Mahavir Jayanti 2023: जयपुर की वो जगह जहां खुद चलकर आई थी भगवान महावीर की प्रतिमा
महावीर जयंती 2023: देश में जैन समुदाय का सबसे बड़ा पर्व भगवान महावीर जयंती के मौके पर जानिए जयपुर के गोपालजी का रास्ता स्थित जैन मंदिर के इतिहास के बारे में।

दुनियाभर को जियो और जीने दो तथा अहिंसा परमो धर्म का संदेश देने वाले भगवान महावीर की जयंत आज मनाई जा रही है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के देशभर में अनेक मंदिर हैं। हर किसी मंदिर का इतिहास काफी रोचक है। ऐसा ही एक मंदिर राजस्थान की राजधानी जयपुर के गोपाल जी का रास्ता में स्थित है।
जयपुर के गोपाल जी का रास्ता स्थित भगवान महावीर के मंदिर के बारे में किवंदति है कि यहां पर भगवान की प्रतिमा अपने आप चलकर आई थी। आमेर से प्रतिमा लेकर आई बैलगाड़ी यहां पर अपने आप थम गई थी। फिर यहीं पर भगवान महावीर का विशाल मंदिर बना दिया गया।
मीडिया से बातचीत में भगवान महावीर मंदिर अध्यक्ष एनके सेठी व मंत्री अशोक टकसाली बताते हैं कि 200 साल पहले जयपुर के आमेर के मंदिर में दो प्रतिमाएं मिली थीं। तब तय किया कि दोनों प्रतिमाओं को बैलगाड़ी पर रखकर बिना सारथी के बैलगाड़ी को छोड़ जाए।
उनमें से एक बैलगाड़ी आमेर की नसियां के दरवाजे पर खड़ी हो गई। दूसरी बैलगाड़ी में भगवान महावीर की प्रतिमा रखी हुई थी वह बैलगाड़ी अपने आप चलते हुए गोपाल जी का रास्ता जयपुर में आकर मंदिर के सामने खड़ी हो गई। फिर मंदिर में दूसरी वेदी बनाकर भगवान महावीर की प्रतिमा विराजमान की गई।
भगवान महावीर के मंदिर की विशेषता
युवा मंडल सचिव विनोद बाकलीवाल के अनुसार गोपाल जी का रास्ता में भगवान महावीर के मंदिर की दीवारों पर सोने का कार्य किया हुआ है। इस मंदिर में पन्ने, माणक समेत अन्य दुर्लभ 24 तीर्थकरों की करीब 32 प्रतिमाएं हैं। तीनों द्वार चांदी के बने हैं। इन पर भगवान महावीर की माता के सोलह स्वप्न हैं। वेदी के दोनों ओर भगवान के पूर्व भव आठ भित्ती चित्रों में अंकित हैं।












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