VIDEO: आर्मी से रिटायर होकर आए फौजी को लेने 'बॉर्डर' पर पहुंचे लोग, 100 वर्षीय मां ने भी दिया आशीर्वाद
Keshar Dev Dhillon Retirement Indian Army: सुबह 9 बजे का वक्त था। गांव बाय व झाझड़ से हर किसी के कदम नवलगढ़-बेरी के पास सीकर-झुंझुनूं जिले की सीमा (बॉर्डर) की ओर बढ़ रहे थे। वजह यह थी कि फौजी बेटा केशर देव ढिल्लन लेफ्टिनेंट पद से रिटायर होकर घर आ रहा था।
सीकर-झुंझुनूं सीमा पर महिलाएं लोकगीत गाते हुए पहुंचीं। मोटर साइकिल व अन्य वाहनों पर सवार युवाओं के हाथों में तिरंगा व मुंह पर भारत माता के जयकारे थे। सीकर की तरफ से जैसे ही केशर देव ढिल्लन ने अपने जिले झुंझुनूं की सीमा में प्रवेश किया तो उनके स्वागत में लोगों ने पलक पांवड़े बिछा दिए।
यह भी पढ़ें- जुड़वा बच्चों की मां सुभिता ढिल्लन ने रचा 'इतिहास', शादी के बाद पढ़ाई पूरी कर 3 बार पाई सरकारी नौकरी

यहां से केशर देव ढिल्लन को खुली जीप में बैठाकर सात किलोमीटर दूर घर ले गए। रास्ते में सुबोध स्कूल, खटीकान प्याऊ, झाझडिया की ढाणी (ननिहाल), सीनियर स्कूल बिरोल में स्वागत किया गया। बिरोल के निकुदासजी आश्रम में आशीर्वाद लिया।
गांव बाय की मातवा की जोहड़ी स्थित बालाजी मंदिर परिसर में स्वागत समारोह हुआ, जिसमें पूर्व किसान यूनियन अध्यक्ष बेगाराम ढिल्लन समेत कई लोगों ने केशर देव ढिल्लन को साफा पहनाया। फिर यहां से घोड़ी पर बैठाकर उनको ढिल्लन कृषि फार्म हाउस स्थित घर ले जाया गया, जहां उन्होंने अपनी 100 साल 3 माह उम्र की मां नारायणी देवी से आशीवार्द लिया।

केशर देव ढिल्लन के चेचेरे भाई व रेलीज इंडिया लिमिटेड के एरिया सेल्स मैनेजर सुरजीत ढिल्लन ने बताया कि केशर देव ढिल्लन चार भाइयों में सबसे छोटे हैं। इनका परिवार मूलरूप से गांव झाझड़ की पाना वाली ढाणी का रहने वाला है। वर्तमान में मातवा जोहड़ी बाय में रहता है।
यह भी पढ़ें- गर्भ में जुड़वा बच्चे, फिर भी सुभिता ढिल्लन ने जारी रखी पढ़ाई और कर दिया राजस्थान टॉप, देखें डांस VIDEO

केशर देव ढिल्लन का जीवन परिचय
- 28 जून 1994 को गोवा में बतौर सिपाही भारतीय सेना ज्वाइन की।
- साल 2005 में नायक, 2010 में हवलदार, 2008 में नायब सुबेदार बने।
- साल 2020 में सुबेदार, 26 जनवरी 2024 को लेफ्टिनेंट बने।
- 3 जुलाई 1998 में सुलोचना देवी के साथ शादी हुई।
यह भी पढ़ें- Success Story: सूरत में बेलेंसिंग स्टंटमैन बना गांव झाझड़ का राकेश सैनी, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में आया नाम

- 30 साल की सर्विस के बाद 30 जून 2024 को रिटायर हो गए।
- केशरदेव के पिता बोयतराम को निधन हो चुका है।
- बड़े भाई ओमप्रकाश ढिल्लन भी आर्मी से रिटायर हैं।
- दूसरे भाई दयाराम ढिल्लन व जगदीश ढिल्लन खेती करते हैं।












Click it and Unblock the Notifications