Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Rajasthan: महाराणा प्रताप के वंशज विश्वराज सिंह मेवाड़ का भव्य राजतिलक, खून से तिलक कर दी 21 तोपों की सलामी

Rajasthan News: उदयपुर के प्रतिष्ठित मेवाड़ राजवंश में एक नई शुरुआत हुई है। महाराणा प्रताप के वंशज विश्वराज सिंह मेवाड़ का सोमवार को चित्तौड़गढ़ किले में पारंपरिक और ऐतिहासिक रीति-रिवाजों के साथ राजतिलक किया गया। यह समारोह फतेह प्रकाश महल में आयोजित हुआ। जहां 21 तोपों की सलामी दी गई।

Recommended Video

    महाराणा प्रताप के वंशज विश्वराज सिंह मेवाड़ का भव्य राजतिलक, खून से तिलक कर दी 21 तोपों की सलामी

    सदियों पुरानी परंपरा का पालन करते हुए सलूंबर रावत देवव्रत सिंह ने अपने खून से उनका अभिषेक किया। इस अनूठी प्रथा के साथ विश्वराज सिंह को एकलिंगनाथ जी के 77वें दीवान के रूप में औपचारिक रूप से घोषित किया गया।

    450 साल पुरानी परंपरा का निर्वाह

    इस प्राचीन राज्याभिषेक की शुरुआत फरवरी 1572 में हुई थी। जब महाराणा प्रताप को इसी विधि से मेवाड़ का महाराणा घोषित किया गया था। इतिहासकार डॉ. अज्ञात शत्रु सिंह शिवराती ने बताया कि उस समय पारंपरिक सामग्री उपलब्ध न होने पर रावत किशन दास ने अपने खून से प्रताप का अभिषेक कर इस परंपरा को स्थापित किया था। तब से यह परंपरा चूंडा वंश के वंशज निभा रहे हैं।

    vishvraj singh mewar

    आध्यात्मिक यात्रा और पारिवारिक विवाद

    राज्याभिषेक के बाद विश्वराज सिंह को सिटी पैलेस के धूनी स्थल और कैलाशपुरी स्थित एकलिंगनाथ मंदिर में दर्शन करने की परंपरा पूरी करनी थी। हालांकि इस दौरान पारिवारिक विवाद भी उभरकर सामने आया। सिटी पैलेस पर वर्तमान में अरविंद सिंह मेवाड़ का नियंत्रण है। जो विश्वराज सिंह के चाचा हैं। महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा जारी किए गए नोटिसों में विश्वराज को पैलेस और मंदिर में प्रवेश की अनुमति से वंचित कर दिया गया। प्रशासन को विवाद के मद्देनजर सिटी पैलेस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। जिससे पारिवारिक संघर्ष की तीव्रता स्पष्ट हुई।

    संघर्ष के बावजूद परंपरा का निर्वाह

    राज्याभिषेक में विभिन्न शाही परिवारों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। जो इस परंपरा के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। विश्वराज सिंह मेवाड़ ने न केवल मेवाड़ राजवंश की प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाया। बल्कि मेवाड़ की गौरवशाली विरासत और पहचान का प्रतीक भी बने। इस समारोह ने राजस्थान के राजघरानों की संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने में इन परंपराओं के महत्व को दोहराया।

    विरासत और आधुनिक समय की जटिलता

    हालांकि इस राज्याभिषेक ने पारिवारिक विवादों और शाही विरासत के अधिकार को लेकर चल रही लड़ाई को भी उजागर किया। पैलेस के दरवाजे बंद करना और अनधिकृत प्रवेश को रोकने के प्रयास पारिवारिक संघर्ष को दर्शाते हैं। यह घटना न केवल विरासत और पहचान की निरंतरता को प्रदर्शित करती है। बल्कि आधुनिक कानूनी और प्रशासनिक ढांचे में परंपरा और अधिकार के बीच की जटिलताओं को भी दर्शाती है।

    नई जिम्मेदारियों के साथ शुरुआत

    विश्वराज सिंह मेवाड़ का राज्याभिषेक न केवल मेवाड़ राजवंश की गौरवशाली परंपराओं का उत्सव था। बल्कि आधुनिक समय में राजघरानों की भूमिका, उनके अधिकार और सांस्कृतिक पहचान की प्रासंगिकता पर भी एक संदेश भी है।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+