क्या राजस्थान भाजपा में कुछ गड़बड़ चल रहा है? 'महारानी' समर्थकों को लेकर उठ रहे हैं सवाल

जयपुर: खबरें हैं कि राजस्थान भाजपा में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। खासकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समर्थक विधायकों की ओर से प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को लिखी कथित 'शिकायतों' वाली चिट्ठी ने कई तरह की अटकलबाजियों को जन्म दिया है। हालांकि, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह मीडिया के सामने इस चिट्ठी को ज्यादा महत्त्व नहीं दे रहे हैं। लेकिन, जानकारी के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व भी इस मामले को लेकर काफी गंभीर है; और वह हर हाल में अनुशासन बनाए रखना चाहता है। गौरतलब है कि राजस्थान में विधानसभा की चार सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं, उससे पहले पार्टी वहां गहलोत सरकार के खिलाफ एक बड़ी मुहिम शुरू करने वाली है।

6 महीने बाद भाजपा की बैठक में पहुंचीं 'महारानी'

6 महीने बाद भाजपा की बैठक में पहुंचीं 'महारानी'

मंगलवार को जयपुर में बीजेपी मुख्यालय पर पार्टी की कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और प्रभारी महासचिव अरुण सिंह मौजूद थे। बैठक में करीब डेढ़ घंटे बाद वसुंधरा राजे भी पहुंचीं और फिर बिना मीडिया से कोई बात किए ही निकल गईं। पिछले 6 महीने में यह पहला मौका था, जब 'महारानी' पार्टी की किसी विशेष बैठक में आई थीं। वैसे वह आईं भी अपने अंदाज में और निकलीं भी अपने रुतबे के साथ। यह बैठक अगले 6 मार्च से लेकर 14 मार्च तक गहलोत सरकार के खिलाफ पार्टी के अभियान के एजेंडे को लेकर बुलाई गई थी। लेकिन, अभी चर्चा भाजपा के उन करीब 20 विधायकों की ओर से प्रदेश अध्यक्ष को लिखी गई चिट्ठी को लेकर हो रही है, जिसपर पार्टी के नेता साफगोई से बचते दिख रहे हैं।

20 विधायकों की चिट्ठी पर सवाल

20 विधायकों की चिट्ठी पर सवाल

जानकारी के मुताबिक वह खत पार्टी विधायक कैलाश मेघवाल की अगुवाई में लिखी गई है, जिन्हें वसुंधरा का भरोसेमंद माना जाता है। यह भी बताया जा रहा है कि उसमें प्रदेश अध्यक्ष से विधानसभा में पार्टी विधायकों को सार्वजनिक हित के मुद्दों को उठाने के लिए बराबर समय आवंटित करने की मांग गई है। लेकिन, अरुण सिंह से इसके बारे में पूछा गया तो वो बोले, 'मैंने चिट्ठी का कंटेंट नहीं देखा है। हम पार्टी में इसको लेकर बात करेंगे। यह मीडिया के लिए बड़ा मुद्दा हो कता है, लेकिन पार्टी के लिए नहीं। हमारे यहां एक ही ग्रुप है और एक ही पार्टी है और वह है बीजेपी.....सामूहिक तौर पर चिट्ठी लिखने की जगह, जिनके पास कोई मुद्दा था, उन्हें पार्टी के अंदर व्यक्तिगत स्तर पर बातचती करनी चाहिए थे।' गौरतलब है कि यह प्रतिक्रिया बैठक के बाद आई, जिसमें राजे भी उपस्थित होकर निकल चुकी थीं। इससे पहले वो इन बैठकों में नहीं पहुंच रही थीं, जिससे मतभेद की बातों को ज्यादा हवा मिली। (ऊपर की तस्वीरें साभार-राजस्थान भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से)

'केसरिया में हरा-हरा, राजस्थान में वसुंधरा'

'केसरिया में हरा-हरा, राजस्थान में वसुंधरा'

लेकिन, एक बात गौर करने वाली है कि जब पार्टी में कोई गुटबाजी की स्थिति नहीं है तो जब पूर्व सीएम निकल रही थीं तो उनके समर्थकों को उनके पक्ष में जोरदार नारेबाजी की क्या जरूरत थी। यहां तो सत्ताधारी दल के खिलाफ रणनीति तय की गई थी। वहां पर नारे लगाए जा रहे थे- 'केसरिया में हरा-हरा, राजस्थान में वसुंधरा।' यही नहीं, जब उन्हें पता था कि बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी महासचिव प्रेस कांफ्रेंस करने वाले हैं तो वह उससे पहले क्यों निकल गईं। क्योंकि, आज भी राज्य में वह पार्टी की सबसे प्रमुख चेहरा हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि राजस्थान में विधानसभा की चार सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं, ऐसे में वह अगर साथ में मीडिया के सवालों का जवाब देतीं तो पार्टी को इससे क्या नुकसान होता?

2 मार्च को नड्डा करेंगे प्रदेश नेताओं के साथ बैठक

2 मार्च को नड्डा करेंगे प्रदेश नेताओं के साथ बैठक

एक बात और ध्यान देने योग्य है कि जिस चिट्ठी को दिल्ली से भेजे गए अरुण सिंह 'कोई बड़ा मुद्दा नहीं है', कह रहे हैं उसके बारे में जानकारी तब सामने आई जब, रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली में उस बैठक में शामिल होने पहुंचीं थीं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद थे। यही वजह है कि कयास लगाए जा रहे हैं कि उस खत को लेकर पार्टी नेतृत्व में अच्छा संदेश नहीं गया है और हो सकता है कि इसी वजह से वो कोर कमिटी की बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंची हों। बहरहाल, पार्टी ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है और इससे पहले नड्डा भी 2 मार्च को प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ जयपुर में एक बैठक करने वाले हैं।

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