राजस्थान में इस मोर्चे पर कांग्रेस और BJP का दर्द एक, अपनों से ही मिल रही चुनौती

जयपुर, 9 जून: राजस्थान में सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा दोनों ही पार्टियां भीतर की चुनौतियों से ही परेशान हो चुकी हैं। कांग्रेस में एकबार फिर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का विरोधी खेमा सक्रिय हो चुका है तो भाजपा पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खेमा का ऐसा दबाव है कि पार्टी उनकी छत्रछाया से निकल ही नहीं पा रही है। हालांकि, भाजपा के मुकाबले कांग्रेस का सिरदर्द ज्यादा बड़ा है, क्योंकि वह सत्ता में है और एकबार ऐसे ही बगावत की वजह से गहलोत का सिंहासन डोल भी चुका है। जबकि, भाजपा की दिक्कत ये है कि खेमेबाजी के चलते उसे सशक्त विपक्ष की भूमिका निभा पाने में दिक्कत हो रही है।

राजस्थान में कांग्रेस-भाजपा दोनों का दर्द 'एक'

राजस्थान में कांग्रेस-भाजपा दोनों का दर्द 'एक'

राजस्थान की मौजूदा सियासत पर नजदीक से गौर करें तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बीच राजनीतिक कड़वाहट तो नहीं दिखती है, लेकिन दोनों दलों के नेता अपने अंदर की खेमेबाजियों से ही ज्यादा परेशान हो रहे हैं। सचिन पायलट का गुट एकबार फिर से वादाखिलाफी के आरोपों के साथ सीएम गहलोत खेमे को घेरने की कोशिश में लगा हुआ है तो प्रदेश भाजपा में वसुंधरा राजे का दबदबा ऐसा है कि उनका खेमा 2023 के लिए अभी से उनको सीएम के चेहरे की तौर पर पेश करने की कवायद में जुट गया है। जाहिर कि दोनों दलों में चल रही ये गुटबाजियां केंद्रीय नेतृत्व के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैं। वसुंधरा अपने तेवरों से दिल्ली को भी झटके दे देती हैं तो कांग्रेस हाई कमान के लिए गहलोत-पायलट की गुटबाजी का कोई हल नजर नहीं आ रहा है।

गहलोत के खिलाफ पायलट खेमा फिर सक्रिय

गहलोत के खिलाफ पायलट खेमा फिर सक्रिय

राजस्थान कांग्रेस में ताजा उठापटक की शुरुआत तब हुई जब सचिन पायलट समर्थक एमएलए हेमाराम चौधरी ने पिछले महीने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से ही दोनों गुटों में फिर से तनाव बढ़ गया है। हालांकि, बाड़मेर जिले के गुड़ामलानी से पार्टी विधायक ने अपने इस्तीफे का कोई कारण तो नहीं बताया है लेकिन, राजनीति के जानकार मानते हैं कि इसके पीछे पायलट समर्थकों को दरकिनार करना हो सकता है। विधानसभा के स्पीकर फिलहाल उनसे निजी तौर पर मिलकर इस्तीफे का कारण बताने को कहकर उसे स्वीकार करने से टालमटोल कर रहे हैं। लेकिन, जानकारी के मुताबिक हाल ही में पायलट ने उन वादों को पूरा नहीं कर पाने के लिए आलाकमान के खिलाफ असंतोष जाहिर किया है, जो सीएम गहलोत के खिलाफ 18 विधायकों के विद्रोह के बाद उन्हें मनाने के लिए दिया गया था। उस समय कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश के प्रभारी महासचिव अजय माकन की अगुवाई में एक कमिटी बनाकर किसी तरह से विवाद पर विराम लगाने में सफलता पा ली थी।

भाजपा में अभी से सीएम पद के दावेदार के लिए बैटिंग

भाजपा में अभी से सीएम पद के दावेदार के लिए बैटिंग

जहां तक बीजेपी की बात है तो राजस्थान विधानसभा चुनाव से करीब ढाई साल पहले ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार को लेकर दबाव की राजनीति को हवा दी जाने लगी है। वसुंधरा राजे सरकार में उनके कैबिनेट सहयोगी रहे भाजपा नेता रोहिताश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि 'वो (वसुंधरा) राजस्थान में पार्टी की सबसे बड़ी नेता हैं। सीएम के लिए कोई दूसरा चेहरा नहीं है, लेकिन 5-6 नाम सिर्फ सुनने को मिला है।' पिछले साल दिसंबर में भाजपा का अंदरूनी कलह तब सामने आया था, जब वसुंधरा समर्थकों ने 'वसुंधरा राजे समर्थक राजस्थान (मंच)' के नाम से उनकी सरकार के दौरान की कामयाबियों और नीतियों का प्रचार करना शुरू कर दिया था। स्थिति ऐसी हो गई थी कि बाद में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को राजस्थान विधानसभा उपचुनाव से पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया, विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया और विपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौर के साथ बैठक करके पूर्व मुख्यमंत्री के साथ उनके मतभेदों को दूर करने की कोशिश की थी।

अपने तेवरों से पार्टी को सकते में डाल देती हैं वसुंधरा

अपने तेवरों से पार्टी को सकते में डाल देती हैं वसुंधरा

जहां तक वसुंधरा की बात है तो उनके बारे में पार्टी के नेता ही दबी जुबान में अपनी मनमर्जी चलाने की शिकायतें करते सुने जाते हैं। 2018 के दिसंबर में जबसे वहां कांग्रेस की सरकार बनी है, वह जयपुर में पार्टी दफ्तर में होने वाली ज्यादातर बैठकों से गायब ही रहती हैं। हालांकि, वह पार्टी नेताओं के साथ किसी तरह के विवाद को खारिज करती रही हैं। लेकिन, यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी हो जाता है कि जब सचिन पायलट की बगावत के चलते गहलोत सरकार खतरे में दिखाई दे रही थी तो प्रदेश में बीजेपी के सहयोगी हनुमान बेनिवाल ने ही वसुंधरा पर गहलोत सरकार बचाने की कोशिश करने का आरोप लगा दिया था। हालांकि, राजे ने इन आरोपों को यह कहकर खारिज कर दिया था कि वह पार्टी के प्रति समर्पित हैं और सिर्फ कंफ्यूजन पैदा करने के लिए इस तरह की कोशिशें की जाती हैं, जिसका कोई आधार नहीं है।

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