राजस्थान पंचायत चुनाव 2020 : बांसवाड़ा में यह है 'सरपंच दम्पति', 32 साल से इन्हें कोई नहीं हरा पाया
बांसवाड़ा। राजस्थान में इन दिनों पंचायती राज चुनाव 2020 हो रहे हैं। 17 जनवरी को प्रथम चरण पूरा हो चुका है। 22 जनवरी को दूसरे चरण के तहत मतदान हो रहा है। तीसरा चरण 29 जनवरी को है। दर्जनों ग्राम पंचायत के चुनाव आगामी आदेश तक स्थिगत हैं।
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चुनावी सरगर्मियों के बीच मिलिए राजस्थान के ऐसे पति पत्नी से जिन्हें लोग सरपंच दम्पति के नाम से भी जानते हैं। इसकी वजह ये है कि बीते 32 साल से इस पति पत्नी के जोड़े को कोई चुनाव में हरा नहीं पाया है। कभी पति तो कभी पत्नी के हाथ में गांव की बागडोर आ रही है।

गोलियावाडा ग्राम पंचायत घटोल बांसवाड़ा
हम बात कर रहे हैं राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की घाटोल पंचायत समिति के गांव गोलियावाडा की। वर्ष 1988 से लेकर अब तक यहां पर पति-पत्नी में से ही किसी को सरपंच चुना जा रहा है। पंचायती राज चुनाव 2020 में शारदा मईडा तीसरी बार सरपंच बनी हैं। शारदा के पति मोहनलाल मईडा चार बार गोलियावाडा के सरपंच चुने जा चुके हैं।

मईडा दम्पति कब-कब बना सरपंच
वर्ष 1988 के समय गोलियावाडा ग्राम पंचायत को खेरवा के नाम से जाना जाता था। तब पहली बार मोहनलाल मईडा सरपंच बने।
वर्ष 1995 में परिसीमन में खेरवा ग्राम पंचायत के दो हिस्से हो गए। गोलियावाडा नई ग्राम पंचायत बनी और मोहनलाल को दूसरी बार सरपंच बनने का अवसर मिला।
वर्ष 2000 में ग्राम पंचायत गोलियावाडा के लोगों ने मोहनलाल की सरपंच चुनाव में जीत की हैट्रिक बना दी। फिर इन्हीं पर विश्वास जताया।
वर्ष 2005 में गोलियावाडा ग्राम पंचायत की सीट महिला के आरक्षित हो गई। नतीजतन मोहन लाल ने खुद की बजाय पत्नी शारदा मईडा को मैदान में उतारा और वे जीत गईं।
वर्ष 2010 में फिर चुनाव हुए। बीते पांच साल में शारदा मईडा ने भी गांव के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। ऐसे ग्रामीणों ने दूसरी बार भी शारदा को सरपंच चुना।
वर्ष 2015 में गोलियावाडा ग्राम पंचायत की सीट सामान्य हुई तो पूर्व सरपंच मोहनलाल ने फिर भाग्य आजमाया। इस बार भी जीत गए।
वर्ष 2020 में शारदा मईडा तीसरी बार सरपंच बनी।

जो भी लड़ता चुनाव वो हार जाता
बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 52 किलोमीटर दूर गोलियावाडा के ग्रामीणों की मानें तो सरपंच दम्पति का सरल स्वभाव और गांव के घर-घर से इनका जुड़ाव ही इन्हें हर बार सरपंच चुन रहा है। हर चुनाव में अन्य प्रत्याशी भी खड़े होते हैं, मगर वे मोहनलाल और शारदा के सामने कभी जीत दर्ज नहीं कर सके।












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