लोकसभा चुनाव 2024: अशोक गहलोत का पूरा फोकस बेटे की सीट पर, CEC की एक भी बैठक में नहीं गए
Ashok Gehlot SOn Vaibhav Gehlot on jalore Seat: लोकसभा चुनाव 2024 में अशोक गहलोत की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है। पहले विधानसभा चुनाव 2023 में प्रदेशभर की 200 सीटों पर टिकट बंटवाए थे। अब लोकसभा चुनाव में पूरा फोकस बेटे की सीट पर है।
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत का बेटा वैभव गहलोत जालौर-सिरोही लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हैं। पिछली बार जोधपुर से भाजपा के गजेंद्र सिह शेखावत के सामने 2 लाख 74 हजार 440 वोटों से चुनाव हार गए थे। इस बार वैभव के सामने भाजपा के लुंबाराम चौधरी हैं।

विधानसभा चुनाव में दावेदारों से फीडबैक लेने, उनके पैनल बनाए जाने से लेकर अंतिम प्रत्याशी चयन में जिस तरह से अशोक गहलोत मुख्य भूमिका में नजर आए थे। वैसी स्थिति इस बार लोकसभा चुनाव 2024 में नहीं देखने को मिल रही। हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक की रणनीति बदली है।
दैनिक भास्कर में छपी एक खबर के अनुसार लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर केंद्रीय चुनाव समिति (CSC) की दिल्ली में तीन बार बैठक हो चुकी हैं, जिनमें राजस्थान के प्रत्याशियों को लेकर मंथन किया गया था। तीनों में एक भी बैठक में गहलोत नहीं गए। पहली दो बैठक से स्वास्थ्य कारणों की वजह से दूर रहे।
सीएससी की तीसरी बैठक के दौरान अशोक गहलोत बेटे वैभव गहलोत के लिए दक्षिण भारत में प्रवासी राजस्थानियों का समर्थन जुटाने गए हुए थे। इस दौरान अशोक गहलोत व वैभव गहलोत ने बंगलूरू, चेन्नई व हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों में मारवाड़ी समाज के कई आयोजनों में हिस्सा लिया।
बेटे वैभव गहलोत को राजस्थान से संसद में पहुंचाने के लिए अशोक गहलोत ने पूरी ताकत झोंक रखी है। खुद तीन बार सीएम रह चुके अशोक गहलोत की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। लोकसभा चुनाव 2019 में जोधपुर से ही वैभव को हार का सामना करना पड़ा था।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने राजस्थान में अपने प्रत्याशियों की पहली सूची 12 मार्च को जारी की थी, जिसमें वैभव गहलोत को जालौर-सिरोही से टिकट दिया गया था। इसके बाद से गहलोत की ज्यादातर सियासी गतिविधि जालौर-सिरोही सीट को लेकर हो रही है। जालौर-सिरोही के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ जयपुर व अपने निवास पर बैठकें भी की हैं।












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