ की कई संपत्तियां लीज पर दे दीं या बेच दीं। इनमें लेक पैलेस, सिटी पैलेस, और जग मंदिर जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। इस फैसले से उनके बड़े बेटे महेंद्र सिंह नाराज हो गए और उन्होंने अपने पिता के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया।
महेंद्र सिंह ने हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत संपत्तियों को समान रूप से बांटने की मांग की। इसके जवाब में महाराणा भगवत सिंह ने 1984 में अपनी वसीयत में छोटे बेटे अरविंद सिंह को संपत्तियों का कार्यकारी बना दिया और महेंद्र सिंह को संपत्ति और ट्रस्ट से बेदखल कर दिया।
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राजतिलक और हालिया घटनाएं
बीती 10 नवंबर 2024 को महेंद्र सिंह के निधन के बाद उनके बेटे विश्वराज सिंह का राजतिलक हुआ। चित्तौड़गढ़ के फतह प्रकाश महल में हुए इस कार्यक्रम में खून से तिलक की परंपरा निभाई गई। लेकिन जब विश्वराज सिंह धूणी माता के दर्शन करने सिटी पैलेस पहुंचे, तो उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।
अरविंद सिंह के समर्थकों ने दावा किया कि सिटी पैलेस और धूणी माता ट्रस्ट के अधिकार में हैं, जिनका संचालन वे करते हैं। इस घटना ने विवाद को और बढ़ा दिया।
आधुनिक युग में मेवाड़ राजवंश
महाराणा भगवत सिंह के समय मेवाड़ राजवंश का ऐतिहासिक महत्व नई पहचान लेकर उभरा। उन्होंने मेवाड़ की संपत्तियों को ट्रस्ट और फाउंडेशन में बदल दिया। इसके अलावा, शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार और ट्रस्ट की स्थापना की। हालांकि, 1983 में उनके बड़े बेटे द्वारा दर्ज केस और बाद में उनके बेटों के बीच संपत्ति का बंटवारा इस परिवार में विभाजन का कारण बना।
वर्तमान वंशज और उनकी भूमिका
भगवत सिंह के बड़े बेटे महेंद्र सिंह और उनके पोते विश्वराज सिंह आज गद्दी के हकदार माने जा रहे हैं। दूसरी ओर, भगवत सिंह के छोटे बेटे अरविंद सिंह और पोते लक्ष्यराज सिंह संपत्ति और राजगद्दी पर अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं। आज, मेवाड़ राजवंश प्रतीकात्मक रूप से राजशाही परंपरा को निभाता है, लेकिन उनके संपत्ति और राजगद्दी विवाद ने इस ऐतिहासिक परिवार को सुर्खियों में ला दिया है।
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मेवाड़ राजपरिवार का फ़ैमिली ट्री:

उदय सिंह द्वितीय (1540-1572)
महाराणा प्रताप सिंह (1572-1597)
- उदय सिंह द्वितीय के पुत्र और मेवाड़ के 13वें महाराणा, जिन्होंने मुगलों के खिलाफ हल्दीघाटी के युद्ध में वीरता दिखाई। (प्रताप सिंह के बाद मेवाड़ के 19 अन्य महाराणा हुए।)
भूपाल सिंह (1930-1955)
- पत्नी: वीरद कुंवर
- मेवाड़ रियासत के अंतिम शासक और स्वतंत्र भारत में पहले औपचारिक महाराणा।
महाराणा भगवत सिंह (1955-1971)
- भूपाल सिंह के गोद लिए हुए उत्तराधिकारी।
- इनके परिवार में संपत्ति और अधिकारों को लेकर विवाद सामने आया।
संतान:
महेंद्र मेवाड़ (भगवत सिंह के बेटे):
- बेटा: विश्वराज सिंह नाथ (भाजपा विधायक)
- बहू: महिमा कुमारी (राजसमंद से भाजपा सांसद)
अरविंद मेवाड़ (बेटे):
- बेटा: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़
- बहू: निवृत्ति कुमारी देव
योगेश्वरी (बेटी):
प्रमुख विशेषताएं:
विश्वराज सिंह नाथ:
- उदयपुर के शाही परिवार के वारिस, जो वर्तमान में भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं।
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
- मेवाड़ राजघराने के उत्तराधिकारी और सामाजिक कार्यों में सक्रिय।
- यह वंशावली मेवाड़ की परंपराओं और विरासत को जीवंत रखती है। उदयपुर का शाही परिवार आज भी देश और विदेश में सम्मानित है।
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