Jaisalmer Desert Festival 2026: रेगिस्तान में मचेगी धूम, मिस्टर डेजर्ट से लेकर ऊंट डांस तक देखिए पूरा शेड्यूल
Jaisalmer Desert Festival 2026: राजस्थान की स्वर्ण नगरी जैसलमेर (Golden City) एक बार फिर देसी और विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार है। थार के रेगिस्तान में संस्कृति, संगीत और रोमांच का सबसे बड़ा मेला 'मरू महोत्सव 2026' (Maru Mahotsav 2026) का आगाज होने जा रहा है। अगर आप भी 30 जनवरी से 1 फरवरी के बीच राजस्थान घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो जैसलमेर से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में आपको राजस्थानी लोक संस्कृति के ऐसे रंग देखने को मिलेंगे, जो दुनिया में और कहीं नहीं हैं।
मरू महोत्सव की शुरुआत सोनार किले (Sonar Fort) से एक भव्य शोभा यात्रा के साथ होगी। इस फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण यहां होने वाली अनोखी प्रतियोगिताएं हैं।

Jaisalmer Desert Festival 2026: मिस्टर डेजर्ट प्रतियोगिता का आयोजन
⦁ इसमें पुरुषों के लिए 'मिस्टर डेजर्ट' (Mr. Desert) और महिलाओं के लिए 'मिस मूमल' (Miss Moomal) प्रतियोगिता सबसे खास होती है, जिसमें राजस्थानी आन-बान और शान की झलक देखने को मिलती है।
⦁ इसके अलावा, मूंछ प्रतियोगिता और साफा (पगड़ी) बांधने की होड़ पर्यटकों को खूब रोमांचित करती है।
⦁ जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेले की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षा बल के जवान मुस्तैदी से हिफाजत करेंगे।
Jaisalmer Desert Festival 2026 Highlights: ऊंटों की दौड़ होगी खास आकर्षण
रेगिस्तान का जहाज यानी ऊंट इस मेले का हीरो होता है। बीएसएफ (BSF) के जवानों द्वारा 'कैमल टैटू शो' और ऊंटों की दौड़ (Camel Race) देखना एक अलग ही अनुभव है। ऊंटों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और वे धोरों पर करतब दिखाते हैं। महोत्सव की शामें सम सैंड ड्यून्स (Sam Sand Dunes) पर सजती हैं, जहाँ चांदनी रात में मशहूर लोक कलाकार कालबेलिया नृत्य और संगीत की धुनों पर पर्यटकों को थिरकने पर मजबूर कर देते हैं।
Jaisalmer Desert Festival: तीन दिनों का होगा आयोजन
पहला दिन (30 जनवरी): शोभा यात्रा, मिस्टर डेजर्ट और मिस मूमल प्रतियोगिता, शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम।
दूसरा दिन (31 जनवरी): ऊंट श्रृंगार प्रतियोगिता, रस्साकशी (भारतीय बनाम विदेशी पर्यटक), और बीएसएफ द्वारा कैमल टैटू शो।
तीसरा दिन (1 फरवरी): घुड़दौड़, सैंड आर्ट डिस्प्ले और सम के धोरों पर भव्य आतिशबाजी के साथ समापन।
जैसलमेर का यह महोत्सव सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि राजस्थान की मेहमाननवाजी का प्रतीक है।












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